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Shimla News: संपत्ति कर की स्लैब दरों में गड़बड़ी, लोगों को दोगुना जारी कर दिए बिल
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गलती का पता चलते ही नगर निगम ने बंद की बिल जारी करने की प्रक्रिया, बीते साल 800 टैक्स देने वालों को इस बार जारी कर दिए 2200 रुपये तक के बिल
अब सिर्फ व्यावसायिक भवनों के टैक्स बिल जारी होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। संपत्ति कर की स्लैब दरों में गड़बड़ी से शहरवासियों को इस बार टैक्स के दोगुना बिल जारी हो गए हैं। अचानक भारी भरकम बिल देखकर कई लोग नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। उधर नगर निगम ने भी स्लैब दरों पर सवाल उठने के बाद बिल जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
नगर निगम ने इस मामले पर अब सरकार को पत्र लिखा है। सरकार से आगामी निर्देश जारी होने तक शहर में रिहायशी मकानों के टैक्स बिल जारी करने पर रोक जारी रहेगी। शहर में अब सिर्फ व्यावसायिक भवनों के टैक्स बिल ही जारी होंगे। शहर में हर साल अप्रैल में टैक्स के बिल जारी होते हैं। इस बार निगम ने करीब तीन महीने की देरी के बाद बीते हफ्ते से ही शहर में प्रॉपर्टी टैक्स के बिल जारी करने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब विवाद उठने पर चार दिन में ही बिल जारी करने पर रोक लगानी पड़ी है। शहर में जिन भवन मालिकों को बीते साल 800 से 1000 रुपये टैक्स के बिल जारी हो रहे थे, उन्हें इस बार 2000 से 2200 रुपये तक के बिल जारी हुए हैं। आकार के लिहाज से छोटे बड़े सभी रिहायशी मकानों पर एक समान स्लैब दरें लागू होने से भवन मालिकों के बिल दोगुना हो गए हैं। निगम ने चार दिनों में सैकड़ों भवन मालिकों को टैक्स के बिल जारी कर दिए थे। कई लोगों ने बिल जमा भी कर दिए हैं।
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स्लैब दरों से ऐसे बढ़ गए बिल
शहर में अभी तक 100 वर्ग मीटर आकार वाले भवनों पर तीन फीसदी की दर से टैक्स बिल जारी होते थे। इसमें जिन रिहायशी भवनों का आकार सौ से ज्यादा यानी 120 या 150 वर्ग मीटर है, उन पर दो स्लैब दरें लागू होती थीं। इनमें 100 वर्ग मीटर तक 3 फीसदी जबकि 100 से ज्यादा वाले बाकी हिस्से पर 6 फीसदी दर लगती थी। अब नगर निगम ने सरकार के निर्देश अनुसार टैक्स व्यवस्था को नए सॉफ्टवेयर पर शिफ्ट किया है। इसमें सभी आकार वाले भवनों पर छह फीसदी दर लागू कर दी है। इससे लोगों के बिल बढ़ गए हैं। टैक्स निर्धारण में इस दर के अलावा कच्चा या पक्का, मर्ज या कोर एरिया जैसे फैक्टर भी लागू होते हैं।
शहर में 32 हजार भवन मालिक
शिमला शहर में 32 हजार भवन मालिक हैं जिनसे नगर निगम टैक्स वसूलता है। स्लैब दरों का असर सिर्फ रिहायशी मकानों पर पड़ा है। व्यावसायिक भवनों पर पहले से फ्लैट दर लागू होती है। निगम प्रशासन के अनुसार सरकार से दिशा निर्देश मिलने के बाद रिहायशी भवनों के बिल जारी होंगे।
रिहायशी मकानों के रोके हैं बिल
शहर में अभी रिहायशी यानी सेल्फ ऑक्यूपाइड मकानों के बिल जारी नहीं होंगे। स्लैब दर लागू करने को लेकर सरकार से निर्देश जारी करने के लिए पत्र लिखा जा रहा है। दिशा निर्देश मिलने के बाद ही इनके बिल जारी होंगे।
