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ऑपरेशन ट्राइडेंट: ₹10 के नोट से होती थी 'हवाला पेमेंट', भारतीय रुपये को म्यांमार में बदलते थे नशे के सौदागर
Sat, 31 Oct 2026 05:54 PM IST
पवन पांडेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 31 Oct 2026 05:54 PM IST
सार
ईडी ने मिजोरम और मणिपुर में 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' के तहत नार्को-हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश कर चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में 10 रुपये के हस्ताक्षरित नोटों से हवाला भुगतान की पहचान, म्यांमार की मुद्रा में करोड़ों का लेनदेन और 175 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बैंकिंग सिस्टम में डालने का खुलासा हुआ। 991 बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं।
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ऑपरेशन ट्राइडेंट: ₹10 के नोट से होती थी 'हवाला पेमेंट'
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
मिजोरम और मणिपुर में पिछले दिनों सीमा पार नार्को-हवाला नेटवर्क के खिलाफ कई एजेंसियों द्वारा की गई संयुक्त छापेमारी में ईडी द्वारा अब एक साथ कई खुलासे किए गए हैं। उक्त कार्रवाई को 'ऑपरेशन 'ट्राइडेंट का नाम दिया गया था। 10 रुपये के टोकन नोट से 'हवाला पेमेंट' लेने वालों की पहचान होती थी। नशे के सौदागर, भारतीय करेंसी को म्यांमार की मुद्रा 'क्यात' में बदलते थे। ईडी द्वारा जब्त किए गए रिकॉर्ड की जांच पड़ताल से पता चला है कि म्यांमार के मोबाइल वॉलेट 'के-पे' के जरिए किए गए ट्रांजैक्शन और अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच अमेरिकी डॉलर (4,150 क्यात प्रति डॉलर के रेट से कुल 10,816 USD) को बदलने का ब्यौरा भी मिला है।
आइजोल सेंट्रल जेल में बंद थे चारों आरोपी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही, मणिपुर के चुराचांदपुर में जब्त किए गए दस्तावेजों से अंतरराष्ट्रीय हवाला से जुड़ी कई जानकारियां मिली हैं। ईडी के आइजोल सब-जोनल ऑफिस ने पीएमएलए 2002 की धारा 19 के तहत जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें चम्फाई के लालराममुआना, म्यांमार के बुल्फेक गांव के थांगसिनतुआंग (उर्फ चिंतुआंग/उर्फ त्लुआंगा), असम के श्रीभूमि के जबरुल हक (जबरुल हक मामला) और असम के करीमगंज के अबू सालेह मोहम्मद सैफ उद्दीन (कृषिव एंटरप्राइज मामला) शामिल हैं। ये चारों पहले से ही एनसीबी के नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में आइजोल सेंट्रल जेल में बंद थे। कोर्ट ने चारों आरोपियों से पूछताछ के लिए 48 घंटे की ईडी कस्टडी मंजूर की है।
49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन की खेप
चिंतुआंग म्यांमार स्थित वह सप्लायर है, जिसने 21.08.2025 को जब्त की गई 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन (नशीला पदार्थ) की खेप भेजी थी। लालराममुआना इसका मुख्य हैंडलर था, जबरुल हक इसे डमछेरा-कान्हमुन सीमा पर प्राप्त करने वाला था। करीमगंज का अबू सालेह वह ऑपरेटर था जिसके खाते में 11.44 करोड़ रुपये आए (जिसमें 6.67 करोड़ रुपये नकद थे)। इसी खाते से चम्फाई के हवाला खातों में पैसे भेजे जाते थे। इन गिरफ्तारियों के साथ, इन तीन मामलों में अब तक कुल दस लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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हवाला कारोबार का हाथ से लिखा हिसाब-किताब
23 अक्तूबर को चुराचांदपुर के न्यू लमका में जेंगैहनिआंग @ तानिआंग के घर की तलाशी के दौरान, उनके हवाला कारोबार का हाथ से लिखा हिसाब-किताब रखने वाली कैश बुक, रजिस्टर और नोटबुक बरामद की गईं हैं। इन रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि यहां नियमित रूप से करेंसी एक्सचेंज और हवाला का काम होता था। इसमें भारत के अलग-अलग हिस्सों से लोगों से नकद या बैंक खातों के जरिए भारतीय रुपये लिए जाते थे, फिर उन्हें म्यांमार क्यात में बदला जाता था। इसका रेट लगभग 42 से 48 क्यात प्रति रुपया होता था)। अंत में म्यांमार में मौजूद लोगों को भुगतान कर दिया जाता था।
