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मानसून : घग्गर में जलकुंभी और रंगोई नाले के कमजोर तटबंधों ने बढ़ाई चिंता
Mon, 06 Jul 2026 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 06 Jul 2026 10:54 PM IST
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जाखल। पहाड़ी राज्यों में बरसात होने के बाद जाखल घग्गर नदी में आई खरपतवार। संवाद
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जाखल। मानसून सीजन की शुरुआत के साथ ही घग्गर नदी में जमा खरपतवार और रंगोई नाले के कई स्थानों पर कमजोर तटबंधों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि आगामी दिनों में पहाड़ी क्षेत्रों और प्रदेश में भारी वर्षा हुई तो निचले इलाकों तथा आसपास के गांवों में जलभराव और बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
शिवालिक की पहाड़ियों से निकलने वाली घग्गर नदी पटियाला, गुहला-चीका, खनौरी और चांदपुरा से गुजरते हुए फतेहाबाद जिले में प्रवेश करती है। बरसाती नदी होने के बावजूद पहाड़ों में अधिक वर्षा होने पर यह उग्र रूप धारण कर लेती है। अब तक फतेहाबाद जिले के जाखल, भूना, रतिया में कई बार जलभराव हो चुका है। खनौरी के बाद मूनक क्षेत्र से गुजरने वाली घग्गर जाखल से महज 30 से 32 किलोमीटर दूर है। इसी कारण क्षेत्र के लोग हर मानसून में सतर्क रहते हैं। संवाद
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अधूरी तैयारियों से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2023 की बाढ़ में म्योंदकलां, म्योंद खुर्द, तलवाड़ा, शकरपुरा, दिवाना, ढेर, उदयपुर, कासिमपुर और नडैल सहित कई गांवों में जलभराव हो गया। फसलें नष्ट हुई थीं, मकानों को नुकसान पहुंचा था और पशुधन की भी हानि हुई थी। किसान जगरूप सिंह, नसीब सिंह और राममेहर ने कहा कि मानसून से पहले नदी और नालों की सफाई, खरपतवार हटाने तथा तटबंध मजबूत करने का काम पूरा होना चाहिए था लेकिन कई स्थानों पर यह कार्य अब भी अधूरा है। इससे लोगों में फिर बाढ़ का डर बना हुआ है।
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-- -- -- -- -- -- - रंगोई नाले के कमजोर तटबंध बने खतरा
किसान लाभ सिंह, बलकार सिंह और हरमेल सिंह ने बताया कि घग्गर का जलस्तर बढ़ने पर अतिरिक्त पानी रंगोई नाले में छोड़ा जाता है। वर्ष 2023 में नाले के कई तटबंध टूटने से गांवों और खेतों में पानी भर गया था। इस बार भी कई स्थानों पर तटबंध कमजोर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते तटबंध मजबूत नहीं किए गए और नदी से खरपतवार नहीं हटाया गया तो भारी वर्षा की स्थिति में हालात गंभीर हो सकते हैं।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से घग्गर नदी की सफाई, रंगोई नाले के तटबंध मजबूत करने तथा बाढ़ सुरक्षा कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है ताकि वर्ष 2023 जैसी त्रासदी फिर से न हो।
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घग्घर नदी के तटबंधों को आवश्यकतानुसार मजबूत किया जा चुका है। जिन स्थानों पर अतिरिक्त मिट्टी की आवश्यकता है वहां लगातार मिट्टी डलवाई जा रही है। यदि भविष्य में जलस्तर बढ़ता है या बहाव तेज होने के कारण जलकुंभी से जल निकासी प्रभावित होती है तो पोकलेन मशीन की मदद से उसे तत्काल हटाया जाएगा। विभाग की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है और फिलहाल से किसी प्रकार की चिंता की स्थिति नहीं है।
- श्याम लाल ढींगरा, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग
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शिवालिक की पहाड़ियों से निकलने वाली घग्गर नदी पटियाला, गुहला-चीका, खनौरी और चांदपुरा से गुजरते हुए फतेहाबाद जिले में प्रवेश करती है। बरसाती नदी होने के बावजूद पहाड़ों में अधिक वर्षा होने पर यह उग्र रूप धारण कर लेती है। अब तक फतेहाबाद जिले के जाखल, भूना, रतिया में कई बार जलभराव हो चुका है। खनौरी के बाद मूनक क्षेत्र से गुजरने वाली घग्गर जाखल से महज 30 से 32 किलोमीटर दूर है। इसी कारण क्षेत्र के लोग हर मानसून में सतर्क रहते हैं। संवाद
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अधूरी तैयारियों से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2023 की बाढ़ में म्योंदकलां, म्योंद खुर्द, तलवाड़ा, शकरपुरा, दिवाना, ढेर, उदयपुर, कासिमपुर और नडैल सहित कई गांवों में जलभराव हो गया। फसलें नष्ट हुई थीं, मकानों को नुकसान पहुंचा था और पशुधन की भी हानि हुई थी। किसान जगरूप सिंह, नसीब सिंह और राममेहर ने कहा कि मानसून से पहले नदी और नालों की सफाई, खरपतवार हटाने तथा तटबंध मजबूत करने का काम पूरा होना चाहिए था लेकिन कई स्थानों पर यह कार्य अब भी अधूरा है। इससे लोगों में फिर बाढ़ का डर बना हुआ है।
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किसान लाभ सिंह, बलकार सिंह और हरमेल सिंह ने बताया कि घग्गर का जलस्तर बढ़ने पर अतिरिक्त पानी रंगोई नाले में छोड़ा जाता है। वर्ष 2023 में नाले के कई तटबंध टूटने से गांवों और खेतों में पानी भर गया था। इस बार भी कई स्थानों पर तटबंध कमजोर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते तटबंध मजबूत नहीं किए गए और नदी से खरपतवार नहीं हटाया गया तो भारी वर्षा की स्थिति में हालात गंभीर हो सकते हैं।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से घग्गर नदी की सफाई, रंगोई नाले के तटबंध मजबूत करने तथा बाढ़ सुरक्षा कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है ताकि वर्ष 2023 जैसी त्रासदी फिर से न हो।
घग्घर नदी के तटबंधों को आवश्यकतानुसार मजबूत किया जा चुका है। जिन स्थानों पर अतिरिक्त मिट्टी की आवश्यकता है वहां लगातार मिट्टी डलवाई जा रही है। यदि भविष्य में जलस्तर बढ़ता है या बहाव तेज होने के कारण जलकुंभी से जल निकासी प्रभावित होती है तो पोकलेन मशीन की मदद से उसे तत्काल हटाया जाएगा। विभाग की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है और फिलहाल से किसी प्रकार की चिंता की स्थिति नहीं है।
- श्याम लाल ढींगरा, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग