'इस्तीफा नहीं, कड़ी सजा मिले': राम मंदिर ट्रस्ट के फैसले पर विपक्ष का हमला, क्या बोली- आप-कांग्रेस-SP-शिवसेना?
ट्रस्ट की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हिंदू सनातनी को इस्तीफा नहीं, कड़ी सजा चाहिए। इस्तीफा लेकर उन्हें बचाने की कोशिश मत करो।
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अयोध्या के राम मंदिर चंदा विवाद में सोमवार को जहां ट्रस्ट की ओर से बैठक की गई। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मीडिया के सामने आकर बताया कि चंपत राय का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। इसके साथ ही अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी मंजूर किया गया है। ट्रस्ट की ओर से इस्तीफा मंजूर किए जाने के बाद विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिए। विपक्षी नेताओं ने कहा कि इस्तीफा स्वीकार कर बचाने की कोशिश हो रही है।
इतना बड़ा रैकेट वर्षों तक फलता-फूलता रहा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर करके राम मंदिर ट्रस्ट ने पूरी तरह यह स्वीकार कर लिया है कि पिछले एक महीने से देश को हिला देने वाली 'चंदा चोरी' की रिपोर्टें वाकई सत्य हैं। यह स्वागत योग्य खबर है कि प्रभु राम के पावन मंदिर से वे लोग हटाए जा रहे हैं जो वर्षों तक इसे लूटते रहे। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। हास्यास्पद बात यह है कि यह घोषणा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष द्वारा की गई- वही व्यक्ति जिस पर इसके वित्त की निगरानी, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और इसकी संपत्तियों की रक्षा करने का दायित्व होता है। वह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता, और न ही ट्रस्ट का कोई अन्य सदस्य इस दायित्व से किनारा कर सकता है, जिनकी देखरेख में इतना बड़ा रैकेट वर्षों तक फलता-फूलता रहा।'
कृष्णमोहन को महासचिव बनाए जाने पर भी सवाल
उन्होंने आगे लिखा, 'मूर्खता यहीं समाप्त नहीं होती। आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त कर दिया गया है, जबकि खुद उन पर इस घोटाले को दबाने में भूमिका के आरोप हैं। उन्हें बड़े दायित्व से पुरस्कृत करने के बजाय ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए था। देश टुकड़ों-टुकड़ों में इस्तीफे नहीं चाहता। उसे ट्रस्ट को पूरी तरह भंग करके उसका पुनर्गठन चाहिए। देश ट्रस्ट के हर सदस्य के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट-निगरानी में एक स्वतंत्र जांच चाहता है। जवाबदेही सिर्फ ट्रस्ट पर समाप्त नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री तक भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, जिन्होंने ट्रस्ट का गठन किया और उसके कई सदस्यों की नियुक्ति की। योगी आदित्यनाथ सरकार तक, जिसने वर्षों तक इस लूट और डकैती को प्रभावी जांच के बिना चलते रहने दिया और उस आरएसएस-वीएचपी माफिया की भी जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है, जिसने दशकों से करोड़ों भारतीयों की कीमत पर खुद को मालामाल करने के लिए भगवान राम के नाम का दोहन किया है।'
ट्रस्ट की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हिंदू सनातनी को इस्तीफा नहीं, कड़ी सजा चाहिए। इस्तीफा लेकर उन्हें बचाने की कोशिश मत करो।
शिवसेना ने भी साधा निशाना
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि खबरों के मुताबिक, अयोध्या में राम मंदिर के दो ट्रस्टियों के इस्तीफे को मंजूरी दे दी गई है। ऐसा लगता है कि यह फैसला दान और राशि में धोखाधड़ी के आरोपों की वजह से लिया गया है। लेकिन इस बात का क्या कि उन्हें भाजपा की केंद्र सरकार ने ही नियुक्त किया था? मंदिर में हुई चोरी के बारे में क्या, उस मंदिर को लूटने की हिम्मत और अपराध के बारे में क्या, जिस पर भाजपा का पिछले दो दशकों का पूरा अभियान टिका था?
उन्होंने आगे कहा कि हमें निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जरूरत है, जिसकी निगरानी या तो सुप्रीम कोर्ट करे या फिर वह किसी पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की देखरेख में हो। भाजपा हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकती।
सपा क्या बोली?
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि महंत नृत्य गोपाल दास ने लगभग 20 दिनों के बाद, जब मंदिर में कथित चोरी का मामला सामने आया और पूरा देश इसके बारे में जान गया, तब जाकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्हें तत्काल इस मामले पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी और यह मांग करनी चाहिए थी कि राम मंदिर ट्रस्ट में हुई कथित चोरी की जांच किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कराई जाए, ताकि असली दोषी जनता के सामने आ सकें।