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मोगा के गांव कपूरे में आवारा कुत्तों ने प्रवासी मजदूर पर किया हमला
मोगा के गांव कपूरे में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को एक प्रवासी मजदूर पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। मजदूर के शोर मचाने पर आसपास के खेतों में काम कर रहे अन्य मजदूर लाठियां लेकर मौके पर पहुंचे और कुत्तों को भगाकर उसकी जान बचाई। हमले में मजदूर घायल हो गया। जानकारी के अनुसार, गांव भिड़र में जोधा सिंह और करनैल सिंह के खेतों में काम करने वाला एक प्रवासी मजदूर किसी जरूरी काम से गांव कपूरे आया था। दोपहर करीब 12 बजे 35-40 आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक उस पर हमला कर दिया और उसके शरीर को बुरी तरह नोच डाला। आसपास काम कर रहे मजदूरों ने मौके पर पहुंचकर उसे बचाया।
बताया जा रहा है कि रविवार सुबह करीब 5:30 बजे भी खेतों में काम पर जा रहे एक अन्य मजदूर पर आवारा कुत्तों ने हमला करने की कोशिश की, लेकिन वह भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहा।
28 जून को गांव कपूरे के 45 वर्षीय सरबजीत सिंह की खेतों से घर लौटते समय आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर नोच-नोचकर हत्या कर दी थी। उनकी अंतिम अरदास 6 जुलाई को होनी है। इसके बावजूद गांव में कुत्तों के हमले लगातार जारी हैं।
गांव के निवासी सुखदेव सिंह और गुरबख्श सिंह ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी 8 से 10 बार ऐसे हमले हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में 35 से 40 आवारा कुत्तों का झुंड घूमता रहता है। कई बार प्रशासन को शिकायतें और मांगपत्र दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब लोगों को रात के समय खेतों में जाने से डर लगता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है, ताकि लोग बिना भय के अपने खेतों में आ-जा सकें। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा आवारा पशुओं और कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बावजूद प्रशासन प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है और अब सवाल उठ रहा है कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।
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