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राम मंदिर मामले पर एसआईटी रिपोर्ट : टिन्नू ने गबन करने के लिए मनीष को रखवाया, इस तरह रचा गया पूरा कांड

Mon, 06 Jul 2026 10:58 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Mon, 06 Jul 2026 10:58 PM IST
सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट में उन सभी पहलुओं का खुलासा हुआ है जिनकी चूक से राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को अंजाम दिया गया। वहीं, सीसीटीवी सिर्फ 45 दिनों की होने के कारण इसके पहले क्या हुआ कुछ पता नहीं चल सका।

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SIT report on the Ram Mandir case: Tinnu had Manish hired to commit embezzlement
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी की एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू मंदिर परिसर के विभिन्न स्थानों पर स्थित हुंडियों की चाबियां ट्रस्ट के प्रतिनिधि के रूप में अपने पास रखते थे। जबकि इसका कोई औपचारिक अधिकार जारी नहीं किया गया था। यही नहीं, गबन के लिए ही उसने अपने भतीजे मनीष यादव को वहां पर नौकरी दिलवाई थी। मुख्य रूप से उसकी ड्यूटी गणना में लगवाई जाती थी। वहीं गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की जिम्मेदारी तय की गई, क्योंकि उनकी मौजूदगी में रकम पार हुई। इसलिए उन पर केस भी दर्ज किया गया।

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27 अप्रैल 2026 से पहले कब-कब चोरी हुई... नहीं पता
एसआईटी रिपोर्ट के पहले ही बिंदु पर बताया गया है कि आरोपी नोटों की गड्डियां पार करते थे। जो सीसीटीवी मिले, उसके मुताबिक 45 दिनों में 70 बार वह चोरी करते कैद हुए। जांच के दौरान 27 अप्रैल 2026 से लेकर इधर 45 दिनों के ही सीसीटीवी फुटेज एसआईटी को मिले हैं। इसलिए यह पता नहीं चल सका कि उसके पहले कब-कब चोरी की गई। शायद अब यह पता भी नहीं चल पाएगा। एसआईटी ने स्पष्ट लिखा है कि फुटेज सीमित समय का मिला है, लिहाजा चोरी की घटनाओं व वास्तविक गबन का आकलन नहीं हो पाया है।
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एसआईटी रिपोर्ट के अन्य प्रमुख बिंदु
- अपराध इसलिए हुआ क्योंकि निर्धारित सुरक्षा उपायों का अनुपालन नहीं किया गया। प्रवेश, तलाशी, निर्धारित वेशभूषा, निजी वस्तुओं पर नियंत्रण, हुंडीवार गणना, मूल्यवर्गवार अभिलेखीकरण व प्रभावी पर्यवेक्षण जैसी व्यवस्थाएं लागू नहीं थीं। ट्रस्ट और बैंक से संबंधित पर्यवेक्षकों/प्रतिनिधियों की उपस्थिति के बावजूद निर्धारित सुरक्षा उपाय प्रभावी रूप से लागू नहीं किए गए।


- गणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था थी। यदि सीसीटीवी फुटेज को ट्रस्ट द्वारा नियुक्त कार्मिक गणना के समय सतर्क होकर देखते रहते, तो इस प्रकार की घटना घटित ही नहीं होती। नकदी गणना का कार्य एक संवेदनशील कार्य है। इसके लिए मात्र 45 दिन की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखना उचित नहीं था। 180 दिन की सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित रखने का सुझाव दिया गया था, जिसका अनुपालन नहीं किया गया।

- बैंक के अधिकारियों द्वारा गणना कार्मिकों को निर्धारित वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई गई। बैंक के प्रतिनिधि भी गणना कार्य के दौरान उपस्थित रहते थे। गणना प्रक्रिया में शामिल कार्मिकों की देख-रेख की जिम्मेदारी बैंक की थी। बैंक अधिकारियों का मासिक अंतराल में रोटेशन भी प्रावधानित था। लेकिन किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया।

- यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। जांच अभी प्रचलित है। पर्यवेक्षणीय विफलताएं, प्रशासनिक उत्तरदायित्व, संस्थागत खामियां तथा सुधारात्मक सुझाव के संबंध में विस्तृत आख्या अंतिम रिपोर्ट में शामिल की जाएगी।

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