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ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका: चुनाव में हस्तक्षेप और मतपत्र रोकने पर कोर्ट की रोक, 20 हजार मतपत्रों पर था विवाद
Sun, 01 Nov 2026 05:29 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 01 Nov 2026 05:29 AM IST
सार
अमेरिका में संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को चुनाव अधिकारियों को धमकाने या मतपत्रों की प्रक्रिया रोकने के लिए दबाव बनाने से रोक दिया है। कैलिफोर्निया के करीब 20 हजार डाक मतपत्रों को लेकर विवाद के बीच आए इस अस्थायी आदेश से चुनावी प्रक्रिया में दखल के आरोपों पर नई बहस छिड़ गई है।
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कोर्ट का फैसला (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमेरिकी न्याय व्यवस्था में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है। एक संघीय न्यायाधीश ने आपातकालीन आदेश जारी करते हुए वर्तमान प्रशासन की उस आक्रामक कार्रवाई पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिसके तहत देश भर के चुनाव अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा था। अदालत के इस कड़े रुख से चुनावी प्रक्रिया में दखलंदाजी करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।
ट्रंप प्रशासन ने कैलिफोर्निया के अधिकारियों को 20,000 से अधिक डाक मतपत्रों को अलग रखने का आदेश दिया था। अदालत ने इसे असांविधानिक बताया और न्याय विभाग को अस्थायी रूप से रोक दिया कि वह चुनाव अधिकारियों को आपराधिक अभियोग की धमकी न दे। उत्तरी कैलिफोर्निया के सर्किट कोर्ट की न्यायाधीश त्रिना एल. थॉम्पसन ने एक कड़े शब्दों वाले अस्थायी रोक आदेश में, न्याय विभाग को यह आदेश दिया कि वह राज्य या स्थानीय चुनाव अधिकारियों या कर्मियों को धमकी, डराने या धमकाने की कोशिश न करें।
यह फैसला चुनाव कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले यूनियनों द्वारा दायर मुकदमे के जवाब में आया है। न्याय मंत्रालय और गृह विभाग अब किसी भी राज्य के चुनाव अधिकारियों पर मतपत्रों को अलग-थलग करने, मतदाता सूचियों से नाम हटाने या मतपत्रों की गिनती व प्रक्रिया को रोकने का दबाव नहीं बना पाएंगे।
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न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि प्रशासन इन एजेंसियों के माध्यम से चुनाव अधिकारियों को आपराधिक मुकदमों की धमकियां नहीं दे सकता। इसके अलावा, अधिकारियों को अपनी चुनाव प्रक्रिया बदलने के लिए धमकाने या डराने वाले किसी भी अन्य कदम पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
न्यायाधीश ने यह भी आदेश दिया है कि प्रशासन द्वारा तैयार की गई उन सूचियों से संबंधित यदि कोई भी तलाशी वारंट, भव्य जूरी समन या चुनाव सामग्री तक पहुंच बनाने की मांग की जाती है, तो इसकी पूर्व सूचना अदालत को देनी होगी।
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ट्रंप प्रशासन ने कैलिफोर्निया के अधिकारियों को 20,000 से अधिक डाक मतपत्रों को अलग रखने का आदेश दिया था। अदालत ने इसे असांविधानिक बताया और न्याय विभाग को अस्थायी रूप से रोक दिया कि वह चुनाव अधिकारियों को आपराधिक अभियोग की धमकी न दे। उत्तरी कैलिफोर्निया के सर्किट कोर्ट की न्यायाधीश त्रिना एल. थॉम्पसन ने एक कड़े शब्दों वाले अस्थायी रोक आदेश में, न्याय विभाग को यह आदेश दिया कि वह राज्य या स्थानीय चुनाव अधिकारियों या कर्मियों को धमकी, डराने या धमकाने की कोशिश न करें।
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यह फैसला चुनाव कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले यूनियनों द्वारा दायर मुकदमे के जवाब में आया है। न्याय मंत्रालय और गृह विभाग अब किसी भी राज्य के चुनाव अधिकारियों पर मतपत्रों को अलग-थलग करने, मतदाता सूचियों से नाम हटाने या मतपत्रों की गिनती व प्रक्रिया को रोकने का दबाव नहीं बना पाएंगे।
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न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि प्रशासन इन एजेंसियों के माध्यम से चुनाव अधिकारियों को आपराधिक मुकदमों की धमकियां नहीं दे सकता। इसके अलावा, अधिकारियों को अपनी चुनाव प्रक्रिया बदलने के लिए धमकाने या डराने वाले किसी भी अन्य कदम पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
न्यायाधीश ने यह भी आदेश दिया है कि प्रशासन द्वारा तैयार की गई उन सूचियों से संबंधित यदि कोई भी तलाशी वारंट, भव्य जूरी समन या चुनाव सामग्री तक पहुंच बनाने की मांग की जाती है, तो इसकी पूर्व सूचना अदालत को देनी होगी।