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Supreme Court: गोवा में शिवाजी की अवैध प्रतिमा हटाने का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से किया इनकार
Mon, 06 Jul 2026 07:54 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 06 Jul 2026 07:54 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट
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सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें गोवा में मोरमुगाओ बंदरगाह प्राधिकरण की जमीन पर लगी छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को हटाने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शीला नागू की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
यह याचिका हाईकोर्ट के सात अप्रैल के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी, जिसमें प्रतिमा को हटाने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि यह प्रतिमा गैरकानूनी तरीके से बनाई गई है और स्थानीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन कर लगाई गई है। याचिकाकर्ताओं राजेंद्र लक्ष्मण परब और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस ले ली। उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से अनिच्छा जताई।
आदेश में कहा गया, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने वर्तमान विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) वापस लेने का अनुरोध किया है। अनुमति दी जाती है। आदेश में आगे कहा गया, एसएलपी को वापस लिए जाने के कारण खारिज किया जाता है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट में उचित आवेदन दाखिल करने और आदेश में संशोधन की मांग करने की स्वतंत्रता दी जाती है।
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यह याचिका हाईकोर्ट के सात अप्रैल के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी, जिसमें प्रतिमा को हटाने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि यह प्रतिमा गैरकानूनी तरीके से बनाई गई है और स्थानीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन कर लगाई गई है। याचिकाकर्ताओं राजेंद्र लक्ष्मण परब और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस ले ली। उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से अनिच्छा जताई।
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आदेश में कहा गया, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने वर्तमान विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) वापस लेने का अनुरोध किया है। अनुमति दी जाती है। आदेश में आगे कहा गया, एसएलपी को वापस लिए जाने के कारण खारिज किया जाता है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट में उचित आवेदन दाखिल करने और आदेश में संशोधन की मांग करने की स्वतंत्रता दी जाती है।
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