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अमेरिका ने ईरान के खिलाफ खोला नया मोर्चा: 20 अधिकारियों की टीम करेगी निगरानी; क्या है आयरन गेट प्लान?
Sat, 07 Nov 2026 08:55 PM IST
निर्मल कांत
एएनआई, फ्लोरिडा (अमेरिका)।
एएनआई, फ्लोरिडा (अमेरिका)।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 07 Nov 2026 08:55 PM IST
सार
अमेरिका ने ईरान के हथियारों और सैन्य सामान की आपूर्ति रोकने के लिए 'आयरन गेट' टास्क फोर्स बनाई है। समुद्र के बाद अब जमीन और कैस्पियन सागर के रास्तों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। दूसरी ओर, ईरान ने हथियार बनाने और निर्यात करने में आत्मनिर्भर होने का दावा किया है, क्या दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ेगा? पढ़िए रिपोर्ट
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
अमेरिका ने ईरान के सैन्य सामान की आपूर्ति रोकने के लिए एक नई टास्क फोर्स बनाने का एलान किया है। इसका नाम 'टास्क फोर्स आयरन गेट' रखा गया है।
अमेरिका का आरोप है कि ईरान जमीनी रास्तों का इस्तेमाल करके आधुनिक हथियार, दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक और प्रतिबंधित सामान दूसरे देशों तक पहुंचा रहा है। इसी पर रोक लगाने के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने यह जानकारी दी।
सेंटकॉम ने बताया कि यह टास्क फोर्स शनिवार को बनाई गई। इसका गठन सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के निर्देश पर हुआ। इस टीम में करीब 20 नागरिक और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसका मुख्यालय फ्लोरिडा के टाम्पा में होगा।
'आयरन गेट' टास्क फोर्स क्या काम करेगी?
सेंटकॉम के मुताबिक, नई टास्क फोर्स अमेरिकी सरकार की दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगी। इसका मकसद ईरान की जमीन से लगी सीमाओं और कैस्पियन सागर के रास्ते होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकना है।
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टीम आधुनिक हथियार प्रणालियों, दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक और प्रतिबंधित सामान की आवाजाही पर नजर रखेगी। इसके अलावा, अवैध तरीके से होने वाली कमाई के प्रवाह को भी रोकने की कोशिश करेगी।
सेंटकॉम के बयान के मुताबिक, एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि टास्क फोर्स आयरन गेट की स्थापना समुद्र में ईरान के खिलाफ हमारी मजबूत नाकेबंदी की सफलता को और मजबूत करती है।
उन्होंने आगे कहा, अमेरिकी सरकार की दूसरी एजेंसियों के साथ सेंटकॉम का सहयोग बढ़ाने से ईरान की आतंकवाद को आर्थिक मदद देने, हथियारों की फैक्ट्रियों को दोबारा बनाने और अपनी सेना के हथियारों का भंडार फिर से भरने की क्षमता पर और रोक लगेगी।
ईरान को कितना नुकसान?
सेंटकॉम ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण ईरान हाल के महीनों में 25 अरब डॉलर से ज्यादा का कच्चा तेल निर्यात नहीं कर पाया है। उसने कहा कि समुद्र में इस नाकेबंदी को सख्ती से लागू किया जा रहा है। ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी जहाजों पर नजर रखी जा रही है।
ईरान के खिलाफ अमेरिका के कौन से दो कदम?
अमेरिका की घोषणा में ईरान के व्यापार और आपूर्ति नेटवर्क को निशाना बनाने वाले दो अलग-अलग कदमों की जानकारी दी गई है।
सेंटकॉम के मुताबिक, समुद्री नाकेबंदी का मकसद ईरान से होने वाले आयात और निर्यात को रोकना है। हालांकि, मानवीय सहायता को इससे छूट दी गई है।
वहीं, नई टास्क फोर्स हथियार प्रणालियों, दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक और प्रतिबंधित सामान की अवैध आवाजाही पर नजर रखेगी। वह ऐसी गतिविधियों का पता लगाएगी और उन्हें रोकने की कोशिश करेगी।
ईरान ने हथियार बनाने की क्षमता पर क्या कहा?
