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Congress: भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग पर खरगे ने सरकार से पूछे तीखे सवाल; कन्हैया ने शिक्षा पर कैसे घेरा?
Mon, 06 Jul 2026 09:28 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 06 Jul 2026 09:28 PM IST
सार
कांग्रेस ने वैश्विक पासपोर्ट सूचकांक में भारत के प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। पार्टी ने कहा कि सरकारी नीतियों से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हुई है, जबकि पासपोर्ट सेवाएं महंगी और वीजा व्यवस्था कमजोर हुई है। कांग्रेस ने विदेशी पर्यटकों की घटती संख्या पर भी सवाल उठाए। पढ़िए रिपोर्ट-
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मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
वैश्विक पासपोर्ट सूचकांक में भारत की स्थिति को को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण दुनिया में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कथित पुराने बयान का जिक्र किया और उसको लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले दावा किया था कि विदेश जाने और वहां रहने वाले लोग भारतीय पासपोर्ट की ताकत और सम्मान को जानते हैं।
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कथित पुराने बयान का जिक्र किया और उसको लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले दावा किया था कि विदेश जाने और वहां रहने वाले लोग भारतीय पासपोर्ट की ताकत और सम्मान को जानते हैं।
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मल्लिकार्जुन खरगे, अध्यक्ष, कांग्रेस
- फोटो : एएनआई (फाइल)
खरगे ने क्या कहा?
- मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मोदी सरकार की नीतियां भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार हैं।
- उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2018 में कहा था किआज विदेश यात्रा करने और विदेश में रहने वाले लोग भारतीय पासपोर्ट की ताकत और सम्मान को जानते हैं। खरगे ने पूछा कि आखिर यह 'ताकत' कहां दिखाई देती है? उन्होंने कहा कि तथ्य इस दावे का समर्थन नहीं करते।
- उन्होंने दावा किया कि एक वैश्विक पासपोर्ट सूचकांक में भारत 2013 में 74वें स्थान पर था, जो जून 2026 में 80वें स्थान पर पहुंच गया है।
- उन्होंने कहा, एक अन्य वैश्विक पासपोर्ट सूचकांक में भारत को 2026 में 125वां स्थान दिया गया है।
- उन्होंने इन दावों के समर्थन में संबंधित रिपोर्ट्स का हवाला दिया।
भारतीय पासपोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
पासपोर्ट और पर्यटन को लेकर क्या सवाल उठाए?
उन्होंने कहा, सेवाओं में सुधार करने के बजाय मोदी सरकार ने पासपोर्ट बनवाना महंगा कर दिया है। उनके अनुसार, सामान्य पासपोर्ट का शुल्क 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है, जबकि तत्काल सेवा का शुल्क बढ़कर 5,000 रुपये हो गया है।
खरगे ने कहा कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या भी अभी तक कोविड महामारी से पहले के स्तर तक नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि 2019 में 1.09 करोड़ विदेशी पर्यटक भारत आए थे। जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 99.5 लाख रह गई।
उन्होंने पूछा कि क्या मोदी सरकार इस कमी को छिपाने के लिए एनआरआई (प्रवासी भारतीय) के आगमन को भी विदेशी पर्यटकों के आंकड़ों में जोड़ रही है? खरगे ने यह भी पूछा, भारत का आधिकारिक वीजा आवेदन पोर्टल अब भी इतना पुराना और जटिल क्यों है कि वह 1990 के दशक की वेबसाइट जैसा लगता है?
ये भी पढ़ें: कर्नाटक में SIR पर क्यों गरमाई सियासत?: सीएम ने खारिज किए विपक्ष के दखलंदाजी के आरोप; विपक्ष पर किया पलटवार
उन्होंने कहा, 'अतिथि देवो भवः' की भूमि भारत में कोई भी पर्यटकों का इस तरह स्वागत नहीं करना चाहता।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया, अगर भारतीय पासपोर्ट की ताकत कम हुई है। पर्यटन अब तक पूरी तरह नहीं संभला है। वीजा सेवाएं कमजोर हैं और लोगों को खराब सेवाओं के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं, तो फिर सरकार जिस वैश्विक सम्मान का प्रचार करती है, वह आखिर कहां है? उन्होंने कहा कि सच्चाई कुछ और है और मोदी सरकार की वजह से भारत की छवि प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा, सेवाओं में सुधार करने के बजाय मोदी सरकार ने पासपोर्ट बनवाना महंगा कर दिया है। उनके अनुसार, सामान्य पासपोर्ट का शुल्क 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है, जबकि तत्काल सेवा का शुल्क बढ़कर 5,000 रुपये हो गया है।
खरगे ने कहा कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या भी अभी तक कोविड महामारी से पहले के स्तर तक नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि 2019 में 1.09 करोड़ विदेशी पर्यटक भारत आए थे। जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 99.5 लाख रह गई।
उन्होंने पूछा कि क्या मोदी सरकार इस कमी को छिपाने के लिए एनआरआई (प्रवासी भारतीय) के आगमन को भी विदेशी पर्यटकों के आंकड़ों में जोड़ रही है? खरगे ने यह भी पूछा, भारत का आधिकारिक वीजा आवेदन पोर्टल अब भी इतना पुराना और जटिल क्यों है कि वह 1990 के दशक की वेबसाइट जैसा लगता है?
