बदायूं। जिले की चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति किसी से छिपी हुई नहीं है। सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाओं की किल्लत बनी हुई है, तीन महीने से अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं है, अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी है। इस बीच शासन ने हर सप्ताह सीएचसी-पीएचसी स्तर पर आरोग्य मेलों का आयोजन का फरमान जारी कर दिया है। ये मेले दो फरवरी से शुरू होंगे, लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि इन अव्यवस्थाओं के बीच यह मेले कहां तक सफल हो पाएंगे।
इस संबंध में मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी की ओर से 25 दिसंबर को आदेश जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि आरोग्य मेलों का आयोजन चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग के साथ चिकित्सा शिक्षा और आयुष विभाग संयुक्त रूप से करेंगे। निर्देश दिया गया है कि मेलों के आयोजन के लिए जिला स्तर पर माइक्रोप्लान तैयार कर डीएम के अनुमोदन के बाद 31 दिसंबर से पहले शासन को उपलब्ध करा दिया जाए। दो फरवरी से जिले के सभी सीएचसी, पीएचसी और नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर आरोग्य मेलों का आयोजन किया जाना है। दवाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ संसाधनों की कमी के बीच मेलों के आयोजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग पशोपेश में है। हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि मेलों के आयोजन से पहले दवाओं की आपूर्ति की स्थिति में सुधार होगा।
आरोग्य मेला में ये सुविधाएं देने का फरमान
आरोग्य मेले में ओपीडी सेवाएं, टीबी, मलेरिया, डेंगू, दिमागी बुखार, कालाजार, डायरिया एवं कुष्ठ रोगी संबंधी आवश्यक जांच और उपचार, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुख स्तन और सर्वाइकल कैंसर, ईसीजी, हृदय रोग की स्क्रीनिंग आदि, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना अभियान की जानकारी, पात्र लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरण, गर्भावस्था और प्रसवकालीन परामर्श सेवाएं, संस्थागत प्रसव और एनीमिया संबंधी जागरूकता, नवजात शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा सेवा, टीकाकरण, परिवार नियोजन संबंधी सुविधाएं, बच्चों में डायरिया, निमोनिया, एनीमिया के उपचार समेत सभी आधारभूत जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने का फरमान जारी किया गया है।
साल भर का बजट यूपीएमएससी ने दबाया
जनपदों में यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन जरूरत की दवाएं नहीं दे पा रहा है। जिला स्तर पर सीएमओ के पास बजट नहीं है जो कि आरोग्य मेला में मरीजों की जांच के लिए दवाओं की खरीद कर सकें। सरकार ने साल भर की दवा खरीद के लिए 80 फीसदी बजट कारपोरेशन को जारी कर दिया है। सभी दवाओं आदि की आपूर्ति कार्पोरेशन को ही डिमांड के अनुसार करनी है, लेकिन वह आपूर्ति नहीं कर पा रहा। बिना डिमांड की दवाओं की आपूर्ति की जा रही है। दूसरे, तीसरे और चौथे तिमाही का जो 20 फीसदी बजट सीएमओ को मिलना था। वह भी नहीं दिया गया है।
सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाएं तो हैं ही नहीं
ग्रामीण इलाकों और मलिन बस्तियों में सबसे ज्यादा त्वचा रोग संबंधी बीमारियां होती हैं। इन क्षेत्रों में स्केबीज के मरीज काफी संख्या में आते हैं लेकिन कारपोरेशन आपूर्ति कर ही नहीं रहा। बार-बार डिमांड के बाद भी दर्द निवारक दवाओं के साथ एंटीबायोटिक दवाओं की आपूर्ति भी नहीं मिल रही है। लंबे समय से अस्पतालों को दर्द और सूजन में काम आने वाली एसिलोफेनिक और डिक्लोफेनिक टेबलेट की आपूर्ति नहीं की गई है। बच्चों की एंटीबायोटिक सीरप एमाक्सीसिलीन, दस्त का सीरप मेट्रोनिडाजाल नहीं है।
सीएचसी, पीएचसी और नागरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर दो फरवरी से प्रत्येक रविवार को आरोग्य स्वास्थ्य मेलों का आयोजन किया जाना है। इस संबंध में मुख्य सचिव का आदेश मिला है। 31 दिसंबर तक माइक्रोप्लान भेज दिया जाएगा। यूपीएमएससी दवाओं की सप्लाई नहीं कर पा रहा। जरूरी दवाओं की कमी बनी हुई है। इस बारे में भी शासन को लिखा जाएगा।
- डॉ. मंजीत सिंह, सीएमओ