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Rampur Bushahar News: फांचा में दखरोड़ मेला शुरू, वाद्य-यंत्रों पर डाली नाटी
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रामपुर के फांचा में आयोजित मेले में ढोल नगाड़ों की थाप पर नाटी डालते लोग। संवाद
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आराध्य देवता साहिब जाख के सानिध्य में हो रहा आयोजन
मंदिर कमेटी और ग्रामीणों ने देवता साहिब और देवलुओं का किया स्वागत
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर/डंसा। उपमंडल रामपुर की दुर्गम ग्राम पंचायत फांचा में देवता साहिब जाख के सानिध्य में दो दिवसीय पारंपरिक एवं ऐतिहासिक दखरोड़ मेले का शुभारंभ हो गया। मेले के पहले दिन ग्रामीणों और देवलुओं ने ढोल-नगाड़ों एवं पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों पर सामूहिक नाटियां प्रस्तुत कर उत्सव का आगाज किया।
फांचा में वर्षों से चली आ रही देव परंपराओं का पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निर्वहन किया जा रहा है। मेले में हजारों श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने भाग लेकर पारंपरिक संस्कृति का आनंद लिया। इस अवसर पर नोग घोड़ी के आराध्य देवता साहिब दमुख डंसा भी विशेष रूप से मेले में पहुंचे। इन दिनों देवता साहिब 15/20 घाटी के चार दिवसीय प्रवास पर हैं।
फांचा पहुंचने पर मंदिर कमेटी और ग्रामीणों ने देवता साहिब तथा उनके साथ आए देवलुओं का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर में शीश नवाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। शुक्रवार को फांचा मंदिर परिसर में आस्था और उत्साह का माहौल देखने को मिला। महिलाओं, ग्रामीणों और देवलुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर वाद्य यंत्रों की धुनों पर देर शाम तक नाटियां प्रस्तुत कीं। देवता साहिब जाख फांचा और देवता साहिब दमुख डंसा की उपस्थिति में मंदिर परिसर लोक संस्कृति और धार्मिक आस्था का केंद्र बना रहा।
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ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे पारंपरिक मेले न केवल देव संस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने आराध्य देवताओं से क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
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मंदिर कमेटी और ग्रामीणों ने देवता साहिब और देवलुओं का किया स्वागत
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर/डंसा। उपमंडल रामपुर की दुर्गम ग्राम पंचायत फांचा में देवता साहिब जाख के सानिध्य में दो दिवसीय पारंपरिक एवं ऐतिहासिक दखरोड़ मेले का शुभारंभ हो गया। मेले के पहले दिन ग्रामीणों और देवलुओं ने ढोल-नगाड़ों एवं पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों पर सामूहिक नाटियां प्रस्तुत कर उत्सव का आगाज किया।
फांचा में वर्षों से चली आ रही देव परंपराओं का पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निर्वहन किया जा रहा है। मेले में हजारों श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने भाग लेकर पारंपरिक संस्कृति का आनंद लिया। इस अवसर पर नोग घोड़ी के आराध्य देवता साहिब दमुख डंसा भी विशेष रूप से मेले में पहुंचे। इन दिनों देवता साहिब 15/20 घाटी के चार दिवसीय प्रवास पर हैं।
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फांचा पहुंचने पर मंदिर कमेटी और ग्रामीणों ने देवता साहिब तथा उनके साथ आए देवलुओं का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर में शीश नवाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। शुक्रवार को फांचा मंदिर परिसर में आस्था और उत्साह का माहौल देखने को मिला। महिलाओं, ग्रामीणों और देवलुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर वाद्य यंत्रों की धुनों पर देर शाम तक नाटियां प्रस्तुत कीं। देवता साहिब जाख फांचा और देवता साहिब दमुख डंसा की उपस्थिति में मंदिर परिसर लोक संस्कृति और धार्मिक आस्था का केंद्र बना रहा।
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ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे पारंपरिक मेले न केवल देव संस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने आराध्य देवताओं से क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।