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Basti News: मायूस होकर धान की फसल निहार रहे किसान...बचाने की जद्दोजहद
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बहादुरपुर में गिरी धान की फसल संवाद
- फोटो : credit
बस्ती। अर्नब चक्रवात ने किसानों के अरमान पर पानी फेर दिया है। दो दिन झमाझम बारिश और तेज हवा के चलते खेतों में खड़ी धान की फसल पानी में डूब गई है। किसान मायूस होकर गिरी फसल को निहार रहे हैं। कुछ जगहों पर फसल सुरक्षित करने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। धान की बालियां काटकर बाहर निकाली जा रही है। मौसम का रुख अब भी बदला नहीं है। बारिश बंद जरूर हुई हैं लेकिन नरमी बरकरार है।
रविवार को भी पूरे दिन धूप नहीं निकली। तापमान में गिरावट आई। अधिकतम तापमान 24 और न्यूनतम 21 डिग्री सेल्सियस पर टिका रहा। पूरे दिन ठंड का एहसास होता रहा। धान की फसल तैयार होने के कगार पर थी। किसान इसके सूखने का इंतजार कर रहे थे, तभी बारिश हो गई। फसल भींगकर खेतों में गिर गई है। किसानों का कहना है कि यदि तल्ख धूप नहीं निकली तो धान की फसल सड़ने लगेगी। कुछ किसान फसल बचाने के लिए बालियों की कटाई भी शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि यदि धान की बालियों को पानी से अलग कर लिया जाएगा तो इसके दानों के काले पड़ने की संभावना कम रहेगी। जबकि कुछ किसानों का कहना है कि यदि दो-तीन दिन मौसम में और नमी बरकरार रही तो धान की फसल को बर्बाद होने से बचाया नहीं जा सकता है।
पहले दिन बंद रहे क्रय केंद्र, नहीं हुई धान खरीद
बस्ती। एक नवंबर से धान खरीद अभियान शुरू होने वाला था। मगर इस दिन रविवार होने के नाते जिले के सभी क्रय केंद्र बंद रह गए। जिससे खरीद का शुभारंभ पहले दिन नहीं हो सका। कुछ अगेती खेती करने वाले किसान सरकारी व्यवस्था से नाराज भी है। ओड़वारा के प्रदीप कुमार बताते हैं कि उनके नजदीकी केंद्रों पर धान खरीद से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। क्रय केंद्र प्रभारी से लेकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी तक का फोन नहीं उठता है। पूरा अभियान सिर्फ कागज में चलाया जा रहा है। जबकि सॉऊघाट के किसान राम प्रकाश बताते हैं कि शुरुआत में जानबूझकर क्रय केंद्रों पर खरीद नहीं की जाती है। यह समय बिचौलियों का होता है। वह सीधे किसान के संपर्क में होते हैं। औने-पौने में उपज खरीद कर डंप कर लेते हैं। इसके बाद अंतिम दौर में अचानक विभाग के खरीद का ग्राफ बढ़ने लगता है। जबकि आम किसान उपज से खाली हो जाते हैं। बिचौलियों के जरिये नियमों का कोरम पूरा करने के साथ यह खेल प्रत्येक अभियान में चलता है। इसीलिए मामला पकड़ में नहीं आता है।
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धान के साथ गन्ने की उपज को लेकर भी किसान चिंतित
बहादुरपुर। अर्णब तूफान के चलते धान की फसल डूबकर बर्बाद हो रही है। वहीं कुछ जगहों पर गन्ने की फसल भी बारिश की वजह से प्रभावित हुई है। किसानों के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही है। फसल बर्बाद होने के कारण किसानों के सामने आने वाले समय में आर्थिक संकट खड़ा होने की संभावना है। किसानों का कहना है कि धान और गन्ने की फसल से होने वाली आय इस बार प्रभावित होगी। क्षेत्र के किसान रमेश चौधरी, बाबूराम चौबे, राजमणि, शत्रुघ्न पांडेय धनंजय, दिनेश, रामगोपाल, राजबली, घनश्याम, शिवदास चौधरी, राम देव आदि ने बताया की कुछ जगहों पर धान की फसल कट चुकी थी। लेकिन, वह दवाई से पहले वह पानी में डूब गई है। उसके सड़ने की संभावना बढ़ गई है। जहां धान की फसल नहीं कटी है वह गिरकर पानी में डूब गई है। खेतों में पानी लगने से फसल को नुकसान हो रहा है। इससे उपज की गुणवत्ता खराब हो जाएगी। वहीं निचले सतह वाले गन्ने के खेत में पानी लगा हुआ है। जिससे गन्ने की गुणवत्ता खराब होने की संभावना बढ़ गई है।
रबी फसलों की बोआई भी होगी प्रभावित
परशुरामपुर। दो दिनों की बारिश से धान और गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचने के साथ रबी फसलों की बोआई भी प्रभावित हो गई है। किसानों का कहना है कि खेतों में पानी लगने से आलू, चना, मटर, की खेती पर संकट आ गया है। इन फसलों की बोआई के लिए समयानुसार खेत तैयार नहीं हो पा रहे हैं। खेतों में अभी जरूरत से ज्यादा नमी है। क्षेत्र के जानकी प्रसाद, वीरेंद्र कुमार, आशाराम, सोमई, रामसजीवन, श्याम सुन्दर, दयाराम सहित तमाम किसानों ने बताया कि जलमग्न धान की फसलों को किसी तरह अगर काट भी लिया जाए तब भी खेत की जोताई नहीं की जा सकती है। निचली सतह वाले खेत में जलभराव के कारण गेहूं की बोआई भी इस बार विलंब से हो सकती है।
