जन महाभियोग कार्यक्रम: खरगे के आवास पर बनी मॉक संसद, मीरा कुमार बनीं स्पीकर, जानिए किस तरह सदन जैसा था नजारा
दिल्ली में इंडिया ब्लॉक गठबंधन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक जन महाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान खरगे के आवास पर मॉक संसद जैसा नजारा देखने को मिला। लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने स्पीकर की भूमिका निभाते हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता की। खरगे ने विपक्ष के आरोपों को रखते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। आखिर खरगे के आवास पर संसद जैसी व्यवस्था क्यों बनाई गई और विपक्ष ने इस प्रतीकात्मक महाभियोग के जरिए क्या संदेश देने की कोशिश की? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
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खरगे के आवास के अंदर नजारा संसद जैसा ही था। इसके टेलीकास्ट की व्यवस्था भी संसद की तरह की गई थी। पहली पंक्ति में एक तरफ सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे नजर आए। दूसरी तरफ पहली ही पंक्ति में ही सपा के धर्मेंद्र यादव और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती बैठी थीं। मुफ्ती के पास तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी और तेजस्वी यादव मौजूद थे। प्रियंका गांधी दूसरी पंक्ति में कपिल सिब्बल के साथ मौजूद थीं। मॉक पीठासीन अधिकारी मीरा कुमार को ही बनाया गया, जो लोकसभा स्पीकर रह चुकी हैं। उन्होंने ही अध्यक्षता की। बिल्कुल संसद की तरह ही कार्यवाही शुरू की गई। खरगे के संबोधन से कार्यवाही शुरू की गई।
इस संसद में उनका व्यक्तव भी लिया गया, जिनका वोटर लिस्ट से नाम काट दिया गया। मॉक संसद की अध्यक्ष बनी मीरा कुमारी ने उन लोगों को भी बोलने का मौका दिया। सुशी अनीता जायसवाल को भी मौका मिला। उन्होंने कहा कि कोलकाता से दिल्ली रहने आई। 2012 में उनका दिल्ली में पहचान पत्र बना। इसके बाद से वो लगातार वोट डाल रही है। उन्होंने कहा कि वो सिंगल मॉम हैं। सरकार पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार प्रूफ करे कि मैं किस देश की नागरिक हूं। इनको किसने अधिकार दिया कि ये पहचान पत्र मानने से इनकार करें। इसके बाद इनको किसने अधिकार दिया कि ये पहचान पत्र मानने से इनकार करें। बंगाल के इफ्तिखार अहमद ने भी अपनी बात रखी। उनका आरोप है कि उनका भी वोट काट दिया गया है।
खरगे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर क्या सवाल उठाए?
इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सीधे निर्देशों पर आयोग चला रहे हैं। खरगे ने कहा कि देश में अब लोगों के वोट देने के अधिकार पर खतरा पैदा हो रहा है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को निष्पक्ष रहकर काम करना चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात में उसकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। इस कार्यक्रम में लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस नेता मीरा कुमार भी मौजूद रहीं। उन्होंने बताया कि इंडिया ब्लॉक ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है।
विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए?
खरगे ने कहा कि सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव दिया था, लेकिन उनके नोटिस खारिज कर दिए गए और उन पर कोई विचार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि आज का यह कार्यक्रम किसी व्यक्ति के खिलाफ निजी लड़ाई नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक संस्था की गरिमा बचाने की कोशिश है। खरगे के मुताबिक, विपक्ष चाहता है कि चुनाव आयोग संविधान की भावना के अनुरूप निष्पक्ष तरीके से काम करे और आम नागरिकों का उस पर भरोसा बना रहे। उन्होंने चिंता जताई कि कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के नाम कंप्यूटर के जरिये मतदाता सूची से चुपचाप हटाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक का वोट देने का अधिकार खत्म नहीं होना चाहिए।
मीरा कुमार ने महाभियोग प्रस्ताव को लेकर क्या बताया?
लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि इंडिया ब्लॉक की बैठक बुलाकर ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने का फैसला किया गया है। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से पेश किया जाएगा। इसके बाद खरगे इस मामले पर बयान भी देंगे। मीरा कुमार ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और एशिया, अफ्रीका तथा दक्षिण अमेरिका के कई देश भारतीय लोकतंत्र के मॉडल को देखते हैं। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था चुनावों की ताकत पर टिकी है और इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मतदाता है। अगर किसी एक मतदाता को भी वोट डालने से रोका जाता है तो यह लोकतंत्र की मूल भावना पर चोट है। उनके मुताबिक, किसी नागरिक को मतदान से वंचित करना लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाता है।
खरगे ने 2023 के कानून पर क्यों उठाए सवाल?
खरगे ने आरोप लगाया कि 2014 से सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए गए। उन्होंने कहा कि सांसदों की खरीद-फरोख्त, राजनीतिक दलों को तोड़ने और सरकारें गिराने के बाद अब वोटों की चोरी की जा रही है। उन्होंने चुनावी बॉन्ड, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का भी जिक्र किया। खरगे ने दावा किया कि वोटों की चोरी के सैकड़ों उदाहरण मौजूद हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से जुड़े 2023 के कानून को भी जिम्मेदार ठहराया। उनके अनुसार, यह कानून दिसंबर 2023 में विपक्ष के 145 सांसदों को निलंबित किए जाने के बाद पारित किया गया था। खरगे ने आरोप लगाया कि इस कानून से चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा कवच मिल गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी इस स्तर का सुरक्षा कवच नहीं दिया गया है।
विपक्ष ने कौन से छह आरोप गिनाए?
- वोट चुराने की साजिश... विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनावों में हेरफेर करने की साजिश रची गई।
- 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए... आरोप है कि मतदाता सूची से 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।
- संसद के बिना फॉर्म-6 में बदलाव... विपक्ष का आरोप है कि संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 के नियमों में बदलाव किया गया।
- ईसीआईनेट के जरिये मतदाता सूची पर नियंत्रण.. आरोप लगाया गया कि ईसीआईनेट के माध्यम से मतदाता सूचियों पर नियंत्रण किया गया।
- दो अन्य चुनाव आयुक्तों को दरकिनार किया... आरोप है कि आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों की भूमिका को सीमित किया गया।
- मोदी और शाह के इशारे पर काम... विपक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर काम किया।
खरगे ने अपना भाषण खत्म करने के बाद पर्याप्त समय देने के लिए मीरा कुमार का शुक्रिया अदा किया। ठीक उसी तरह जैसे संसद के अंदर होता है। इसके बाद समाजवादी पार्टी से हरेंद्र सिंह मलिक और अन्य विपक्षी नेता अपनी बात रख रहे हैं।