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अहोई अष्टमी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और तारों को अर्घ्य देने का समय, इन गलतियों से रहें दूर

Sun, 01 Nov 2026 09:20 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला
धर्म डेस्क, अमरउजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 01 Nov 2026 09:20 AM IST
सार

अहोई अष्टमी 2026 का व्रत आज 1 नवंबर को रखा जा रहा है। जानें अहोई माता की पूजा का शुभ मुहूर्त, तारों को अर्घ्य देने का समय, पूजा विधि और व्रत के जरूरी नियम।

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Ahoi Ashtami 2026 Know Puja Muhurat, Star Arghya Timings and Important Vrat Rules in hindi
अहोई अष्टमी व्रत-नियम - फोटो : अमर उजाला

अहोई अष्टमी का व्रत आज यानी 1 नवंबर को रखा जा रहा है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए अहोई माता की पूजा करती हैं। शाम को शुभ मुहूर्त में पूजा करने और तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत में कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी होता है। आइए जानते हैं अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ समय, तारों को अर्घ्य देने का मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किन गलतियों से बचना चाहिए।

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अहोई अष्टमी 2026 - फोटो : AI

अहोई अष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा। उदया तिथि और व्रत की परंपरा के अनुसार 1 नवंबर को अहोई अष्टमी मनाई जा रही है। इस दिन शाम के समय अहोई माता की पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा के लिए लगभग 1 घंटा 18 मिनट का समय प्राप्त होगा।

  • अहोई अष्टमी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर, दोपहर 2:51 बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 2 नवंबर, दोपहर 1:10 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक
  • तारों को अर्घ्य देने का समय: शाम करीब 6 बजे
  • चंद्रोदय का समय: रात करीब 11:40 बजे
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अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य

अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य कब दें?
अहोई अष्टमी के व्रत में तारों का विशेष महत्व है। माताएं दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को आसमान में तारे दिखाई देने पर उन्हें अर्घ्य देती हैं। इसके लिए जल से भरे पात्र का इस्तेमाल किया जाता है। तारों को अर्घ्य देते समय संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाती है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और तारों के दिखाई देने का समय अलग हो सकता है। इसलिए अपने स्थानीय समय के अनुसार तारों के दर्शन करके अर्घ्य देना चाहिए। कुछ परिवारों में अहोई अष्टमी पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी परंपरा है।

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अहोई अष्टमी की पूजा कैसे करें - फोटो : विजेथुआ महावीरन धाम में वाल्मीकि रामायण की कथा सुनाते प्रवाचक स्वामी रामभद्राचार्य

अहोई अष्टमी की पूजा कैसे करें?

  • अहोई अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद अहोई माता का स्मरण करते हुए संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखने का संकल्प लें। अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहारी व्रत रखें।
  • शाम के समय पूजा स्थल की सफाई करके दीवार पर गेरू से अहोई माता का चित्र बनाएं। उनके साथ स्याहू यानी साही और उसके बच्चों का चित्र भी बनाया जाता है। अगर दीवार पर चित्र बनाना संभव न हो तो अहोई माता का कैलेंडर या तस्वीर भी स्थापित कर सकते हैं।
  • पूजा स्थल पर चौक बनाएं और जल से भरा कलश स्थापित करें। इसके पास अनाज से भरी कटोरी रखें। इसके बाद अहोई माता को रोली, अक्षत, हल्दी और फूल अर्पित करें।
  • अहोई माता की पूजा में दूध-भात, हलवा, पूरी, सिंघाड़े, फल और मिठाइयों का भोग लगाने की परंपरा है। पूजा के दौरान माता से संतान की खुशहाली और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
  • पूजा के समय हाथ में गेहूं या चावल के दाने लेकर अहोई माता की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। धार्मिक मान्यता है कि कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। कुछ परिवारों में स्याहू की माला धारण करने की भी परंपरा है।
  • शाम को तारे दिखाई देने पर जल से अर्घ्य दें। इसके बाद अहोई माता का ध्यान करके संतान के मंगलमय जीवन की कामना करें। फिर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।
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अहोई अष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां - फोटो : अमर उजाला

अहोई अष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां

  • अहोई अष्टमी के दिन सुई, चाकू, कैंची और खुरपी जैसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल करने से बचने की परंपरा है। कुछ मान्यताओं में इस दिन मिट्टी खोदने और सब्जियां काटने से भी परहेज किया जाता है।
  • पूजा के दौरान काले और गहरे नीले रंग के कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता है। इस दिन लाल, पीले, गुलाबी और नारंगी जैसे रंगों के वस्त्र पहनने की परंपरा है।
  • व्रत के दिन प्याज, लहसुन और मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही अपनी व्रत परंपरा के अनुसार अनाज और साधारण नमक से भी परहेज किया जाता है।
  • अहोई माता की पूजा में व्रत कथा सुनने का विशेष महत्व है। इसलिए पूजा के दौरान कथा जरूर पढ़ें या सुनें। इसके बाद माता से संतान की सुख-समृद्धि की कामना करें।
  • व्रत के दिन मन को शांत रखने और किसी से कटु वचन न बोलने की सलाह दी जाती है। घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखें और श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
  • तारों को अर्घ्य देने के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पात्र का इस्तेमाल करें। तारे दिखाई देने के बाद ही अर्घ्य अर्पित करें।
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