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उन्होंने कहा, 'अतिथि देवो भवः' की भूमि भारत में कोई भी पर्यटकों का इस तरह स्वागत नहीं करना चाहता।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया, अगर भारतीय पासपोर्ट की ताकत कम हुई है। पर्यटन अब तक पूरी तरह नहीं संभला है। वीजा सेवाएं कमजोर हैं और लोगों को खराब सेवाओं के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं, तो फिर सरकार जिस वैश्विक सम्मान का प्रचार करती है, वह आखिर कहां है? उन्होंने कहा कि सच्चाई कुछ और है और मोदी सरकार की वजह से भारत की छवि प्रभावित हो रही है।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को 'आईसीयू' में पहुंचा दिया है। पार्टी ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। साथ ही उनके पेपर लीक माफिया से कथित संबंधों की जांच होनी चाहिए और पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को 'आईसीयू' में पहुंचा दिया है। पार्टी ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। साथ ही उनके पेपर लीक माफिया से कथित संबंधों की जांच होनी चाहिए और पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए।
कन्हैया कुमार, कांग्रेस नेता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
कन्हैया कुमार ने क्या कहा?
- कांग्रेस नेता और एनएसयूआई प्रभारी कन्हैया कुमार ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देशभर के छात्रों से मिल रहे हैं। उनकी समस्याएं सुन रहे हैं, ताकि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
- उन्होंने कहा, इसी उद्देश्य से राहुल गांधी ने कोटा में छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच एक प्रस्तुति दी थी। अब इस अभियान को देश के अलग-अलग हिस्सों में आगे बढ़ाया जा रहा है। छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। उन्हें एक साथ जोड़ा जा रहा है।
- कन्हैया कुमार ने बताया कि आने वाले दिनों में एक 'एजुकेशन चार्टर' बनाया जाएगा, जिससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
- उन्होंने दोहराया कि मोदी सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था को 'आईसीयू' में डाल दिया है।
- उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उनके पेपर लीक मामले से कथित संबंधों की जांच होनी चाहिए।
- उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है। यूपीए सरकार ने इसके लिए एक समिति बनाई थी। लेकिन एनडीए सरकार ने बिना प्रक्रिया के एनटीए बना दिया।
- उन्होंने मांग की कि युवाओं के लिए नियमित नौकरी कैलेंडर जारी किया जाए। परीक्षाओं व भर्ती प्रक्रियाओं के लिए एक तय समय सारणी बनाई जाए।
विनोद जाखड़, कन्हैया कुमार
- फोटो : एएनआई
एनएसयूआई प्रमुख ने शिक्षा व्यवस्था पर क्या कहा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा, देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है। शिक्षण संस्थान खराब स्थिति में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में छात्र संघ चुनाव एक साजिश के तहत बंद कर दिए गए हैं, जिससे कॉलेज और विश्वविद्यालयों में एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों का दबदबा बना हुआ है। जाखड़ ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को कई बार विस्तार दिया जा रहा है, जिससे कई सवाल उठते हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर किस आधार पर उनका कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, अगर कोई छात्र अपनी बात रखता है तो उसे कानूनी मामलों में फंसा दिया जाता है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों की भर्ती हो रही है। इसी कारण एनएसयूआई ने संगठन चुनाव शुरू किए हैं, ताकि हर कैंपस में चुनाव के जरिये इकाइयां बनाई जा सकें। एनएसयूआई ने कहा कि छात्रों को अपनी आवाज उठाने का अवसर दिया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा, देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है। शिक्षण संस्थान खराब स्थिति में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में छात्र संघ चुनाव एक साजिश के तहत बंद कर दिए गए हैं, जिससे कॉलेज और विश्वविद्यालयों में एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों का दबदबा बना हुआ है। जाखड़ ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को कई बार विस्तार दिया जा रहा है, जिससे कई सवाल उठते हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर किस आधार पर उनका कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, अगर कोई छात्र अपनी बात रखता है तो उसे कानूनी मामलों में फंसा दिया जाता है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों की भर्ती हो रही है। इसी कारण एनएसयूआई ने संगठन चुनाव शुरू किए हैं, ताकि हर कैंपस में चुनाव के जरिये इकाइयां बनाई जा सकें। एनएसयूआई ने कहा कि छात्रों को अपनी आवाज उठाने का अवसर दिया जाएगा।