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मुआवजे के लिए भाकियू ने रोका हाईवे, दो घंटे थमी रही हाईवे की रफ्तार

Fri, 11 Jan 2019 12:29 AM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Published by: Deepak Kausik Updated Fri, 11 Jan 2019 12:29 AM IST
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Farmers stopped the Highway for compensation
किसानों के धरने को संबोधित करते राकेश टिकैत। - फोटो : अमर उजाला
खतौली में भारतीय किसान यूनियन कार्यकर्ताओं ने बाईपास बनाने में एनएचएआई द्वारा अधिग्रहीत की गई भूमि के मुआवजे व पुराने ट्रैक्टरों को एनजीटी की रोक के दायरे से बाहर करने की मांग को लेकर हाईवे पर जाम लगा दिया और धरना देकर बैठ गए। दो घंटे तक हाईवे बंद रहने से दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइनें लग गईं और जाम में फंसे यात्री परेशान रहे। जाम के चलते हाईवे के ट्रैफिक को दौराला मेरठ से वाया बिजनौर और गंगनहर की ओर डायवर्ट कर दिया गया।
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बृहस्पतिवार की सुबह 10.30 बजे ही कार्यकर्ता और किसान अपनी ट्रैक्टर ट्रॉलियों में बैठकर एनएच-58 पर एकत्र होना प्रारंभ हो गए थे। भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत काफी संख्या में कार्यकर्ताओं को लेकर नेशनल हाईवे पर भंगेला कट पहुंचे। जिलाध्यक्ष ने हाईवे पर अंडरपास निर्माण का कार्य रुकवाते हुए कर्मचारियों को वहां से भगा दिया। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी भंगेला कट पर पहुंच गए।
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दोपहर 12 बजे हाईवे पर चक्का जाम कर दिया और सड़क के बीच में ही धरना देकर बैठ गए। सूचना पर एडीएम प्रशासन अमित कुमार, एसपी सिटी ओमबीर सिंह, एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी, एसडीएम सदर कुमार धर्मेंद्र मौके पर पहुंच गए वार्ता शुरू की। राकेश टिकैत ने कहा कि मांग पूरी होने तक अंडरपास निर्माण का कार्य प्रारंभ नहीं होने देंगे। एनएचएआई के पीडी डीके चतुर्वेदी ने कुछ मांगों को 15 दिन के भीतर पूरी करने का आश्वासन दिया। इसके अलावा अन्य मांगों को लेकर सोमवार को अधिकारियों से वार्ता करने पर सहमति बनी। करीब दो घंटे बाद जाम खोल दिया गया।
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32 गांवों के किसानों का 50 करोड़ मुआवजा बकाया
खतौली। शासन व प्रशासन ने खतौली बाईपास पर दिल्ली-दून नेशनल हाईवे बनाने को एनएचएआई को किसानों की भूमि अधिग्रहीत की थी। किसानों ने भूमि अधिग्रहीत करने का अपने ओर से समर्थन कर दिया था। उस वक्त एनएचएआई के अधिकारियों ने किसानों को उनकी एक एक इंचभर भूमि का मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। किसानों को उनकी भूमि का मुआवजा तो जरूर मिला, लेकिन कागजातों में त्रुटि होने से किसानों को जो मुआवजा मिलना चाहिए था, उनको नहीं मिल सका। इस कारण 32 गांवों के किसानों का करीब 50 करोड़ रुपये का मुआवजा अभी बकाया है। इसको लेकर भाकियू के साथ मिलकर किसान मुआवजा की मांग को लेकर आंदोलन करते चले आ रहे हैं।  

खतौली में दिल्ली-दून फोर लाइन नेशनल हाईवे नहीं बनने पर प्रशासन की मदद से एनएचएआई ने खतौली बाईपास से नेशनल हाईवे बनाने का निर्णय लिया था। इसके लिए क्षेत्र के किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई थी। किसानों की भूमि अधिग्रहीत करके हाईवे का निर्माण भी सन 2012 में लगभग पूरा हो गया था। इस हाईवे के निर्माण के लिए गांव भंगेला, तिगाई, सरधन, सठेड़ी, अजीतपुर, रायपुर नंगली, भैंसी, शेरपुर, जड़ौदा, नरा, वहलना, मनव्वरपुर, खानूपुर, बागोवाली, पचैंड़ा, शेरननगर, संधावली सहित 32 गांवों की भूमि अधिग्रहीत की थी।

पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान ने पिछले दो माह पूर्व भंगेला व भैंसी कट पर अंडरपास निर्माण कराने को कार्य शुरू किया था। भाकियू के जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने बताया कि उपरोक्त गांव के किसानों को अभी तक भूमि अधिग्रहण का मुआवजा करीब 50 करोड़ रुपये का नहीं मिल सका है। किसानों ने अंडरपास निर्माण कार्य को दो बार रुकवाया। काम रुकवाने पर अधिकारियों के बीच समझौता वार्ता हुई। समझौता वार्ता में कोई समाधान नहीं निकला था।

इसलिए भाकियू ने फिर से किसानों को मुआवजा दिलाने को हाईवे पर चक्का जाम करने की चेतावनी दी थी। भाकियू ने चेतावनी पर बृहस्पतिवार को हाईवे पर चक्का जाम किया।  अधिकारियों ने मुआवजा व अन्य किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए 15 दिन का समय मांगा है। सोमवार को फिर से अधिकारियों के साथ समझौता वार्ता होगी।