43 करोड़ क्यात से भी ज्यादा है कुल रकम
एक दिन में एक-एक एंट्री 54.47 लाख रुपये (लगभग 26 करोड़ क्यात) तक की है। कुल रकम 43 करोड़ क्यात से भी ज्यादा है। अप्रैल 2025 के एक हफ्ते के भीतर ही एक हैंडलर को 1.14 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। इसके अलावा, रिकॉर्ड्स में म्यांमार के मोबाइल वॉलेट 'के-पे' के ज़रिए किए गए ट्रांजैक्शन और अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच अमेरिकी डॉलर (4,150 क्यात प्रति डॉलर के रेट से कुल 10,816 USD) को बदलने का ब्यौरा भी मिला है। इसके साथ ही, 10 रुपये के सात ऐसे नोट भी जब्त किए गए हैं, जिन पर हस्ताक्षर थे। माना जा रहा है कि हवाला पेमेंट पाने वालों की पहचान करने के लिए इनका इस्तेमाल 'टोकन' के तौर पर किया जाता था। साथ ही, ज़ेंगैहनिआंग @ तानिआंग के नाम पर 60 लाख रुपये में खरीदी गई एक अचल संपत्ति के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, चुराचांदपुर नेटवर्क से जुड़े 991 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है।
जांच में खुलासा, 'ड्रग्स के बदले सामान'
ड्रग्स के बदले सामान - 'मेसर्स गो अल्फा ट्रिप' के लेजर से पता चलता है कि यह एक मिनी-एटीएम काउंटर की तरह काम करता था। इसके जरिए तानिआंग ने बैंकिंग सिस्टम में 175 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम डाली। मिज़ोरम से जुड़े मामले के बयानों से भी यह साफ होता है कि ड्रग्स से कमाए गए पैसों को आम सामान में भी बदला जाता था। काउंटर और मिजोरम के 'म्यूल' (मध्यस्थ) खातों के जरिए सप्लायरों को भुगतान किया गया। इनमें पश्चिम बंगाल की एक आटा मिल, असम का खाद्य तेल व्यापारी, मिजोरम के फिलिंग स्टेशन (लगभग 2.61 करोड़ रुपये), दिल्ली के किराना और दवा थोक व्यापारी, तथा जूते-कपड़े के व्यापारी शामिल थे।
सीमावर्ती कस्बों की तीसरी पार्टियों के नाम पर बिल
वहीं, इनवॉइस आइजोल और चम्फाई, जोरिनपुई और त्लाबुंग जैसे सीमावर्ती कस्बों की तीसरी पार्टियों के नाम पर बनाए गए हैं। यहां से माल म्यांमार भेज दिया गया। इस तरह, सीमा पार के ड्रग सप्लायरों को भुगतान 'सामान के रूप में' किया जाता है। भारत में यह भुगतान एक जीएसटी इनवॉइस की आड़ में होता है। सीमा पार होने वाले इस लेन-देन का कोई वित्तीय सुराग नहीं बचता। 23 अक्तूबर को चुराचांदपुर में जब्त की गई कैश बुक की प्रविष्टियां और हस्ताक्षरित करेंसी नोट की जांच की जा रही है। जब्त किए गए आपत्तिजनक रिकॉर्ड में कई लोगों के नाम शामिल हैं। भारत और म्यांमार में सक्रिय सीमा-पार के लोगों की पहचान करने, सीमावर्ती कस्बों में सामान पाने वालों का पता लगाने और उन्हीं अवैध लेनदेन के माध्यमों से भुगतान पाने वाले आपूर्तिकर्ताओं का पर्दाफाश करने के लिए ईडी द्वारा इस केस की गहन जांच की जा रही है।
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आइजोल सेंट्रल जेल में बंद थे चारों आरोपी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही, मणिपुर के चुराचांदपुर में जब्त किए गए दस्तावेजों से अंतरराष्ट्रीय हवाला से जुड़ी कई जानकारियां मिली हैं। ईडी के आइजोल सब-जोनल ऑफिस ने पीएमएलए 2002 की धारा 19 के तहत जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें चम्फाई के लालराममुआना, म्यांमार के बुल्फेक गांव के थांगसिनतुआंग (उर्फ चिंतुआंग/उर्फ त्लुआंगा), असम के श्रीभूमि के जबरुल हक (जबरुल हक मामला) और असम के करीमगंज के अबू सालेह मोहम्मद सैफ उद्दीन (कृषिव एंटरप्राइज मामला) शामिल हैं। ये चारों पहले से ही एनसीबी के नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में आइजोल सेंट्रल जेल में बंद थे। कोर्ट ने चारों आरोपियों से पूछताछ के लिए 48 घंटे की ईडी कस्टडी मंजूर की है।
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49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन की खेप
