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Rajasthan: आसाराम की अंतरिम जमानत पर सुनवाई, SC ने सरकार से मांगी स्वास्थ्य रिपोर्ट, अगली सुनवाई 21 जुलाई को
Fri, 17 Jul 2026 04:23 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Fri, 17 Jul 2026 04:23 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान सरकार को उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर उचित निर्देश लेकर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
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आसाराम की अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आध्यात्मिक गुरु आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजस्थान सरकार से उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर स्पष्ट निर्देश लेने को कहा। अदालत ने कहा- हम नहीं चाहते कि कोई अप्रिय घटना हो और बाद में किसी पर इसका दोष आए। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ को बताया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की रिपोर्ट के अनुसार आसाराम को जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गैस्ट्रो संबंधी समस्या के कारण कुछ रक्तस्राव हुआ है, जो फिलहाल अस्थायी प्रतीत होता है और उनका उपचार चल रहा है। राजस्थान सरकार 20 जुलाई तक इस संबंध में हलफनामा दाखिल करेगी।
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आसाराम की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि वे हाई-रिस्क मरीज हैं और स्वास्थ्य कारणों से उन्हें अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर समुचित जानकारी लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने यह भी बताया कि करीब तीन महीने पहले आसाराम अयोध्या और काशी विश्वनाथ की यात्रा पर गए थे और वहां पैदल चले थे।
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इससे पहले 30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से आसाराम की उस याचिका पर जवाब मांगा था, जिसमें उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया था कि अब तक दी जा रही चिकित्सकीय सुविधाएं जारी रहें और यदि स्वास्थ्य स्थिति अचानक बिगड़ती है तो तत्काल सुनवाई के लिए याचिका का उल्लेख किया जा सकता है।
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 मई को 2013 के नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी थी। हालांकि सामूहिक दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न से जुड़े कुछ आरोपों से उन्हें बरी कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने दुष्कर्म, अवैध बंधक बनाने, मानव तस्करी, आपराधिक धमकी, महिला की मर्यादा का अपमान, यौन उत्पीड़न, पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। आसाराम को 25 अप्रैल 2018 को अपने आश्रम में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।