ये रहे धरने में शामिल
धरने की अध्यक्षता ओमप्रकाश शर्मा और संचालन प्रवेंद्र ढाका ने किया। धरने पर जिलाध्यक्ष राजू अहलावत, नगराध्यक्ष मनोज सहरावत, सुनील प्रधान भैंसी, ब्लाक अध्यक्ष कपिल सोम, तहसील अध्यक्ष अंकुर मुखिया, राजबीर गुर्जर, शाहिद आलम, जितेंद्र कुमार, खडक़ सिंह सैनी, अश्वनी बुआड़ा, डॉ सतेंद्र चौहान, बिटटू तिगाई, लक्ष्मण मथेड़ी, हरबीर मोतला, पवन आर्य आदि किसान मौजूद रहे।   

ट्रेन भी दो घंटे लेट रही, यात्री रहे परेशान       
खतौली। भाकियू ने किसानों की मांगो को लेकर बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे दिल्ली-दून नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर दिया था। जाम के कारण हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। जाम में फंसने पर यात्री हलकान रहे। बृहस्पतिवार दोपहर को चलने वाली ऋषिकेष- दिल्ली पैसेंजर ट्रेन भी करीब दो घंटे विलंब थी। हाईवे पर चक्का जाम को लेकर नगर के लोग ट्रेन से सफर करना चाहते थे, लेकिन ट्रेन के लेट होने से यात्रियों को परेशानियां उठानी पड़ी। हाईवे पर करीब दो घंटे तक पूरी तरह चक्का जाम रहा। मात्र एंबुलेंस को ही कार्यकर्ताओं ने निकलने दिया।       

संपर्क मांर्गों पर भटकते रहे वाहन        
खतौली। हाईवे पर चक्का करने को लेकर गंतव्य को आने जाने वाले वाहन संपर्क मार्गों पर भटकते रहे। कई वाहन गांवों के संकरा मार्गों से निकलने को लेकर फंस भी गए। इस कारण उन वाहनों को लौटना पड़ा। हाईवे पर दोनों ओर काफी लंबा जाम लग गया था। रोडवेज की दर्जनों बसें भी जाम में फंस गई। हाईवे पर यातायात सुचारु होने में भी काफी समय लगा।       
 
डायवर्जन करना पड़ गया रूट       
खतौली। हाईवे पर चक्का जाम के लिए पुलिस को रूट डायवर्जन करना पड़ा। मेरठ पुलिस को भी डायवर्जन करने की कमान संभालनी पड़ी। मेरठ पुलिस ने हाईवे पर दिल्ली की ओर से मुजफ्फरनगर जाने वाले वाहनों को दादरी से गंगनहर कांवड़ पटरी मार्ग से निकाला। इसके अलावा खतौली पुलिस ने मुजफ्फरनगर की ओर से मेरठ की ओर जाने वाले वाहनों को वाया जानसठ व मीरापुर तथा गांव सठेड़ी की गंगनहर कांवड़ पटरी से निकाला। इसके बावजूद वाहन सवारों को परेशानियां उठानी पड़ी।       

अधिग्रहीत भूमि के संबंध में ज्ञापन सौंपा       
खतौली। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत व जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने रेलवे लाइन बिछाने के लिए 26 गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहीत करने के संबंध में भी डीएम के नाम  ज्ञापन एडीएम (प्रशासन) अमित सिंह को सौंपा। ज्ञापन में अधिग्रहीत भूमि का प्रतिकर डीएम के द्वारा जारी सर्किल रेट से भी कम दरों पर दिया गया है, प्रतिकर का निर्धारण निर्धारित सैगमेंट के अनुसार किया जाए। प्रतिकर का अवार्ड सभी भूस्वामियों का अलग अलग व्यक्तिगत रूप से किया जाए। पेड़ों का मूल्यांकन उचित दरों पर किया जाए सहित आठ मांगों को पूरा करने का ज्ञापन सौंपा गया।      

भाजपा को आरक्षण लागू करने से वोट नहीं मिलेगी : टिकैत
खतौली। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि भाजपा को आरक्षण लागू करने से वोट नहीं मिलेगी। किसानों की जो भी सरकार उपेक्षा करेगी, उसका पतन निश्चित है। भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव जीतने के लिए मंथन कर रही है। किसान लोकसभा चुनाव में अपनी ताकत का अहसास भाजपा करा देंगे।

हाईवे पर धरने पर बैठे राकेश टिकैत ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने जितनी की योजनाएं लागू की हैं, उनसे किसानों को काई फायदा नहीं हुआ है। भाजपा सरकार में किसानों को उम्मीद जगी थी कि उनका भला होगा। भाजपा सरकार में किसान सबसे ज्यादा त्रस्त है। भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों के हित में घोषणा की थी।


भाजपा सरकार ने उन घोषणाओं को पूरा नहीं किया है। किसानों इस सरकार में पूरी तरह से त्रस्त है। किसानों को गन्ने का भुगतान भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। भाजपा आरक्षण, हैल्थ योजना, उज्जवला योजना के माध्यम से लोकसभा में वोट हासिल करना चाहती है, लेकिन इन योजनाओं से भाजपा को कोई लाभ नहीं मिलेगा।          
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