चिंतुआंग म्यांमार स्थित वह सप्लायर है, जिसने 21.08.2025 को जब्त की गई 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन (नशीला पदार्थ) की खेप भेजी थी। लालराममुआना इसका मुख्य हैंडलर था, जबरुल हक इसे डमछेरा-कान्हमुन सीमा पर प्राप्त करने वाला था। करीमगंज का अबू सालेह वह ऑपरेटर था जिसके खाते में 11.44 करोड़ रुपये आए (जिसमें 6.67 करोड़ रुपये नकद थे)। इसी खाते से चम्फाई के हवाला खातों में पैसे भेजे जाते थे। इन गिरफ्तारियों के साथ, इन तीन मामलों में अब तक कुल दस लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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हवाला कारोबार का हाथ से लिखा हिसाब-किताब
23 अक्तूबर को चुराचांदपुर के न्यू लमका में जेंगैहनिआंग @ तानिआंग के घर की तलाशी के दौरान, उनके हवाला कारोबार का हाथ से लिखा हिसाब-किताब रखने वाली कैश बुक, रजिस्टर और नोटबुक बरामद की गईं हैं। इन रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि यहां नियमित रूप से करेंसी एक्सचेंज और हवाला का काम होता था। इसमें भारत के अलग-अलग हिस्सों से लोगों से नकद या बैंक खातों के जरिए भारतीय रुपये लिए जाते थे, फिर उन्हें म्यांमार क्यात में बदला जाता था। इसका रेट लगभग 42 से 48 क्यात प्रति रुपया होता था)। अंत में म्यांमार में मौजूद लोगों को भुगतान कर दिया जाता था।
43 करोड़ क्यात से भी ज्यादा है कुल रकम
एक दिन में एक-एक एंट्री 54.47 लाख रुपये (लगभग 26 करोड़ क्यात) तक की है। कुल रकम 43 करोड़ क्यात से भी ज्यादा है। अप्रैल 2025 के एक हफ्ते के भीतर ही एक हैंडलर को 1.14 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। इसके अलावा, रिकॉर्ड्स में म्यांमार के मोबाइल वॉलेट 'के-पे' के ज़रिए किए गए ट्रांजैक्शन और अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच अमेरिकी डॉलर (4,150 क्यात प्रति डॉलर के रेट से कुल 10,816 USD) को बदलने का ब्यौरा भी मिला है। इसके साथ ही, 10 रुपये के सात ऐसे नोट भी जब्त किए गए हैं, जिन पर हस्ताक्षर थे। माना जा रहा है कि हवाला पेमेंट पाने वालों की पहचान करने के लिए इनका इस्तेमाल 'टोकन' के तौर पर किया जाता था। साथ ही, ज़ेंगैहनिआंग @ तानिआंग के नाम पर 60 लाख रुपये में खरीदी गई एक अचल संपत्ति के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, चुराचांदपुर नेटवर्क से जुड़े 991 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है।
जांच में खुलासा, 'ड्रग्स के बदले सामान'
ड्रग्स के बदले सामान - 'मेसर्स गो अल्फा ट्रिप' के लेजर से पता चलता है कि यह एक मिनी-एटीएम काउंटर की तरह काम करता था। इसके जरिए तानिआंग ने बैंकिंग सिस्टम में 175 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम डाली। मिज़ोरम से जुड़े मामले के बयानों से भी यह साफ होता है कि ड्रग्स से कमाए गए पैसों को आम सामान में भी बदला जाता था। काउंटर और मिजोरम के 'म्यूल' (मध्यस्थ) खातों के जरिए सप्लायरों को भुगतान किया गया। इनमें पश्चिम बंगाल की एक आटा मिल, असम का खाद्य तेल व्यापारी, मिजोरम के फिलिंग स्टेशन (लगभग 2.61 करोड़ रुपये), दिल्ली के किराना और दवा थोक व्यापारी, तथा जूते-कपड़े के व्यापारी शामिल थे।
सीमावर्ती कस्बों की तीसरी पार्टियों के नाम पर बिल
वहीं, इनवॉइस आइजोल और चम्फाई, जोरिनपुई और त्लाबुंग जैसे सीमावर्ती कस्बों की तीसरी पार्टियों के नाम पर बनाए गए हैं। यहां से माल म्यांमार भेज दिया गया। इस तरह, सीमा पार के ड्रग सप्लायरों को भुगतान 'सामान के रूप में' किया जाता है। भारत में यह भुगतान एक जीएसटी इनवॉइस की आड़ में होता है। सीमा पार होने वाले इस लेन-देन का कोई वित्तीय सुराग नहीं बचता। 23 अक्तूबर को चुराचांदपुर में जब्त की गई कैश बुक की प्रविष्टियां और हस्ताक्षरित करेंसी नोट की जांच की जा रही है। जब्त किए गए आपत्तिजनक रिकॉर्ड में कई लोगों के नाम शामिल हैं। भारत और म्यांमार में सक्रिय सीमा-पार के लोगों की पहचान करने, सीमावर्ती कस्बों में सामान पाने वालों का पता लगाने और उन्हीं अवैध लेनदेन के माध्यमों से भुगतान पाने वाले आपूर्तिकर्ताओं का पर्दाफाश करने के लिए ईडी द्वारा इस केस की गहन जांच की जा रही है।