-डॉ. भुवन शर्मा, अतिरिक्त आयुक्त नगर निगम शिमला
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अब सिर्फ व्यावसायिक भवनों के टैक्स बिल जारी होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। संपत्ति कर की स्लैब दरों में गड़बड़ी से शहरवासियों को इस बार टैक्स के दोगुना बिल जारी हो गए हैं। अचानक भारी भरकम बिल देखकर कई लोग नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। उधर नगर निगम ने भी स्लैब दरों पर सवाल उठने के बाद बिल जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
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नगर निगम ने इस मामले पर अब सरकार को पत्र लिखा है। सरकार से आगामी निर्देश जारी होने तक शहर में रिहायशी मकानों के टैक्स बिल जारी करने पर रोक जारी रहेगी। शहर में अब सिर्फ व्यावसायिक भवनों के टैक्स बिल ही जारी होंगे। शहर में हर साल अप्रैल में टैक्स के बिल जारी होते हैं। इस बार निगम ने करीब तीन महीने की देरी के बाद बीते हफ्ते से ही शहर में प्रॉपर्टी टैक्स के बिल जारी करने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब विवाद उठने पर चार दिन में ही बिल जारी करने पर रोक लगानी पड़ी है। शहर में जिन भवन मालिकों को बीते साल 800 से 1000 रुपये टैक्स के बिल जारी हो रहे थे, उन्हें इस बार 2000 से 2200 रुपये तक के बिल जारी हुए हैं। आकार के लिहाज से छोटे बड़े सभी रिहायशी मकानों पर एक समान स्लैब दरें लागू होने से भवन मालिकों के बिल दोगुना हो गए हैं। निगम ने चार दिनों में सैकड़ों भवन मालिकों को टैक्स के बिल जारी कर दिए थे। कई लोगों ने बिल जमा भी कर दिए हैं।
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स्लैब दरों से ऐसे बढ़ गए बिल
शहर में अभी तक 100 वर्ग मीटर आकार वाले भवनों पर तीन फीसदी की दर से टैक्स बिल जारी होते थे। इसमें जिन रिहायशी भवनों का आकार सौ से ज्यादा यानी 120 या 150 वर्ग मीटर है, उन पर दो स्लैब दरें लागू होती थीं। इनमें 100 वर्ग मीटर तक 3 फीसदी जबकि 100 से ज्यादा वाले बाकी हिस्से पर 6 फीसदी दर लगती थी। अब नगर निगम ने सरकार के निर्देश अनुसार टैक्स व्यवस्था को नए सॉफ्टवेयर पर शिफ्ट किया है। इसमें सभी आकार वाले भवनों पर छह फीसदी दर लागू कर दी है। इससे लोगों के बिल बढ़ गए हैं। टैक्स निर्धारण में इस दर के अलावा कच्चा या पक्का, मर्ज या कोर एरिया जैसे फैक्टर भी लागू होते हैं।
शहर में 32 हजार भवन मालिक
शिमला शहर में 32 हजार भवन मालिक हैं जिनसे नगर निगम टैक्स वसूलता है। स्लैब दरों का असर सिर्फ रिहायशी मकानों पर पड़ा है। व्यावसायिक भवनों पर पहले से फ्लैट दर लागू होती है। निगम प्रशासन के अनुसार सरकार से दिशा निर्देश मिलने के बाद रिहायशी भवनों के बिल जारी होंगे।
रिहायशी मकानों के रोके हैं बिल
शहर में अभी रिहायशी यानी सेल्फ ऑक्यूपाइड मकानों के बिल जारी नहीं होंगे। स्लैब दर लागू करने को लेकर सरकार से निर्देश जारी करने के लिए पत्र लिखा जा रहा है। दिशा निर्देश मिलने के बाद ही इनके बिल जारी होंगे।
-डॉ. भुवन शर्मा, अतिरिक्त आयुक्त नगर निगम शिमला