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Opposition rally deals a blow to Delhi traders; 80 percent of shops remained closed
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विपक्ष की रैली से दिल्ली के व्यापारियों को झटका, 80 फीसदी दुकानें रहीं बंद
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम
Published by: Bhaskar Tiwari
Updated Mon, 02 Nov 2026 01:24 AM IST
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दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित इंडिया गठबंधन की रैली का असर केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव राजधानी के व्यापारिक और आर्थिक कारोबार पर भी देखने को मिला। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने दावा किया है कि इस रैली के चलते दिल्ली के व्यापार को करीब 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। संगठन के मुताबिक, रैली के दिन राजधानी के लगभग 80 प्रतिशत बाजारों में दुकानें बंद रहीं। इससे न केवल रोजमर्रा के व्यापार पर असर पड़ा, बल्कि दिवाली से पहले होने वाली खरीदारी और बाजारों की व्यावसायिक गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित हुईं। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली का त्योहार नजदीक होने के कारण यह समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण था। ऐसे में बाजारों में ग्राहकों की कम आवाजाही और दुकानों के बंद रहने से व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि रैली के आयोजन से पहले करीब 10 लाख लोगों के दिल्ली पहुंचने की संभावना जताई गई थी। इसके अलावा अनुमान लगाया गया था कि रैली में शामिल होने के लिए 15 से 20 हजार वाहन राजधानी में प्रवेश करेंगे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने की आशंका को देखते हुए दिल्ली में कई दिनों से यातायात व्यवस्था, ट्रैफिक प्रतिबंधों और आवाजाही को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। इसका सीधा असर दिल्ली के व्यापारिक क्षेत्रों पर पड़ा। कई बाजारों में व्यापारियों और ग्राहकों को जाम तथा यातायात संबंधी परेशानियों का सामना करने की आशंका थी। इस वजह से बड़ी संख्या में लोगों ने बाजारों का रुख नहीं किया। व्यापारियों के अनुसार, रैली से पहले ही बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम होने लगी थी, जिसका असर कारोबार पर दिखाई दिया।
बृजेश गोयल के मुताबिक, सामान्य दिनों में दिल्ली के विभिन्न बाजारों में खरीदारी और व्यापारिक गतिविधियों के लिए रोजाना करीब 3 से 4 लाख लोग दूसरे शहरों और आसपास के इलाकों से आते हैं। इन ग्राहकों में खुदरा खरीदारों के साथ-साथ थोक व्यापारी और कारोबारी भी शामिल होते हैं। लेकिन रैली वाले दिन राजधानी के बाजारों में ग्राहकों की संख्या काफी कम रही। उन्होंने बताया कि रामलीला मैदान के आसपास स्थित 22 से 25 प्रमुख बाजारों में करीब 3 लाख दुकानें हैं। बाजार संघों से प्राप्त जानकारी के आधार पर अनुमान लगाया गया कि रैली वाले दिन शाम तक लगभग 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। यानी कुल दुकानों में से करीब 80 प्रतिशत दुकानों पर ताले लटके रहे। जो दुकानें खुली भी थीं, वहां ग्राहकों की संख्या बेहद कम होने के कारण कारोबार सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सका।
सीटीआई का दावा है कि बाजारों के बंद रहने और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने के कारण दिल्ली को लगभग 11,000 करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान हुआ। इस स्थिति ने खासतौर पर उन व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है, जो दिवाली से पहले बड़े स्तर पर बिक्री की उम्मीद लगाए बैठे थे। त्योहारों के मौसम में कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी, घरेलू सामान, सजावटी वस्तुओं और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में बाजारों में ग्राहकों की कमी व्यापारियों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। व्यापारिक संगठन का मानना है कि किसी भी बड़े राजनीतिक आयोजन के दौरान यातायात व्यवस्था और आम नागरिकों की आवाजाही को लेकर स्पष्ट योजना होनी चाहिए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों। हालांकि, 11,000 करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा सीटीआई का अनुमान और दावा है, न कि किसी सरकारी एजेंसी की ओर से प्रमाणित आर्थिक आकलन।
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