धान खरीद अभियान का शुभारंभ दो नवंबर से होगा। आज रविवार सार्वजनिक अवकाश होने के नाते क्रय केंद्र नहीं खोले गए थे। अगले दिन निर्धारित समय पर सभी क्रय केंद्र खोले जाएंगे। किसानों की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित कराया जाएगा। -ज्ञानचंद गुप्ता, एडीएम।
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रविवार को भी पूरे दिन धूप नहीं निकली। तापमान में गिरावट आई। अधिकतम तापमान 24 और न्यूनतम 21 डिग्री सेल्सियस पर टिका रहा। पूरे दिन ठंड का एहसास होता रहा। धान की फसल तैयार होने के कगार पर थी। किसान इसके सूखने का इंतजार कर रहे थे, तभी बारिश हो गई। फसल भींगकर खेतों में गिर गई है। किसानों का कहना है कि यदि तल्ख धूप नहीं निकली तो धान की फसल सड़ने लगेगी। कुछ किसान फसल बचाने के लिए बालियों की कटाई भी शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि यदि धान की बालियों को पानी से अलग कर लिया जाएगा तो इसके दानों के काले पड़ने की संभावना कम रहेगी। जबकि कुछ किसानों का कहना है कि यदि दो-तीन दिन मौसम में और नमी बरकरार रही तो धान की फसल को बर्बाद होने से बचाया नहीं जा सकता है।
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पहले दिन बंद रहे क्रय केंद्र, नहीं हुई धान खरीद
बस्ती। एक नवंबर से धान खरीद अभियान शुरू होने वाला था। मगर इस दिन रविवार होने के नाते जिले के सभी क्रय केंद्र बंद रह गए। जिससे खरीद का शुभारंभ पहले दिन नहीं हो सका। कुछ अगेती खेती करने वाले किसान सरकारी व्यवस्था से नाराज भी है। ओड़वारा के प्रदीप कुमार बताते हैं कि उनके नजदीकी केंद्रों पर धान खरीद से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। क्रय केंद्र प्रभारी से लेकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी तक का फोन नहीं उठता है। पूरा अभियान सिर्फ कागज में चलाया जा रहा है। जबकि सॉऊघाट के किसान राम प्रकाश बताते हैं कि शुरुआत में जानबूझकर क्रय केंद्रों पर खरीद नहीं की जाती है। यह समय बिचौलियों का होता है। वह सीधे किसान के संपर्क में होते हैं। औने-पौने में उपज खरीद कर डंप कर लेते हैं। इसके बाद अंतिम दौर में अचानक विभाग के खरीद का ग्राफ बढ़ने लगता है। जबकि आम किसान उपज से खाली हो जाते हैं। बिचौलियों के जरिये नियमों का कोरम पूरा करने के साथ यह खेल प्रत्येक अभियान में चलता है। इसीलिए मामला पकड़ में नहीं आता है।
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धान के साथ गन्ने की उपज को लेकर भी किसान चिंतित
बहादुरपुर। अर्णब तूफान के चलते धान की फसल डूबकर बर्बाद हो रही है। वहीं कुछ जगहों पर गन्ने की फसल भी बारिश की वजह से प्रभावित हुई है। किसानों के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही है। फसल बर्बाद होने के कारण किसानों के सामने आने वाले समय में आर्थिक संकट खड़ा होने की संभावना है। किसानों का कहना है कि धान और गन्ने की फसल से होने वाली आय इस बार प्रभावित होगी। क्षेत्र के किसान रमेश चौधरी, बाबूराम चौबे, राजमणि, शत्रुघ्न पांडेय धनंजय, दिनेश, रामगोपाल, राजबली, घनश्याम, शिवदास चौधरी, राम देव आदि ने बताया की कुछ जगहों पर धान की फसल कट चुकी थी। लेकिन, वह दवाई से पहले वह पानी में डूब गई है। उसके सड़ने की संभावना बढ़ गई है। जहां धान की फसल नहीं कटी है वह गिरकर पानी में डूब गई है। खेतों में पानी लगने से फसल को नुकसान हो रहा है। इससे उपज की गुणवत्ता खराब हो जाएगी। वहीं निचले सतह वाले गन्ने के खेत में पानी लगा हुआ है। जिससे गन्ने की गुणवत्ता खराब होने की संभावना बढ़ गई है।
रबी फसलों की बोआई भी होगी प्रभावित
परशुरामपुर। दो दिनों की बारिश से धान और गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचने के साथ रबी फसलों की बोआई भी प्रभावित हो गई है। किसानों का कहना है कि खेतों में पानी लगने से आलू, चना, मटर, की खेती पर संकट आ गया है। इन फसलों की बोआई के लिए समयानुसार खेत तैयार नहीं हो पा रहे हैं। खेतों में अभी जरूरत से ज्यादा नमी है। क्षेत्र के जानकी प्रसाद, वीरेंद्र कुमार, आशाराम, सोमई, रामसजीवन, श्याम सुन्दर, दयाराम सहित तमाम किसानों ने बताया कि जलमग्न धान की फसलों को किसी तरह अगर काट भी लिया जाए तब भी खेत की जोताई नहीं की जा सकती है। निचली सतह वाले खेत में जलभराव के कारण गेहूं की बोआई भी इस बार विलंब से हो सकती है।
धान खरीद अभियान का शुभारंभ दो नवंबर से होगा। आज रविवार सार्वजनिक अवकाश होने के नाते क्रय केंद्र नहीं खोले गए थे। अगले दिन निर्धारित समय पर सभी क्रय केंद्र खोले जाएंगे। किसानों की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित कराया जाएगा। -ज्ञानचंद गुप्ता, एडीएम।

बहादुरपुर में गिरी धान की फसल संवाद- फोटो : credit