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Partho Ghosh Death: लीजेंडरी फिल्ममेकर पार्थो घोष का निधन, अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता ने किया कन्फर्म
Mon, 09 Jun 2025 11:58 AM IST
हिमांशु सोनी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सोनी
Updated Mon, 09 Jun 2025 11:58 AM IST
सार
Partho Ghosh Death News: फिल्म इंडस्ट्री से दुखद खबर सामने आ रही है। दरअसल फिल्ममेकर पार्थो घोष का निधन हो गया है। उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।
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पार्थो घोष
- फोटो : एक्स
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विस्तार
हिंदी सिनेमा ने अपने एक बेहतरीन और दमदार कहानीकार को खो दिया है। 90 के दशक में अपनी गंभीर और सामाजिक संदेशों से भरपूर फिल्मों से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले निर्देशक पार्थो घोष का 75 साल की उम्र में निधन हो गया है। बताया जा रहा है कि उनका निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ। इस खबर की पुष्टि अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता ने की, जिनकी पोस्ट के बाद इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ पड़ी है।
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पार्थो घोष के निधन से पसरा मातम
पार्थो घोष का नाम उन फिल्ममेकर्स में शुमार होता था जिन्होंने बॉलीवुड में कंटेंट और कमर्शियल अपील का बेहतरीन मेल दिखाया। उनकी फिल्मों में समाज की सच्चाइयों की झलक देखने को मिलती थी और वो दर्शकों की भावनाओं से सीधा जुड़ने में सक्षम थे। उनकी मौत हार्ट अटैक के चलते हुई, जिसके बाद फैंस को बड़ा झटका लगा है।
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पार्थो घोष
- फोटो : एक्स
फिल्म इंडस्ट्री और फैन्स की प्रतिक्रियाएं
पार्थो घोष के निधन की खबर सुनकर फिल्म इंडस्ट्री से लेकर उनके फैंस तक हर कोई स्तब्ध है। अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता ने भावुक संदेश में लिखा, 'शब्दों से परे दुखी हूं। हमने एक महान प्रतिभा, दूरदर्शी निर्देशक और दयालु आत्मा को खो दिया है। पार्थो दा, आपकी बनाई फिल्मों की जादू हमेशा याद रहेगी।' सोशल मीडिया पर भी शोक संवेदनाएं उमड़ पड़ी हैं। कई कलाकारों और निर्देशकों ने उनके साथ बिताए पलों को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है।
ये खबर भी पढ़ें: Josh: ऐश्वर्या खुद बनना चाहती थीं 'जोश' में शाहरुख खान की बहन, सलमान और काजोल ने इस रोल के लिए किया था इंकार
‘अग्नि साक्षी’ से मिली पहचान
साल 1996 में रिलीज हुई ‘अग्नि साक्षी’ पार्थो घोष के करियर का मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म में मनीषा कोइराला, जैकी श्रॉफ और नाना पाटेकर ने अहम भूमिकाएं निभाईं। घरेलू हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दे को जिस गहराई और भावनात्मक प्रभाव के साथ इस फिल्म में पेश किया गया, उसने ना सिर्फ दर्शकों बल्कि समीक्षकों को भी झकझोर कर रख दिया।
‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ बनी कल्ट क्लासिक
साल 1997 में आई ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ ने अंडरवर्ल्ड और मानवीय संवेदनाओं के मेल को पर्दे पर अनूठे ढंग से उतारा। फिल्म में नाना पाटेकर और रवीना टंडन की जबरदस्त एक्टिंग और घोष की सधी हुई निर्देशन शैली ने इसे एक कल्ट स्टेटस दिलाया।
एक विरासत जो हमेशा जीवित रहेगी
पार्थो घोष की फिल्में केवल बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने सामाजिक विषयों पर जागरूकता फैलाने का काम भी किया। उनकी शैली, जिसमें यथार्थवाद और सिनेमाई आकर्षण का अद्भुत संतुलन था, आज भी आने वाले फिल्म निर्देशकों को प्रेरित करती है। उनकी फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हैं और यही उनका सच्चा सम्मान है। पार्थो घोष भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका सिनेमा हमेशा जिंदा रहेगा।
पार्थो घोष के निधन की खबर सुनकर फिल्म इंडस्ट्री से लेकर उनके फैंस तक हर कोई स्तब्ध है। अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता ने भावुक संदेश में लिखा, 'शब्दों से परे दुखी हूं। हमने एक महान प्रतिभा, दूरदर्शी निर्देशक और दयालु आत्मा को खो दिया है। पार्थो दा, आपकी बनाई फिल्मों की जादू हमेशा याद रहेगी।' सोशल मीडिया पर भी शोक संवेदनाएं उमड़ पड़ी हैं। कई कलाकारों और निर्देशकों ने उनके साथ बिताए पलों को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है।
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‘अग्नि साक्षी’ से मिली पहचान
साल 1996 में रिलीज हुई ‘अग्नि साक्षी’ पार्थो घोष के करियर का मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म में मनीषा कोइराला, जैकी श्रॉफ और नाना पाटेकर ने अहम भूमिकाएं निभाईं। घरेलू हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दे को जिस गहराई और भावनात्मक प्रभाव के साथ इस फिल्म में पेश किया गया, उसने ना सिर्फ दर्शकों बल्कि समीक्षकों को भी झकझोर कर रख दिया।
‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ बनी कल्ट क्लासिक
साल 1997 में आई ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ ने अंडरवर्ल्ड और मानवीय संवेदनाओं के मेल को पर्दे पर अनूठे ढंग से उतारा। फिल्म में नाना पाटेकर और रवीना टंडन की जबरदस्त एक्टिंग और घोष की सधी हुई निर्देशन शैली ने इसे एक कल्ट स्टेटस दिलाया।
एक विरासत जो हमेशा जीवित रहेगी
पार्थो घोष की फिल्में केवल बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने सामाजिक विषयों पर जागरूकता फैलाने का काम भी किया। उनकी शैली, जिसमें यथार्थवाद और सिनेमाई आकर्षण का अद्भुत संतुलन था, आज भी आने वाले फिल्म निर्देशकों को प्रेरित करती है। उनकी फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हैं और यही उनका सच्चा सम्मान है। पार्थो घोष भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका सिनेमा हमेशा जिंदा रहेगा।