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'भारत का गुणगान करने वालों को जगह नहीं': बांग्लादेश में टैगोर की पेंटिंग पर पोती गई स्याही, पोस्टर भी लगाए
Sat, 07 Nov 2026 01:26 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, ढाका
पीटीआई, ढाका
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Sat, 07 Nov 2026 01:26 PM IST
सार
बांग्लादेश के खुलना में अज्ञात लोगों ने नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की पेंटिंग पर काली स्याही पोत दी। पेंटिंग के पास भारत विरोधी संदेश वाले पोस्टर भी लगाए गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने इसकी निंदा की है।
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रविंद्रनाथ टैगोर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
बांग्लादेश के खुलना में अज्ञात लोगों ने नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की एक पेंटिंग (म्यूरल) पर काली स्याही डालकर उसे खराब कर दिया है, जिसकी काफी आलोचना हो रही है। यह जानकारी स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार है।
टैगोर के साथ और किस की पेंटिंग थी?
'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के मुताबिक, टैगोर की यह पेंटिंग खुलना रेलवे स्टेशन की बाहरी दीवार पर बनी थी। इसी दीवार पर इस क्षेत्र की कला, साहित्य और संस्कृति में योगदान देने वाली अन्य प्रमुख हस्तियों की तस्वीरें भी बनी हुई थीं। उसी दीवार पर फकीर लालन शाह, चित्रकार एसएम सुल्तान, काजी नजरुल इस्लाम, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और माइकल मधुसूदन दत्त की भी पेंटिंग बनी थीं, लेकिन उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
इस घटना के बारे में कब पता चला?
इस दीवार पर जुलाई के विद्रोह, सुंदरबन, साठ गुंबद वाली मस्जिद (सिक्सटी डोम मॉस्क) और जूट उद्योग को दर्शाने वाली पेंटिंग भी बनी हुई हैं।खुलना सिटी कॉरपोरेशन (KCC) ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के खुलना दौरे से पहले इन कलाकृतियों को बनवाया था। शुक्रवार सुबह स्थानीय लोगों ने देखा कि टैगोर की पेंटिंग को नुकसान पहुंचाया गया है।
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पुलिस ने क्या बताया?
खुलना सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी लोकमान हुसैन ने बताया कि शुक्रवार दोपहर को पुलिस को इस घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। 'द ढाका ट्रिब्यून' के अनुसार, हुसैन ने कहा, 'शुक्रवार को सड़क के उस पार की सभी दुकानें बंद थीं, इसलिए यह पता लगाना मुश्किल है कि किसने और कब इस पेंटिंग को खराब किया।'
पोस्टर में क्या लिखा है?
पेंटिंग के पास दो पोस्टर भी लगाए गए थे, जिनमें से एक पर लिखा था: 'तितुमीर के बंगाल में टैगोर के लिए कोई जगह नहीं है, जो मुसलमानों और पूर्वी बंगाल के विरोधी थे। यहां भारत का महिमामंडन करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।'
केसीसी के प्रशासक ने क्या कहा?
'द ढाका ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, केसीसी के प्रशासक नजरुल इस्लाम मंजू ने इस घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ये तस्वीरें बच्चों और युवाओं में स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने में मदद करेंगी। अखबार ने उनके हवाले से कहा, 'इस तरह पेंटिंग को खराब करके उन्होंने अपनी संकीर्ण सोच और बीमार मानसिकता को उजागर कर दिया है।'
सांस्कृतिक कार्यकर्ता और 'नाट्यलोक' के महासचिव शरीफुल इस्लाम सलीम ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह घटना किसी संगठित समूह की करतूत है। 'द डेली स्टार' के अनुसार, उन्होंने कहा, 'उन्होंने ढाका में भी ऐसी ही हरकतें की हैं। ये घटनाएं जानबूझकर रची जा रही हैं। इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें सजा मिलनी चाहिए। यह मामला रवींद्रनाथ तक ही सीमित नहीं रह सकता। वे अन्य जानी-मानी हस्तियों को भी निशाना बना सकते हैं।'
उन्होंने कहा कि टैगोर के साहित्य और दर्शन ने कई पीढ़ियों को स्वतंत्र सोच, धर्मनिरपेक्षता और मानवीय गरिमा को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, अक्तूबर में ढाका में टैगोर की एक पेंटिंग (म्यूरल) को भी विरूपित कर दिया गया था। पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में चार लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें 'स्टेट डायलॉग फोरम' के सदस्य सचिव अल नूर मोहम्मद अयाश भी शामिल हैं।
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टैगोर के साथ और किस की पेंटिंग थी?
