केंद्र और राज्यों में खाली पड़े लाखों पद समय पर नहीं भरे जाने से युवाओं को झेलनी पड़ रही है दोहरी मार
इन खाली पदों के लिए भर्ती निकले भी तो अभ्यर्थी प्रक्रिया के जाल में ही सालों साल तक फंसे रह जाते हैं। अपनी पढ़ाई करने की बजाए देश के बेरोजगार युवा कोर्ट कचहरी, नेता और पत्रकारों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं...
इन खाली पदों के लिए भर्ती निकले भी तो अभ्यर्थी प्रक्रिया के जाल में ही सालों साल तक फंसे रह जाते हैं। अपनी पढ़ाई करने की बजाए देश के बेरोजगार युवा कोर्ट कचहरी, नेता और पत्रकारों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं...
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केंद्र सरकार के अलावा विभिन्न राज्यों के सरकारी विभागों में भी लाखों पद खाली पड़े रहते हैं, लेकिन समय पर उन्हें नहीं भरा जाता। नतीजा, बेरोजगार युवाओं की लाइन लंबी होती चली जाती है। युवा हल्लाबोल के राष्ट्रीय संयोजक अनुपम ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि साल 2018 के दौरान ही देशभर में 24 लाख से अधिक रिक्त सरकारी पद थे। मौजूदा समय में अगर केवल भारत सरकार की बात करें तो खाली पदों की संख्या सात लाख से ज्यादा है।
ऐसे में युवाओं को सरकारों की इस लापरवाही का दोहरा खामियाजा भुगतना पड़ता है। एक तो परीक्षा का रिजल्ट आने में ही कई वर्ष लग जाते हैं। युवाओं को इंतजार रहता है कि फाइनल सूची में उनका नाम पक्का शामिल होगा। कई बार यह होता है कि पहली भर्ती का रिजल्ट जब तक नहीं आता, दूसरी भर्ती रोक दी जाती है। इसके चलते प्रतिभागियों पर आयुसीमा की पाबंदी लग जाती है।
अनुपम ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है, भारत में युवाओं की अच्छी खासी आबादी है। करीब 70 फीसदी जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु के लोगों की है। आप स्वयं इस 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' का जिक्र करते हुए भारतीय युवाओं की क्षमता और असीमित संभावनाओं पर प्रकाश डालते रहे हैं। अगर इसके बावजूद युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे, तो भारत का यह डेमोग्राफिक डिविडेंड, डेमोग्राफिक डिजास्टर बन सकता है।
आज की रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी हमारे देश के सामने एक बड़ी चुनौती है। सालाना दो करोड़ रोजगार के वादे पर सत्ता में आई भाजपा सरकार की परफॉर्मेंस से हर कोई अवगत है। यही वजह है कि युवा हल्लाबोल इस बाबत कुछ कहने की बजाए, सुधार की दिशा में सकारात्मक प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखना चाहता है। इस पत्राचार का मुख्य उद्देश्य सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा है। आए दिन देश के किसी न किसी कोने में शिक्षित बेरोजगार युवा अपने अधिकार के लिए सड़क पर प्रदर्शन करते हुए देखे जा सकते हैं। वे पुलिस की लाठियां भी खाते हैं।
अनुपम लिखते हैं, कहानी किसी भी राज्य की हो, लेकिन इन सभी प्रदर्शनों में मुख्यतया रोजगार के पर्याप्त अवसर और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया की ही मांग होती है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 में ही देशभर में 24 लाख से ज्यादा रिक्त सरकारी पद थे। बहुत संभव है कि आज ये आंकड़ा और भी बढ़ गया हो।
इन खाली पदों के लिए भर्ती निकले भी तो अभ्यर्थी प्रक्रिया के जाल में ही सालों साल तक फंसे रह जाते हैं। अपनी पढ़ाई करने की बजाए देश के बेरोजगार युवा कोर्ट कचहरी, नेता और पत्रकारों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। युवा हल्लाबोल के सुझावों को मानकर केंद्र एवं राज्यों की सरकारें, देश के युवाओं में व्याप्त आक्रोश, असंतोष, अंधकार और निराशा का निराकरण कर सकती हैं।
- सभी रिक्त सरकारी पदों के लिए तुरंत विज्ञापन निकालकर नौ महीने के अंदर नियुक्ति पत्र दें। आवश्यकतानुसार सभी विभागों में स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ाएं। साथ ही अटकी पड़ी सभी भर्तियां के संबंधित आयोग उनका कैलेंडर जारी करके समयबद्ध ढंग से प्रक्रिया पूरी करें।
- रोजगार का अधिकार दें ताकि असंगठित क्षेत्र में भी लोगों को काम मिलें, जिससे अर्थव्यवस्था मजबूती से पटरी पर टिकी रहे। बेरोजगारी नामक राष्ट्रीय आपदा से निपटा जा सके और भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड को डेमोग्राफिक डिजास्टर न बनने दिया जाए।
- दशकों की मेहनत से खड़े किए गए उन सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकों और राष्ट्रीय संपत्तियों को बेचना बंद करें जो देश के लिए आत्मनिर्भरता और युवाओं के लिए नौकरी का बड़ा स्रोत हैं।
- भारत सरकार में संयुक्त सचिव और निदेशकों के पद पर की जा रही लेटरल एंट्री पर रोक लगाई जाए। इसके चलते हर साल सरकारी भर्तियों में कमी की जा रही है। इससे आयोग द्वारा चयनित अधिकारियों के सेवा अवसर में भी कटौती होगी।