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खबरों के खिलाड़ी: विपक्ष की रैली से कितनी बदलेगी सियासत? विश्लेषकों ने बताया चुनाव में इसका होगा कितना असर
Sat, 31 Oct 2026 09:11 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 31 Oct 2026 09:11 PM IST
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खबरों के खिलाड़ी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विपक्ष का चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। अब इसके अगले पड़ाव में एक नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्ष इसी मुद्दे पर रैली करने जा रहा है। विपक्ष के आंदोलन के जवाब में अब सत्ता पक्ष में देशभर में अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ आंदोलन शुरू करने जा रहा है। आंदोलनों की इन्हीं सुर्खियों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
अनुराग वर्मा: रैली, प्रदर्शन करना सब बहुत अच्छा है, लेकिन जब चुनाव आएगा तब आप अगर मिलकर लड़ेंगे तभी कोई फायदा है। आंदोलन, प्रदर्शन से एक माहौल बन सकता है। फिलहाल ये मुझे चुनाव में ट्रांसफॉर्म होता नहीं दिख रहा है। अगर इसका चुनाव में असर देखना है तो पहले देश की नब्ज को समझना पड़ेगा। सिर्फ कुछ दिनों के लिए आंदोलन करने से चुनाव नहीं जीता जा सकता है।
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अनुराग वर्मा: रैली, प्रदर्शन करना सब बहुत अच्छा है, लेकिन जब चुनाव आएगा तब आप अगर मिलकर लड़ेंगे तभी कोई फायदा है। आंदोलन, प्रदर्शन से एक माहौल बन सकता है। फिलहाल ये मुझे चुनाव में ट्रांसफॉर्म होता नहीं दिख रहा है। अगर इसका चुनाव में असर देखना है तो पहले देश की नब्ज को समझना पड़ेगा। सिर्फ कुछ दिनों के लिए आंदोलन करने से चुनाव नहीं जीता जा सकता है।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: इस रैली का संदेश साफ है। पहला कि सीईसी के खिलाफ उनकी जो शिकायतें हैं उन्हें जनता तक ले जाना। चुनाव हो न हो विपक्ष को सड़कों पर आना ही चाहिए। अभी जो हो रहा है वो कोई नई चीज नहीं है। जिसको अपनी बात कहनी है, जो पार्टी विपक्ष में उसका फर्ज बनता है कि वो सड़कों पर आए। लोगों तक अपनी बात पहुंचाएं। चुनाव के नतीजे होना अलग बात है।
राकेश शुक्ल: मुझे तो लगता है कि लोकतंत्र खुद ही हतप्रभ होगा। क्योंकि एक तरफ रैली हो रही है लोकतंत्र बचाओ। दूसरी तरफ प्रदर्शन हो रहे हैं कि अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ। आप को एक संवैधानिक संस्था से शिकायत है। आप अन्य संवैधानिक संस्थाओं के पास शिकायत लेकर गए हैं। इस रैली की सफलता को लेकर सारे फैसले प्रियंका गांधी कर रही हैं। इस पूरी रैली में सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के साथ है। क्योंकि वो नहीं चाहती कि रैली कहीं से भी कमजोर दिखाई दे।
राकेश शुक्ल: मुझे तो लगता है कि लोकतंत्र खुद ही हतप्रभ होगा। क्योंकि एक तरफ रैली हो रही है लोकतंत्र बचाओ। दूसरी तरफ प्रदर्शन हो रहे हैं कि अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ। आप को एक संवैधानिक संस्था से शिकायत है। आप अन्य संवैधानिक संस्थाओं के पास शिकायत लेकर गए हैं। इस रैली की सफलता को लेकर सारे फैसले प्रियंका गांधी कर रही हैं। इस पूरी रैली में सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के साथ है। क्योंकि वो नहीं चाहती कि रैली कहीं से भी कमजोर दिखाई दे।