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Una News: उद्योगपतियों से 1.15 करोड़ हाउस टैक्स वसूलना नई नगर परिषद के लिए चुनौती
Mon, 02 Nov 2026 07:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 02 Nov 2026 07:09 AM IST
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दोहरे कर का हवाला देकर भुगतान से कतरा रहे उद्यमी, वर्षों से उलझा है मामला
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)। मैहतपुर नगर परिषद और औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपतियों के बीच हाउस टैक्स को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब भी सुलझ नहीं पाया है। नगर परिषद की नई टीम के सामने अब उद्योगपतियों से करीब 1.15 करोड़ रुपये का बकाया हाउस टैक्स वसूलना बड़ी चुनौती होगी। इस विवाद के समाधान के लिए अब तक किसी भी राज्य सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई है। यही वजह है कि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े हुए हैं।
नगर परिषद का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा वार्ड नंबर एक में आता है। ऐसे में उद्योगपतियों को हाउस टैक्स नगर परिषद में जमा करवाना चाहिए। वहीं, उद्योगपतियों का तर्क है कि वे औद्योगिक क्षेत्र के रखरखाव, साफ-सफाई और अन्य विकास कार्यों के लिए इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट एजेंसी (आईएडीए) को पहले ही टैक्स दे रहे हैं। ऐसे में वे दोहरा टैक्स नहीं चुकाएंगे।
लंबे समय से जारी इस विवाद के बीच उद्योगपतियों की ओर करीब एक करोड़ 15 लाख 56 हजार रुपये का हाउस टैक्स बकाया है। नगर परिषद के सूत्रों के अनुसार वार्ड नंबर एक के उद्योगपतियों को नोटिस जारी कर बकाया जमा करवाने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन कई उद्यमी अब भी भुगतान नहीं कर रहे हैं। हालांकि, चुनाव लड़ने या अन्य कार्यों के लिए नगर परिषद से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेने के दौरान कुछ उद्योगपति बकाया हाउस टैक्स जमा करवाते हैं। इस मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच कागजी कार्रवाई जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
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नगर परिषद में हाउस टैक्स लगाने की प्रक्रिया वर्ष 1999-2000 में शुरू हुई थी। इसके तहत नगर परिषद के दायरे में आने वाले नागरिकों से उनके भवन के कवर क्षेत्रफल के आधार पर हाउस टैक्स लिया जाता है।
स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपतियों बलतेजिंदर सिंह, सीएस कपूर, बलराम चंदेल और सीआर कौशल सहित अन्य उद्यमियों का कहना है कि सरकार को हाउस टैक्स वसूली की एक ही व्यवस्था लागू करनी चाहिए। उनका तर्क है कि एक ओर वे आईएडीए को टैक्स दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद भी नोटिस भेजकर हाउस टैक्स जमा करवाने का दबाव बना रही है।
क्या कहती हैं नगर परिषद अध्यक्ष
नगर परिषद अध्यक्ष मीना कुमारी ने कहा कि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा। वार्ड नंबर एक से लंबे समय से हाउस टैक्स जमा नहीं हो रहा है। नगर परिषद की ओर से संबंधित उद्योगपतियों को हर साल नोटिस भेजकर बकाया जमा करवाने की अपील की जाती है।
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एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)। मैहतपुर नगर परिषद और औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपतियों के बीच हाउस टैक्स को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब भी सुलझ नहीं पाया है। नगर परिषद की नई टीम के सामने अब उद्योगपतियों से करीब 1.15 करोड़ रुपये का बकाया हाउस टैक्स वसूलना बड़ी चुनौती होगी। इस विवाद के समाधान के लिए अब तक किसी भी राज्य सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई है। यही वजह है कि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े हुए हैं।
नगर परिषद का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा वार्ड नंबर एक में आता है। ऐसे में उद्योगपतियों को हाउस टैक्स नगर परिषद में जमा करवाना चाहिए। वहीं, उद्योगपतियों का तर्क है कि वे औद्योगिक क्षेत्र के रखरखाव, साफ-सफाई और अन्य विकास कार्यों के लिए इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट एजेंसी (आईएडीए) को पहले ही टैक्स दे रहे हैं। ऐसे में वे दोहरा टैक्स नहीं चुकाएंगे।
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लंबे समय से जारी इस विवाद के बीच उद्योगपतियों की ओर करीब एक करोड़ 15 लाख 56 हजार रुपये का हाउस टैक्स बकाया है। नगर परिषद के सूत्रों के अनुसार वार्ड नंबर एक के उद्योगपतियों को नोटिस जारी कर बकाया जमा करवाने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन कई उद्यमी अब भी भुगतान नहीं कर रहे हैं। हालांकि, चुनाव लड़ने या अन्य कार्यों के लिए नगर परिषद से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेने के दौरान कुछ उद्योगपति बकाया हाउस टैक्स जमा करवाते हैं। इस मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच कागजी कार्रवाई जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
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नगर परिषद में हाउस टैक्स लगाने की प्रक्रिया वर्ष 1999-2000 में शुरू हुई थी। इसके तहत नगर परिषद के दायरे में आने वाले नागरिकों से उनके भवन के कवर क्षेत्रफल के आधार पर हाउस टैक्स लिया जाता है।
स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपतियों बलतेजिंदर सिंह, सीएस कपूर, बलराम चंदेल और सीआर कौशल सहित अन्य उद्यमियों का कहना है कि सरकार को हाउस टैक्स वसूली की एक ही व्यवस्था लागू करनी चाहिए। उनका तर्क है कि एक ओर वे आईएडीए को टैक्स दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद भी नोटिस भेजकर हाउस टैक्स जमा करवाने का दबाव बना रही है।
क्या कहती हैं नगर परिषद अध्यक्ष
नगर परिषद अध्यक्ष मीना कुमारी ने कहा कि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा। वार्ड नंबर एक से लंबे समय से हाउस टैक्स जमा नहीं हो रहा है। नगर परिषद की ओर से संबंधित उद्योगपतियों को हर साल नोटिस भेजकर बकाया जमा करवाने की अपील की जाती है।