ईरान पर अमेरिका का फिर हमला: एयर डिफेंस सिस्टम को किया तबाह, कतर ने परमाणु वार्ता के लिए रखा नया प्रस्ताव
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बाद पश्चिम एशिया में कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। खाड़ी देशों के कई नेताओं ने क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए बातचीत की है।शुक्रवार को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कतर के रक्षा मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से बातचीत की।
विस्तार
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए सीमित सैन्य हमले किए हैं। इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम (हवाई रक्षा प्रणाली) को निशाना बनाया गया। ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को मामूली बताया और कहा कि ईरान ने हाल ही में एक नया एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम तैयार किया था, जिसे अमेरिकी सेना ने कुछ ही मिनटों में नष्ट कर दिया।
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित क़ेश्म द्वीप के सुजा इलाके में दो धमाकों की आवाज सुनी गई। ट्रंप ने शुक्रवार शाम फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच पहुंचने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान ने थोड़ा-बहुत एंटी-एयरक्राफ्ट उपकरण बनाया था, जिसे अमेरिकी सेना ने करीब पांच से 15 मिनट में तबाह कर दिया।
अमेरिकी चुनाव में हार के बाद पहली सैन्य कार्रवाई
शुक्रवार को किए गए ये हमले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी हार के बाद पहली सैन्य कार्रवाई हैं। मंगलवार को हुए चुनाव में पार्टी को बड़ा झटका लगा था। इसकी एक वजह ईरान के साथ जारी युद्ध और बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर मतदाताओं की नाराजगी भी मानी जा रही है।
चुनावी हार के बाद ट्रंप के बयानों में भी बदलाव देखने को मिला है। कभी उन्होंने ईरान को पूरी तरह तबाह करने की धमकी दी तो कभी युद्ध खत्म होने के करीब होने के संकेत दिए।
कतर ने ईरान के सामने रखा नया प्रस्ताव
एक तरफ अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। कतर के अधिकारियों के मुताबिक, ईरान अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद दूर करने के लिए पेश किए गए नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। कतर इस मामले में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, ईरान फिलहाल ट्रंप प्रशासन के साथ परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार नहीं है। तेहरान ने इसके लिए कुछ शर्तें रखी हैं, जिन्हें वह किसी भी युद्धविराम समझौते का हिस्सा बनाना चाहता है।
ईरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी बंदरगाह नाकेबंदी खत्म करना, आर्थिक प्रतिबंध हटाना, जब्त की गई संपत्तियां वापस करना, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देना और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई समेत पूरे क्षेत्र में संघर्ष समाप्त करना शामिल है।
दो दिन के समझौते से बातचीत का रास्ता निकालने की कोशिश
क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, कतर के मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के सामने एक संभावित अंतरिम समझौते का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत का रास्ता तैयार करना है।
प्रस्ताव के तहत पहले दो दिनों में विश्वास बहाली के कुछ कदम उठाए जाने हैं।
- पहला दिन: अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाएगा और ईरान की जब्त संपत्तियों में से कुछ अरब डॉलर जारी करेगा। इसके बदले ईरान अपनी उन परमाणु साइटों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को जाने की अनुमति देगा, जिन पर अमेरिका और इजरायल ने बमबारी की थी।
- दूसरा दिन: ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर सहमत होगा। इसके लिए ईरान और ओमान के बीच तैयार किए गए संशोधित समझौते के आधार पर व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।
यह व्यवस्था अस्थायी होगी। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक बातचीत शुरू होगी, जिसमें ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार और परमाणु कार्यक्रम के अन्य पहलुओं पर चर्चा होगी।