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Budaun News: श्रिंकफ्लेशन...खान-पान के पैकेट के दाम वहीं, सिर्फ वजन घटा
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शहर में एक किराना स्टोर की दुकान पर रखा सामान। संवाद
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बदायूं। बाजार में महंगाई ने नया रूप ले लिया है। एफएमसीजी कंपनियों ने खान-पान से लेकर रोजमर्रा के सामानों के पैकेट में माल का वजन घटा दिया है, हालांकि दाम वही रखे हैं। इस ‘श्रिंकफ्लेशन’ से उपभोक्ताओं की जेब पर सीधी मार पड़ रही है। 10 रुपये में मिलने वाले बिस्किट का वजन कम कर दिया गया है। वहीं आधा किलो वाली नमकीन का वजन घटकर 400 ग्राम ही रह गया है।
व्यापारियों ने बताया कि ‘श्रिंकफ्लेशन’ का यह खेल रिफाइंड तेल से शुरू हुआ। इसके बाद सभी कंपनियों ने यही नीति अपनाकर ग्राहकों के साथ नई चाल शुरू कर दी। 30 रुपये के नमकीन के पैकेट में पहले 180 ग्राम नमकीन आती थी, जो अब 150 ग्राम रह गई है। वहीं 5 रुपये वाले चिप्स के पैकेट में भी हवा ज्यादा और माल कम मिल रहा है। सिर्फ स्नैक्स ही नहीं, तेल, साबुन, डिटर्जेंट, शैंपू, चाय-पत्ती तक के पैकेट में वजन कम कर दिया गया है।
एक लीटर रिफाइंड तेल का पैक अब 900 मिली की जगह 750 मिली का हो गया है, हालांकि दाम 150 रुपये ही लिखे हैं। वहीं सरसों के तेल के पाउच का वजन भी 900 से 750 मिली हो गया है। ग्राहक से दाम 170 रुपये ही लिए जा रहे हैं।
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दुकानदारों का कहना है कि कंपनियां कच्चे माल की कीमत बढ़ाने का हवाला देकर वजन घटा रही हैं। सीधे दाम बढ़ाने से बिक्री प्रभावित होती है, इसलिए पैकेट छोटा कर दिया जाता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि दाम बढ़ते तो पता चल जाता, लेकिन वजन घटने का पता तुरंत नहीं चलता। महीने का बजट बिगड़ रहा है। मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है।
श्रिंकफ्लेशन एक ऐसी व्यापारिक और आर्थिक रणनीति है, जिसमें कंपनियां अपने उत्पाद की कीमत (एमआरपी) को समान रखती हैं, लेकिन उस उत्पाद के आकार, वजन या मात्रा में कटौती कर देती हैं। इसे ''छिपी हुई मुद्रास्फीति'' भी कहा जाता है। - नवनीत गुप्ता, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल
-- -- -व्यापारी बोले- कंपनियां नहीं चाहतीं कि उनका ग्राहक टूटे-- --
कंपनियों का मानना है कि दाम बढ़ाने से उन्हें बिक्री प्रभावित होने का डर रहता है, इसलिए वह पैकेट बंद उत्पादों के दाम न बढ़ाकर वजन कम कर देती हैं, ताकि ग्राहक उनसे जुड़ा रहे। -विशाल गुप्ता
अब सभी कंपनियों की ओर से महंगाई बढ़ने के साथ ही उत्पादों का वजन कम कर यही तरीका अपनाया जाने लगा है, उत्पादों पर दाम न बढ़ाने वाले फार्मूले से ग्राहक भी उत्पाद खरीदते रहते हैं। - राजेश गुप्ता
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व्यापारियों ने बताया कि ‘श्रिंकफ्लेशन’ का यह खेल रिफाइंड तेल से शुरू हुआ। इसके बाद सभी कंपनियों ने यही नीति अपनाकर ग्राहकों के साथ नई चाल शुरू कर दी। 30 रुपये के नमकीन के पैकेट में पहले 180 ग्राम नमकीन आती थी, जो अब 150 ग्राम रह गई है। वहीं 5 रुपये वाले चिप्स के पैकेट में भी हवा ज्यादा और माल कम मिल रहा है। सिर्फ स्नैक्स ही नहीं, तेल, साबुन, डिटर्जेंट, शैंपू, चाय-पत्ती तक के पैकेट में वजन कम कर दिया गया है।
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एक लीटर रिफाइंड तेल का पैक अब 900 मिली की जगह 750 मिली का हो गया है, हालांकि दाम 150 रुपये ही लिखे हैं। वहीं सरसों के तेल के पाउच का वजन भी 900 से 750 मिली हो गया है। ग्राहक से दाम 170 रुपये ही लिए जा रहे हैं।
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दुकानदारों का कहना है कि कंपनियां कच्चे माल की कीमत बढ़ाने का हवाला देकर वजन घटा रही हैं। सीधे दाम बढ़ाने से बिक्री प्रभावित होती है, इसलिए पैकेट छोटा कर दिया जाता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि दाम बढ़ते तो पता चल जाता, लेकिन वजन घटने का पता तुरंत नहीं चलता। महीने का बजट बिगड़ रहा है। मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है।
श्रिंकफ्लेशन एक ऐसी व्यापारिक और आर्थिक रणनीति है, जिसमें कंपनियां अपने उत्पाद की कीमत (एमआरपी) को समान रखती हैं, लेकिन उस उत्पाद के आकार, वजन या मात्रा में कटौती कर देती हैं। इसे ''छिपी हुई मुद्रास्फीति'' भी कहा जाता है। - नवनीत गुप्ता, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल
कंपनियों का मानना है कि दाम बढ़ाने से उन्हें बिक्री प्रभावित होने का डर रहता है, इसलिए वह पैकेट बंद उत्पादों के दाम न बढ़ाकर वजन कम कर देती हैं, ताकि ग्राहक उनसे जुड़ा रहे। -विशाल गुप्ता
अब सभी कंपनियों की ओर से महंगाई बढ़ने के साथ ही उत्पादों का वजन कम कर यही तरीका अपनाया जाने लगा है, उत्पादों पर दाम न बढ़ाने वाले फार्मूले से ग्राहक भी उत्पाद खरीदते रहते हैं। - राजेश गुप्ता

शहर में एक किराना स्टोर की दुकान पर रखा सामान। संवाद

शहर में एक किराना स्टोर की दुकान पर रखा सामान। संवाद