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एक एकड़ खेत, पत्नी के नाम दो करोड़ का मकान... 50 चुनाव लड़ चुके कांते सयन्ना ने एमपी से लिया राज्यसभा का फॉर्म
Sat, 31 Oct 2026 06:36 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 31 Oct 2026 06:36 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के राज्यसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी हरदीप सिंह पुरी के नामांकन के बीच 50 से ज्यादा चुनाव लड़ चुके कांते सयन्ना ने भी दावेदारी की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने विधानसभा से नामांकन फॉर्म लिया है, हालांकि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने के लिए उन्हें 10 विधायकों के प्रस्तावकों की जरूरत होगी।
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कांते सयन्ना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा के उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी के नामांकन के बीच एक और नाम चर्चा में आ गया है। देश के अलग-अलग राज्यों में 50 से अधिक चुनाव लड़ चुके 48 वर्षीय कांते सयन्ना ने भी मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने विधानसभा से नामांकन फॉर्म लिया है। मूलत: तेलंगाना के रहने वाले सयन्ना ओसमानिया यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में एमए किया हैं। वह बिजनेस करते हैं। उनके पास एक एकड़ खेत है। वहीं, ढाई लाख रुपए कीमत की एक कार और तीस हजार रुपए नगद हैं। वहीं, उनकी पत्नी के पास तीस हजार रुपए नगद, साढ़े पांच तोला सोना और एक आवासीय भवन है, जिसकी कीमत दो करोड़ रुपए हैं।
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उपराष्ट्रपति पद के लिए भी कर चुके है दावेदारी
सयन्ना इससे पहले उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं। चुनावी मैदान में लगातार उतरने वाले सयन्ना का कहना है कि उनका मकसद केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि आम लोगों को उनके अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के प्रति जागरूक करना है। उनका दावा है कि अब तक वह 10 से अधिक राज्यों में विधानसभा, लोकसभा सहित विभिन्न चुनावों में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। चुनाव लड़ने का खर्च भी वह खुद उठाते हैं और किसी राजनीतिक दल पर निर्भर नहीं रहते। एक मीडिया बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में आम नागरिकों से जुड़े कई बुनियादी मुद्दे हैं, जिन पर जागरूकता जरूरी है। लोग उनके चुनाव लड़ने पर सवाल उठाते हैं और मजाक भी बनाते हैं, लेकिन इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता। उनका कहना है कि वह अपना काम करते रहेंगे और परिणाम की चिंता नहीं करते।
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10 विधायकों के समर्थन की दरकार
राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने के लिए सयन्ना के सामने प्रस्तावकों की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती है। चुनावी नियमों के अनुसार निर्दलीय प्रत्याशी के नामांकन के लिए कम से कम 10 निर्वाचकों का प्रस्तावक होना जरूरी है। मध्यप्रदेश में इसके लिए उन्हें विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। सयन्ना का कहना है कि वह इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि प्रस्तावकों का समर्थन मिल सकता है। उनका मानना है कि लोकतंत्र में आम नागरिकों की भागीदारी बढ़नी चाहिए और चुनाव केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। फिलहाल उनका फॉर्म लेना चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, फॉर्म लेना और विधिवत नामांकन दाखिल करना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। उनकी उम्मीदवारी प्रस्तावकों की आवश्यक शर्त पूरी होने और नामांकन पत्र स्वीकार होने पर निर्भर करेगी।
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उपराष्ट्रपति पद के लिए भी कर चुके है दावेदारी
सयन्ना इससे पहले उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में भी अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं। चुनावी मैदान में लगातार उतरने वाले सयन्ना का कहना है कि उनका मकसद केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि आम लोगों को उनके अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के प्रति जागरूक करना है। उनका दावा है कि अब तक वह 10 से अधिक राज्यों में विधानसभा, लोकसभा सहित विभिन्न चुनावों में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। चुनाव लड़ने का खर्च भी वह खुद उठाते हैं और किसी राजनीतिक दल पर निर्भर नहीं रहते। एक मीडिया बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में आम नागरिकों से जुड़े कई बुनियादी मुद्दे हैं, जिन पर जागरूकता जरूरी है। लोग उनके चुनाव लड़ने पर सवाल उठाते हैं और मजाक भी बनाते हैं, लेकिन इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता। उनका कहना है कि वह अपना काम करते रहेंगे और परिणाम की चिंता नहीं करते।
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10 विधायकों के समर्थन की दरकार
राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने के लिए सयन्ना के सामने प्रस्तावकों की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती है। चुनावी नियमों के अनुसार निर्दलीय प्रत्याशी के नामांकन के लिए कम से कम 10 निर्वाचकों का प्रस्तावक होना जरूरी है। मध्यप्रदेश में इसके लिए उन्हें विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। सयन्ना का कहना है कि वह इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि प्रस्तावकों का समर्थन मिल सकता है। उनका मानना है कि लोकतंत्र में आम नागरिकों की भागीदारी बढ़नी चाहिए और चुनाव केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। फिलहाल उनका फॉर्म लेना चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, फॉर्म लेना और विधिवत नामांकन दाखिल करना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। उनकी उम्मीदवारी प्रस्तावकों की आवश्यक शर्त पूरी होने और नामांकन पत्र स्वीकार होने पर निर्भर करेगी।