अमेरिका के इस एलान के बीच ईरान की इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की एयरोस्पेस फोर्स ने अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को लेकर बयान दिया है। इसमें घरेलू स्तर पर हथियार बनाने, तकनीक विकसित करने और सैन्य जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म करने की बात कही गई है।
ये भी पढ़ें: ईरान का दावा: मार गिराए दुश्मन के 260 विमान, सात ड्रोन सुरक्षित कब्जे में लिए; आईआरजीसी ने क्या कहा?
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज के मुताबिक, आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहेब्बी ने शनिवार को फोर्स के स्थापना सप्ताह के कार्यक्रम के दौरान इसके विकास के तीन प्रमुख आधार बताए।
पहला आधार: अपनी तकनीक और वैज्ञानिक क्षमता विकसित करना
मोहेब्बी ने बताया कि पहला बड़ा आधार एयरोस्पेस क्षेत्र में देश की अपनी वैज्ञानिक क्षमता विकसित करना है। इसके साथ ही दुनिया में उपलब्ध तकनीक और ज्ञान को ईरान में विकसित करना भी इसका हिस्सा है।
दूसरा आधार: देश में ही हथियारों का उत्पादन
आईआरजीसी के प्रवक्ता के मुताबिक, दूसरा आधार तकनीकी विकास को देश के औद्योगिक उत्पादन में बदलना है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रक्षा प्रणालियां बना रहा है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इनकी आपूर्ति कर रहा है।
तीसरा आधार: रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता
मोहेब्बी ने तीसरे आधार के बारे में बताया कि ईरान रक्षा उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना चाहता है। इसके लिए दूसरे देशों के हथियारों और उपकरणों पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, आज एयरोस्पेस फोर्स के हथियार देश के अपने ज्ञान और विशेषज्ञता के आधार पर बनाए जाते हैं। हमें जरूरी हथियारों, उपकरणों और उनके पुर्जों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
अमेरिका और ईरान के दावों में क्या अंतर?
ये घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के अलग-अलग रुख को दिखाते हैं। एक तरफ सेंटकॉम ईरान के सैन्य सामान और तकनीक की आवाजाही रोकने के लिए नए कदम उठा रहा है। वहीं, आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स अपनी घरेलू हथियार उत्पादन क्षमता और रक्षा उपकरणों के निर्यात को अपनी उपलब्धि बता रही है।
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अमेरिका का आरोप है कि ईरान जमीनी रास्तों का इस्तेमाल करके आधुनिक हथियार, दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक और प्रतिबंधित सामान दूसरे देशों तक पहुंचा रहा है। इसी पर रोक लगाने के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने यह जानकारी दी।
सेंटकॉम ने बताया कि यह टास्क फोर्स शनिवार को बनाई गई। इसका गठन सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के निर्देश पर हुआ। इस टीम में करीब 20 नागरिक और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसका मुख्यालय फ्लोरिडा के टाम्पा में होगा।
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'आयरन गेट' टास्क फोर्स क्या काम करेगी?
सेंटकॉम के मुताबिक, नई टास्क फोर्स अमेरिकी सरकार की दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगी। इसका मकसद ईरान की जमीन से लगी सीमाओं और कैस्पियन सागर के रास्ते होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकना है।
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टीम आधुनिक हथियार प्रणालियों, दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक और प्रतिबंधित सामान की आवाजाही पर नजर रखेगी। इसके अलावा, अवैध तरीके से होने वाली कमाई के प्रवाह को भी रोकने की कोशिश करेगी।
सेंटकॉम के बयान के मुताबिक, एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि टास्क फोर्स आयरन गेट की स्थापना समुद्र में ईरान के खिलाफ हमारी मजबूत नाकेबंदी की सफलता को और मजबूत करती है।
उन्होंने आगे कहा, अमेरिकी सरकार की दूसरी एजेंसियों के साथ सेंटकॉम का सहयोग बढ़ाने से ईरान की आतंकवाद को आर्थिक मदद देने, हथियारों की फैक्ट्रियों को दोबारा बनाने और अपनी सेना के हथियारों का भंडार फिर से भरने की क्षमता पर और रोक लगेगी।
ईरान को कितना नुकसान?
