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Jammu News: अनुशासन और एकजुटता का संदेश लेकर निकले स्वयंसेवक, जेयू में पथ संचलन
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जम्मू विश्वविद्यालय में आयोजित पथ संचलन कार्यक्रम में भाग लेते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयं
- फोटो : samvad
- पूर्व मेजर जनरल संजीव डोगरा रहे मुख्य अतिथि, विजयदशमी पर हुआ आयोजन
- युवाओं से अनुशासन, सेवा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जम्मू विश्वविद्यालय (जेयू) के परिसर में शुक्रवार को पथ संचलन कार्यक्रम किया। इसमें 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने अनुशासन, एकता और समर्पण का परिचय दिया। कार्यक्रम में पूर्व मेजर जनरल संजीव डोगरा मुख्य अतिथि रहे।
मुख्य वक्ता प्रांत सह संघचालक डॉ. विक्रांत शर्मा ने युवाओं से जीवन में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने नवरात्रों के महत्व और विजयदशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा के बारे में भी बताया।
संजीव डोगरा ने सेना में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारतीय सेना में भी विजयदशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि संघ के कार्यक्रम में शस्त्र के साथ शास्त्र का भी महत्व है। शस्त्र के साथ शास्त्र का ज्ञान होने से शक्ति के उपयोग पर नियंत्रण बना रहता है। शास्त्र के बिना शस्त्रों का उपयोग परिस्थितियों को अनियंत्रित कर सकता है।
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उन्होंने फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल सहित कुछ देशों के हालात का उदाहरण देते हुए युवाओं को शिक्षा के साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि युवाओं की जिम्मेदारी और जागरूकता से ही समाज और देश का सशक्त निर्माण संभव है।
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- युवाओं से अनुशासन, सेवा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जम्मू विश्वविद्यालय (जेयू) के परिसर में शुक्रवार को पथ संचलन कार्यक्रम किया। इसमें 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने अनुशासन, एकता और समर्पण का परिचय दिया। कार्यक्रम में पूर्व मेजर जनरल संजीव डोगरा मुख्य अतिथि रहे।
मुख्य वक्ता प्रांत सह संघचालक डॉ. विक्रांत शर्मा ने युवाओं से जीवन में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने नवरात्रों के महत्व और विजयदशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा के बारे में भी बताया।
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संजीव डोगरा ने सेना में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारतीय सेना में भी विजयदशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि संघ के कार्यक्रम में शस्त्र के साथ शास्त्र का भी महत्व है। शस्त्र के साथ शास्त्र का ज्ञान होने से शक्ति के उपयोग पर नियंत्रण बना रहता है। शास्त्र के बिना शस्त्रों का उपयोग परिस्थितियों को अनियंत्रित कर सकता है।
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उन्होंने फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल सहित कुछ देशों के हालात का उदाहरण देते हुए युवाओं को शिक्षा के साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि युवाओं की जिम्मेदारी और जागरूकता से ही समाज और देश का सशक्त निर्माण संभव है।