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MP News: केन-बेतवा परियोजना के विरोध पर पीएमओ ने मांगी रिपोर्ट, विस्थापितों का आंदोलन तेज
Fri, 17 Jul 2026 09:58 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 17 Jul 2026 09:58 PM IST
सार
केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मध्य प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है। वही, जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार का कहना कि मुख्य परियोजना नहीं, बल्कि रनझ और मझगवां क्षेत्र के विस्थापितों का विरोध ज्यादा है और इसी संबंध में केंद्र को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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केन बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कर रहे लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मध्य प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की है। सरकार का कहना है कि मुख्य परियोजना की तुलना में रनझ और मझगवां क्षेत्र के विस्थापितों का विरोध अधिक है, जिसकी जानकारी केंद्र को भेजी जाएगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन पर अब केंद्र सरकार ने भी ध्यान दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मध्य प्रदेश सरकार से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद जल संसाधन विभाग रिपोर्ट तैयार करने में जुट गया है।
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जानकारी के अनुसार, रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना का व्यापक स्तर पर विरोध नहीं हो रहा है। सरकार का पक्ष है कि आंदोलन मुख्य रूप से रनझ और मझगवां क्षेत्र के उन परिवारों का है, जो विभिन्न परियोजनाओं के कारण प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट में यह भी शामिल किया जाएगा कि प्रभावित परिवारों को पुनर्वास और मुआवजे के तहत प्रति व्यक्ति 12.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रभावित लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
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दूसरी ओर, परियोजना से प्रभावित लोगों का आंदोलन लगातार जारी है। विस्थापित परिवारों का आमरण अनशन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पुनर्वास और मुआवजा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि मझगवां, रनझ, नैगुवां सहित अन्य क्षेत्रों के प्रभावित लोग भी आंदोलन में शामिल हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओ के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में प्रभावित परिवार सरकार से अपनी मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपील कर रहे हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना में केंद्र सरकार अधिकांश वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है, जबकि भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर है। ऐसे में आंदोलन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य दोनों की नजर बनी हुई है।
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जानकारी के अनुसार, रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना का व्यापक स्तर पर विरोध नहीं हो रहा है। सरकार का पक्ष है कि आंदोलन मुख्य रूप से रनझ और मझगवां क्षेत्र के उन परिवारों का है, जो विभिन्न परियोजनाओं के कारण प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट में यह भी शामिल किया जाएगा कि प्रभावित परिवारों को पुनर्वास और मुआवजे के तहत प्रति व्यक्ति 12.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रभावित लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
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दूसरी ओर, परियोजना से प्रभावित लोगों का आंदोलन लगातार जारी है। विस्थापित परिवारों का आमरण अनशन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पुनर्वास और मुआवजा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि मझगवां, रनझ, नैगुवां सहित अन्य क्षेत्रों के प्रभावित लोग भी आंदोलन में शामिल हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओ के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में प्रभावित परिवार सरकार से अपनी मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपील कर रहे हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना में केंद्र सरकार अधिकांश वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है, जबकि भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर है। ऐसे में आंदोलन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य दोनों की नजर बनी हुई है।
