यूपी: डॉन बबलू श्रीवास्तव एक मामले में हुए बरी, लेकिन आसान नहीं जेल से बाहर आना, दया याचिका हो चुकी है खारिज
माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव को लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने करीब 20 साल पुराने अपहरण मामले में बरी कर दिया है। हालांकि, उनकी जेल से रिहाई फिलहाल संभव नहीं है। कस्टम कलेक्टर एलडी अरोड़ा हत्याकांड में उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी और राज्यपाल उनकी दया याचिका खारिज कर चुके हैं।
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माफिया डॉन ओम प्रकाश उर्फ बबलू श्रीवास्तव को करीब 20 साल पुराने अपहरण के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। 6 नवंबर को लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने बबलू श्रीवास्तव को इस मामले में बरी कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव के खिलाफ मुकदमे में भले ही हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है लेकिन उनका जेल से बाहर आना फिलहाल मुमकिन नहीं है। बबलू पहले से सजायाफ्ता है। 6 नवंबर 2024 में राज्यपाल द्वारा उसकी दया याचिका को खारिज किया जा चुका है।
बता दें कि 24 मार्च 1993 में बबलू श्रीवास्तव ने प्रयागराज में अपने गुर्गों के साथ कस्टम कलक्टर एलडी अरोड़ा की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड के बाद बबलू पर टाडा लगाया गया था जिसके बाद 30 सितंबर 2008 को कानपुर नगर स्थित कोर्ट ने बबलू को उम्र कैद की सजा सुनाई थी।
वहीं 25 जनवरी 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को यथावत रखा था। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दया याचिका पर राज्य सरकार ने विचार करने को कहा था। राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया था कि बबलू श्रीवास्तव की दया याचिका को खारिज किया जा चुका है।
उसके साथी मंगेश व कमल किशोर सैनी की दया याचिका भी खारिज कर दी गई थी। बता दें कि वर्तमान में बबलू बरेली सेंट्रल जेल में बंद है। इससे पहले प्रयागराज के पंकज महिंद्रा अपहरण कांड से भी बबलू बरी हुआ था लेकिन उसकी जेल से रिहाई नहीं हो पाई थी।