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Lakhimpur Kheri News: दिवाली की आड़ में जंगल में सेंधमारी की आशंका
Sun, 01 Nov 2026 12:44 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 01 Nov 2026 12:44 AM IST
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मैलानी रेंज जंगल में पेड़ की डाल पर बैठे उल्लू। स्रोत : वन विभाग।
बांकेगंज। दिवाली के दौरान शिकारी वन क्षेत्रों में घुसपैठ कर वन्यजीवों, खासकर उल्लुओं का शिकार और पेड़ों का कटान कर सकते हैं। इस आशंका पर दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में एक सप्ताह पहले ही अलर्ट जारी कर दिया गया है। सभी वनाधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष परिस्थितियों को छोड़कर छुट्टियां निरस्त कर उन्हें ड्यूटी पर मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
डीटीआर के एफडी डॉ. एच. राजामोहन ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा से सटे दुधवा और बफर जोन के जंगलों के आसपास के गांवों में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग दिवाली के दौरान सक्रिय रहते हैं। इनकी घुसपैठ रोकने के लिए वन विभाग की गठित टीमें जंगल से गुजरने वाले वाहनों की सघन जांच के बाद ही प्रवेश देंगी। सीमा पर एसएसबी और एसटीपीएफ के जवान लगातार गश्त करेंगे।
दुर्गम स्थलों पर अत्याधुनिक हथियारों से लैस वनकर्मी हाथियों के जरिए निगरानी रखेंगे। पेट्रोलिंग टीमों को रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और बाजारों में भी चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
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अंधविश्वास में उल्लुओं का शिकार
उल्लू को मां लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। कुछ लोगों में अंधविश्वास है कि उल्लू का वध करने से लक्ष्मी उनके घर में वास करने लगेंगी। इसी धारणा के चलते दिवाली पर उल्लुओं की बलि देने के लिए उनका शिकार किया जाता है। छोटी काशी गोला के ज्योतिषाचार्य पं. रामेदव मिश्र शास्त्री इसे अंधविश्वास बताते हैं। उनका कहना है कि शास्त्रों में इसका कोई उल्लेख नहीं है। ऐसा करना गलत ही नहीं, घोर पाप है।
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दिवाली पर जंगलों में वन्यजीवों, खासकर उल्लुओं के शिकार की आशंका रहती है। इसके चलते डीटीआर के सभी अफसरों और कर्मचारियों की विशेष परिस्थितियों को छोड़कर छुट्टियां निरस्त कर दी गई हैं।
- डॉ. एच. राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व।
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डीटीआर के एफडी डॉ. एच. राजामोहन ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा से सटे दुधवा और बफर जोन के जंगलों के आसपास के गांवों में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग दिवाली के दौरान सक्रिय रहते हैं। इनकी घुसपैठ रोकने के लिए वन विभाग की गठित टीमें जंगल से गुजरने वाले वाहनों की सघन जांच के बाद ही प्रवेश देंगी। सीमा पर एसएसबी और एसटीपीएफ के जवान लगातार गश्त करेंगे।
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दुर्गम स्थलों पर अत्याधुनिक हथियारों से लैस वनकर्मी हाथियों के जरिए निगरानी रखेंगे। पेट्रोलिंग टीमों को रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और बाजारों में भी चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
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अंधविश्वास में उल्लुओं का शिकार
उल्लू को मां लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। कुछ लोगों में अंधविश्वास है कि उल्लू का वध करने से लक्ष्मी उनके घर में वास करने लगेंगी। इसी धारणा के चलते दिवाली पर उल्लुओं की बलि देने के लिए उनका शिकार किया जाता है। छोटी काशी गोला के ज्योतिषाचार्य पं. रामेदव मिश्र शास्त्री इसे अंधविश्वास बताते हैं। उनका कहना है कि शास्त्रों में इसका कोई उल्लेख नहीं है। ऐसा करना गलत ही नहीं, घोर पाप है।
दिवाली पर जंगलों में वन्यजीवों, खासकर उल्लुओं के शिकार की आशंका रहती है। इसके चलते डीटीआर के सभी अफसरों और कर्मचारियों की विशेष परिस्थितियों को छोड़कर छुट्टियां निरस्त कर दी गई हैं।
- डॉ. एच. राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व।