{"_id":"6a4bb7f11651ab81580ec4a2","slug":"drug-cultivation-amidst-forest-greenery-revealed-by-drone-shimla-news-c-19-sml1002-749202-2026-07-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: जंगलों की हरियाली के बीच नशे की खेती, ड्रोन से खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: जंगलों की हरियाली के बीच नशे की खेती, ड्रोन से खुलासा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चौपाल, रामपुर, रोहड़ू के चिड़गांव में भांग और अफीम की खेती का खुलासा, सूचना मिलने पर कार्रवाई कर रही पुलिस
कोफरधार में 10 बीघा भूमि पर मिले भांग के दस लाख पौधे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले के दुर्गम क्षेत्रों और जंगलों में भांग तथा अफीम की खेती पर कार्रवाई के लिए अब पुलिस ड्रोन के जरिये नजर रख रही है। इसका उद्देश्य जिले में नशे की खेती करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है।
पुलिस ने चौपाल, रोहड़ू के चिड़गांव समेत कई क्षेत्रों में भांग और अफीम की बड़े पैमाने पर हो रही अवैध खेती का भंडाफोड़ किया है। ऐसे मामलों में पुलिस आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई अमल में ला रही है। 6 जुलाई को पुलिस ने चौपाल के कोफरधार क्षेत्र के जंगल में 10 बीघा भूमि पर करीब 10 लाख भांग के पौधे बरामद किए। इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इससे पहले 18 जून को पुलिस ने चिड़गांव में एक सेब के बगीचे से अफीम के 3,591 पौधे बरामद किए थे।
जून माह में ही पुलिस ने चौपाल क्षेत्र में अफीम की अवैध खेती का भी पर्दाफाश किया था। ड्रोन के जरिये पुलिस दुर्गम क्षेत्रों में चोरी-छिपे की जा रही खेती का भी भंडाफोड़ कर रही है। इन क्षेत्रों में न तो सड़कें हैं और न ही घने जंगलों के कारण पुलिस के लिए वहां तक पहुंचना आसान है। इसका फायदा उठाकर इन इलाकों में बड़े पैमाने पर भांग और अफीम की खेती की जा रही थी।
विज्ञापन
जंगलों में अवैध रूप से हो रही नशे की खेती
जिले में नशा माफिया पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहा है। निजी भूमि पर पुलिस की कार्रवाई को देखते हुए अब दूरदराज के घने जंगलों में भांग और अफीम की अवैध खेती की जा रही है। यदि पुलिस को स्थानीय लोगों से इसकी सूचना मिल भी जाती है तो वन भूमि होने के कारण कई मामलों में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करना पड़ता है। ऐसे मामलों में अवैध खेती करने वालों की पहचान भी अधिकांश मामलों में नहीं हो पाती। इसे देखते हुए पुलिस वन विभाग और राजस्व विभाग के साथ मिलकर ऐसी अवैध खेती का पता लगाने, उसे नष्ट करने तथा संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में जुटी है।
कोट
पुलिस नशा माफिया के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। इसके लिए सभी स्तरों पर काम करते हुए नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने के साथ अफीम और भांग की अवैध खेती करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।
-गौरव सिंह, एसएसपी शिमला
विज्ञापन
कोफरधार में 10 बीघा भूमि पर मिले भांग के दस लाख पौधे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले के दुर्गम क्षेत्रों और जंगलों में भांग तथा अफीम की खेती पर कार्रवाई के लिए अब पुलिस ड्रोन के जरिये नजर रख रही है। इसका उद्देश्य जिले में नशे की खेती करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है।
पुलिस ने चौपाल, रोहड़ू के चिड़गांव समेत कई क्षेत्रों में भांग और अफीम की बड़े पैमाने पर हो रही अवैध खेती का भंडाफोड़ किया है। ऐसे मामलों में पुलिस आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई अमल में ला रही है। 6 जुलाई को पुलिस ने चौपाल के कोफरधार क्षेत्र के जंगल में 10 बीघा भूमि पर करीब 10 लाख भांग के पौधे बरामद किए। इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इससे पहले 18 जून को पुलिस ने चिड़गांव में एक सेब के बगीचे से अफीम के 3,591 पौधे बरामद किए थे।
विज्ञापन
जून माह में ही पुलिस ने चौपाल क्षेत्र में अफीम की अवैध खेती का भी पर्दाफाश किया था। ड्रोन के जरिये पुलिस दुर्गम क्षेत्रों में चोरी-छिपे की जा रही खेती का भी भंडाफोड़ कर रही है। इन क्षेत्रों में न तो सड़कें हैं और न ही घने जंगलों के कारण पुलिस के लिए वहां तक पहुंचना आसान है। इसका फायदा उठाकर इन इलाकों में बड़े पैमाने पर भांग और अफीम की खेती की जा रही थी।
विज्ञापन
जंगलों में अवैध रूप से हो रही नशे की खेती
जिले में नशा माफिया पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहा है। निजी भूमि पर पुलिस की कार्रवाई को देखते हुए अब दूरदराज के घने जंगलों में भांग और अफीम की अवैध खेती की जा रही है। यदि पुलिस को स्थानीय लोगों से इसकी सूचना मिल भी जाती है तो वन भूमि होने के कारण कई मामलों में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करना पड़ता है। ऐसे मामलों में अवैध खेती करने वालों की पहचान भी अधिकांश मामलों में नहीं हो पाती। इसे देखते हुए पुलिस वन विभाग और राजस्व विभाग के साथ मिलकर ऐसी अवैध खेती का पता लगाने, उसे नष्ट करने तथा संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में जुटी है।
कोट
पुलिस नशा माफिया के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। इसके लिए सभी स्तरों पर काम करते हुए नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने के साथ अफीम और भांग की अवैध खेती करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।
-गौरव सिंह, एसएसपी शिमला