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Ayodhya News: मिट्टी और हुनर से गढ़ी जा रहीं मां की प्रतिमाएं
Mon, 06 Jul 2026 11:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 06 Jul 2026 11:16 PM IST
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देवकाली के नील गोदाम में बन रही मां दुर्गा की मूर्ति।
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जीतेश कांत पांडेय
अयोध्या। मिट्टी से सने हाथ, बांस और भूसे के ढांचे, चारों तरफ कतार में रखी अधूरी प्रतिमाएं और उन्हें आकार देने में जुटे कलाकार। अयोध्या में चार महीने पहले से ही शारदीय नवरात्र की आहट सुनाई देने लगी है। शहर के विभिन्न हिस्सों में मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम तेजी पकड़ चुका है। अभी इन प्रतिमाओं पर मिट्टी और हुनर की परतें चढ़ रही हैं। कुछ दिनों बाद यही प्रतिमाएं रंगों और सजावट से सजी हुई पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेंगी।
शहर के करीब 10 स्थानों पर प्रतिमा निर्माण का काम चल रहा है। शंकरगढ़ बाजार, रामलीला मैदान गली और देवकाली के तीन जगहों की कार्यशालाएं इन दिनों सबसे अधिक व्यस्त हैं। कहीं मिट्टी की परतें चढ़ाई जा रही हैं तो कहीं मां की आंखों और चेहरे के भावों को उकेरने का काम चल रहा है। देवकाली में कुछ प्रतिमाएं लगभग तैयार हो चुकी हैं और उनमें रंग भरने का काम शुरू हो गया है, जबकि अधिकतर प्रतिमाएं अभी निर्माण के दौर में हैं।
देवकाली स्थित नील गोदाम और तिराहा पर छोटी-बड़ी मिलाकर 500 से अधिक प्रतिमाएं आधे से ज्यादा आकार ले चुकी हैं। यहां कई वर्षों से बंगाल से आए कलाकार नवरात्र से पहले डेरा डालते हैं और महीनों तक प्रतिमा निर्माण में जुटे रहते हैं।
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नील गोदाम में प्रतिमाएं बना रहे उत्तम पाल ने बताया कि वह पिछले 30 वर्षों से अयोध्या आ रहे हैं। उनके साथ 18 लोग काम कर रहे हैं और सभी कोलकाता के रहने वाले हैं। बताया कि 5000 से लेकर 30 हजार रुपये तक की प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं और अभी तक करीब 50 ऑर्डर मिल चुके हैं। उनके अनुसार, हर सीजन में करीब 400 प्रतिमाएं बिक जाती हैं, जिससे तीन से चार लाख रुपये तक की बचत हो जाती है।
उत्तम पाल ने बताया कि अयोध्या के अलावा गोंडा, मनकापुर, नवाबगंज, सुल्तानपुर, बस्ती, अंबेडकरनगर और लखनऊ सीमा तक के लोग प्रतिमाएं खरीदने आते हैं। ऑर्डर मिलने पर बड़ी प्रतिमाएं भी तैयार की जाती हैं। वहीं, पास में काम कर रहे शिवकुमार पाल ने बताया कि उनके साथ आठ लोग काम कर रहे हैं और हर सीजन में 200 से अधिक प्रतिमाओं की बिक्री हो जाती है।
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अयोध्या। मिट्टी से सने हाथ, बांस और भूसे के ढांचे, चारों तरफ कतार में रखी अधूरी प्रतिमाएं और उन्हें आकार देने में जुटे कलाकार। अयोध्या में चार महीने पहले से ही शारदीय नवरात्र की आहट सुनाई देने लगी है। शहर के विभिन्न हिस्सों में मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम तेजी पकड़ चुका है। अभी इन प्रतिमाओं पर मिट्टी और हुनर की परतें चढ़ रही हैं। कुछ दिनों बाद यही प्रतिमाएं रंगों और सजावट से सजी हुई पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेंगी।
शहर के करीब 10 स्थानों पर प्रतिमा निर्माण का काम चल रहा है। शंकरगढ़ बाजार, रामलीला मैदान गली और देवकाली के तीन जगहों की कार्यशालाएं इन दिनों सबसे अधिक व्यस्त हैं। कहीं मिट्टी की परतें चढ़ाई जा रही हैं तो कहीं मां की आंखों और चेहरे के भावों को उकेरने का काम चल रहा है। देवकाली में कुछ प्रतिमाएं लगभग तैयार हो चुकी हैं और उनमें रंग भरने का काम शुरू हो गया है, जबकि अधिकतर प्रतिमाएं अभी निर्माण के दौर में हैं।
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देवकाली स्थित नील गोदाम और तिराहा पर छोटी-बड़ी मिलाकर 500 से अधिक प्रतिमाएं आधे से ज्यादा आकार ले चुकी हैं। यहां कई वर्षों से बंगाल से आए कलाकार नवरात्र से पहले डेरा डालते हैं और महीनों तक प्रतिमा निर्माण में जुटे रहते हैं।
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नील गोदाम में प्रतिमाएं बना रहे उत्तम पाल ने बताया कि वह पिछले 30 वर्षों से अयोध्या आ रहे हैं। उनके साथ 18 लोग काम कर रहे हैं और सभी कोलकाता के रहने वाले हैं। बताया कि 5000 से लेकर 30 हजार रुपये तक की प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं और अभी तक करीब 50 ऑर्डर मिल चुके हैं। उनके अनुसार, हर सीजन में करीब 400 प्रतिमाएं बिक जाती हैं, जिससे तीन से चार लाख रुपये तक की बचत हो जाती है।
उत्तम पाल ने बताया कि अयोध्या के अलावा गोंडा, मनकापुर, नवाबगंज, सुल्तानपुर, बस्ती, अंबेडकरनगर और लखनऊ सीमा तक के लोग प्रतिमाएं खरीदने आते हैं। ऑर्डर मिलने पर बड़ी प्रतिमाएं भी तैयार की जाती हैं। वहीं, पास में काम कर रहे शिवकुमार पाल ने बताया कि उनके साथ आठ लोग काम कर रहे हैं और हर सीजन में 200 से अधिक प्रतिमाओं की बिक्री हो जाती है।