'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के मुताबिक, टैगोर की यह पेंटिंग खुलना रेलवे स्टेशन की बाहरी दीवार पर बनी थी। इसी दीवार पर इस क्षेत्र की कला, साहित्य और संस्कृति में योगदान देने वाली अन्य प्रमुख हस्तियों की तस्वीरें भी बनी हुई थीं। उसी दीवार पर फकीर लालन शाह, चित्रकार एसएम सुल्तान, काजी नजरुल इस्लाम, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और माइकल मधुसूदन दत्त की भी पेंटिंग बनी थीं, लेकिन उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
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इस घटना के बारे में कब पता चला?
इस दीवार पर जुलाई के विद्रोह, सुंदरबन, साठ गुंबद वाली मस्जिद (सिक्सटी डोम मॉस्क) और जूट उद्योग को दर्शाने वाली पेंटिंग भी बनी हुई हैं।खुलना सिटी कॉरपोरेशन (KCC) ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के खुलना दौरे से पहले इन कलाकृतियों को बनवाया था। शुक्रवार सुबह स्थानीय लोगों ने देखा कि टैगोर की पेंटिंग को नुकसान पहुंचाया गया है।
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पुलिस ने क्या बताया?
खुलना सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी लोकमान हुसैन ने बताया कि शुक्रवार दोपहर को पुलिस को इस घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। 'द ढाका ट्रिब्यून' के अनुसार, हुसैन ने कहा, 'शुक्रवार को सड़क के उस पार की सभी दुकानें बंद थीं, इसलिए यह पता लगाना मुश्किल है कि किसने और कब इस पेंटिंग को खराब किया।'
पोस्टर में क्या लिखा है?
पेंटिंग के पास दो पोस्टर भी लगाए गए थे, जिनमें से एक पर लिखा था: 'तितुमीर के बंगाल में टैगोर के लिए कोई जगह नहीं है, जो मुसलमानों और पूर्वी बंगाल के विरोधी थे। यहां भारत का महिमामंडन करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।'
केसीसी के प्रशासक ने क्या कहा?
'द ढाका ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, केसीसी के प्रशासक नजरुल इस्लाम मंजू ने इस घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ये तस्वीरें बच्चों और युवाओं में स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने में मदद करेंगी। अखबार ने उनके हवाले से कहा, 'इस तरह पेंटिंग को खराब करके उन्होंने अपनी संकीर्ण सोच और बीमार मानसिकता को उजागर कर दिया है।'
सांस्कृतिक कार्यकर्ता और 'नाट्यलोक' के महासचिव शरीफुल इस्लाम सलीम ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह घटना किसी संगठित समूह की करतूत है। 'द डेली स्टार' के अनुसार, उन्होंने कहा, 'उन्होंने ढाका में भी ऐसी ही हरकतें की हैं। ये घटनाएं जानबूझकर रची जा रही हैं। इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें सजा मिलनी चाहिए। यह मामला रवींद्रनाथ तक ही सीमित नहीं रह सकता। वे अन्य जानी-मानी हस्तियों को भी निशाना बना सकते हैं।'
उन्होंने कहा कि टैगोर के साहित्य और दर्शन ने कई पीढ़ियों को स्वतंत्र सोच, धर्मनिरपेक्षता और मानवीय गरिमा को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, अक्तूबर में ढाका में टैगोर की एक पेंटिंग (म्यूरल) को भी विरूपित कर दिया गया था। पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में चार लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें 'स्टेट डायलॉग फोरम' के सदस्य सचिव अल नूर मोहम्मद अयाश भी शामिल हैं।