वहीं, गांव के एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रमोद की हत्या के समय उसका बेटा कुल 13 साल का था, जिस कारण मजबूत पैरवी व गवाहों के अभाव के चलते कुछ माह बाद ही जसवीर को रिहा कर दिया गया था, तभी से प्रमोद का बेटा पिता की हत्या का बदला लेने की फिराक में था, लेकिन उसे कभी मौका नहीं मिला। कई बार उसने पिता की हत्या का बदला लेने का प्रयास भी किया, लेकिन हर बार जसवीर बच जाता।
इस दौरान प्रमोद के बेटे ने छछरपुर गांव निवासी अपने एक दोस्त को पिता की हत्या की कहासुनी सुनाई और उसे जसवीर की हत्या करने की योजना में शामिल किया। उसने 12 साल का लंबा इंतजार किया और गत 29 नवंबर को जसवीर को उस समय गोलियों से भून दिया, जब वह गांव के बाहर शराब के ठेके के पास खड़ा हुआ था। प्रमोद के बेटे के सिर पर पिता की हत्या का बदला लेने का जनून सवार था। इसलिए उसने जसवीर को एक के बाद एक तीन गोलियां मारीं। एक गोली जसवीर के सीने में लगी और जसवीर लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गया। जिससे मृत समझकर आरोपी वहां से भाग निकला।