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Bihar: प्रसव के दौरान मां-बच्चे की मौत; परिजनों के हंगामे पर भागे-भागे पहुंचे प्रभारी डॉक्टर,रेफर नाटक का आरोप

Fri, 29 Sep 2023 06:09 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Fri, 29 Sep 2023 06:09 PM IST
सार

Bihar News: मधेपुरी में सरकारी अस्पताल से गर्भवती महिला के प्रसव के कुछ घंटे बाद मां और बच्चे की मौत होने का मामला सामने आया है। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। साथ ही यह भी आरोप है कि मरीज की मौत के बाद उसे रेफर किया गया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट...।

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Mother and child died during delivery in Madhepura; then doctor in charge started referral drama
मामला सामने आने के बाद पीएचसी के बाहर लगी लोगों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के मधेपुरा सदर प्रखंड के पीएचसी में गुरुवार की रात गर्भवती महिला के प्रसव के कुछ ही घंटे बाद मां और बच्चे की मौत हो गई। मृतकों की पहचान मुरहो पंचायत वार्ड 7 निवासी विशेश्वर राम की बेटी सुचिता देवी (23) और उसके नवजात बच्चे के रूप में हुई है। मृतका के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।

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परिजनों ने बताया कि गुरुवार की सुबह करीब छह बजे उन्होंने मरीज को मुरहो पीएचसी में भर्ती करवाया। जहां अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीज की डिलीवरी नॉर्मल होने की बात बताई गई। वहीं, पर उसका इलाज शुरू किया गया। जब शाम को मरीज का प्रसव होना था तो ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर अशोक प्रसाद सिंह गायब थे। बिना डॉक्टर के ही मरीज का प्रसव कराया गया। मां और बच्चे करीब एक घंटे तक स्वस्थ थे। कुछ घंटे बाद ही मरीज समेत नवजात बच्चे की मौत हो गई। उसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ हंगामा शुरू कर दिया।
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परिजनों ने लगाया मौत के बाद रेफर करने का आरोप
मृतक के परिजनों ने अस्पताल कर्मियों के ऊपर मरीज की मौत के बाद उसे रेफर करने का आरोप लगाया। मरीज के चचेरे भाई चंदन कुमार ने कहा कि जब मरीज की मौत हो गई तो अस्पताल प्रशासन की ओर से हम लोगों से पर्चा छीन लिया गया और उसपर दोपहर के तीन बजे रेफर लिख दिया गया। वहीं, उन्होंने कहा कि चार बजे दोपहर के बाद से ही कोई भी डॉक्टर अस्पताल में ड्यूटी पर नहीं था।
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‘डॉक्टर पर कार्रवाई करने पर ऊपर से आ जाता है फोन’
घटना के कुछ घंटे बाद आनन-फानन में अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर अशोक कुमार यादव अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि मरीज अपना इलाज मधेपुरा जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में करवा रहे थे। उन्हें वहीं पर डिलीवरी करवानी चाहिए थी। लेकिन वह अस्पताल के पास थे तो मरीज को लेकर यहीं आ गए। उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर डॉ. विभा रानी थीं, लेकिन वह अनुपस्थित हैं। उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। डॉ. यादव ने ये भी कहा कि वह हमेशा सहरसा में रहती हैं। ड्यूटी पर कभी नहीं आतीं। जब भी कार्रवाई करने का प्रयास करते हैं तो ऊपर से फोन आ जाता है। इसलिए कुछ नहीं कर पाते हैं। जबकि रोस्टर के अनुसार डॉ. अशोक प्रसाद सिंह तैनात थे। वहीं, इस संबंध में जब सिविल सर्जन डॉक्टर मिथिलेश कुमार से बातचीत करना चाही तो उनका फोन नहीं उठ सका। दरअसल, इस अस्पताल में रात में कभी भी डॉक्टर उपस्थित नहीं रहते हैं। जब घटना हुई तो वहां पर न ही कोई डॉक्टर, न ही प्रभारी और न ही अस्पताल के प्रबंधक मौजूद थे।


‘ड्यूटी पर रात को कभी नहीं रहते डॉक्टर
ग्रामीणों ने बताया कि पीएचसी में रात के समय कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर तैनात नहीं रहते हैं। करीब एक दशक से इस अस्पताल की यही स्थिति है। ग्रामीणों ने बताया कि इस अस्पताल में रात के समय कोई भी डॉक्टर नहीं रहते हैं, जिसका विरोध हम लोगों ने किया। लेकिन कोई कार्रवाई किसी भी डॉक्टर पर नहीं हुई। आज डॉक्टर ड्यूटी पर तैनात रहते तो शायद मरीज की जान बच पाती।

आखिरकर अस्पताल में हुई दो-दो मौत का जिम्मेदार कौन? ड्यूटी से गायब डॉक्टर, अस्पताल प्रशासन, सरकार या फिर चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था!

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