सेंटकॉम ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण ईरान हाल के महीनों में 25 अरब डॉलर से ज्यादा का कच्चा तेल निर्यात नहीं कर पाया है। उसने कहा कि समुद्र में इस नाकेबंदी को सख्ती से लागू किया जा रहा है। ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी जहाजों पर नजर रखी जा रही है।
ईरान के खिलाफ अमेरिका के कौन से दो कदम?
अमेरिका की घोषणा में ईरान के व्यापार और आपूर्ति नेटवर्क को निशाना बनाने वाले दो अलग-अलग कदमों की जानकारी दी गई है।
- जमीन और कैस्पियन सागर पर कार्रवाई: नई टास्क फोर्स आयरन गेट ईरान की जमीनी सीमाओं और कैस्पियन सागर के रास्तों पर नजर रखेगी।
- समुद्र में नाकेबंदी: जुलाई में घोषित अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित ईरानी बंदरगाहों पर लागू है।
सेंटकॉम के मुताबिक, समुद्री नाकेबंदी का मकसद ईरान से होने वाले आयात और निर्यात को रोकना है। हालांकि, मानवीय सहायता को इससे छूट दी गई है।
वहीं, नई टास्क फोर्स हथियार प्रणालियों, दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीक और प्रतिबंधित सामान की अवैध आवाजाही पर नजर रखेगी। वह ऐसी गतिविधियों का पता लगाएगी और उन्हें रोकने की कोशिश करेगी।
ईरान ने हथियार बनाने की क्षमता पर क्या कहा?
अमेरिका के इस एलान के बीच ईरान की इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की एयरोस्पेस फोर्स ने अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को लेकर बयान दिया है। इसमें घरेलू स्तर पर हथियार बनाने, तकनीक विकसित करने और सैन्य जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म करने की बात कही गई है।
ये भी पढ़ें: ईरान का दावा: मार गिराए दुश्मन के 260 विमान, सात ड्रोन सुरक्षित कब्जे में लिए; आईआरजीसी ने क्या कहा?
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज के मुताबिक, आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहेब्बी ने शनिवार को फोर्स के स्थापना सप्ताह के कार्यक्रम के दौरान इसके विकास के तीन प्रमुख आधार बताए।
पहला आधार: अपनी तकनीक और वैज्ञानिक क्षमता विकसित करना
मोहेब्बी ने बताया कि पहला बड़ा आधार एयरोस्पेस क्षेत्र में देश की अपनी वैज्ञानिक क्षमता विकसित करना है। इसके साथ ही दुनिया में उपलब्ध तकनीक और ज्ञान को ईरान में विकसित करना भी इसका हिस्सा है।
दूसरा आधार: देश में ही हथियारों का उत्पादन
आईआरजीसी के प्रवक्ता के मुताबिक, दूसरा आधार तकनीकी विकास को देश के औद्योगिक उत्पादन में बदलना है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रक्षा प्रणालियां बना रहा है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इनकी आपूर्ति कर रहा है।
तीसरा आधार: रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता
मोहेब्बी ने तीसरे आधार के बारे में बताया कि ईरान रक्षा उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना चाहता है। इसके लिए दूसरे देशों के हथियारों और उपकरणों पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, आज एयरोस्पेस फोर्स के हथियार देश के अपने ज्ञान और विशेषज्ञता के आधार पर बनाए जाते हैं। हमें जरूरी हथियारों, उपकरणों और उनके पुर्जों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
अमेरिका और ईरान के दावों में क्या अंतर?
ये घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के अलग-अलग रुख को दिखाते हैं। एक तरफ सेंटकॉम ईरान के सैन्य सामान और तकनीक की आवाजाही रोकने के लिए नए कदम उठा रहा है। वहीं, आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स अपनी घरेलू हथियार उत्पादन क्षमता और रक्षा उपकरणों के निर्यात को अपनी उपलब्धि बता रही है।