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बरेठा घाट फोरलेन: NHAI ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई स्टे हटाने की गुहार, सभी वन्यजीव मंजूरियां पहले ही मिल चुकीं

Thu, 16 Jul 2026 10:55 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

Baretha Ghat Four Lane: बैतूल के बरेठा घाट फोरलेन प्रोजेक्ट को लेकर एनएचएआई ने सुप्रीम कोर्ट में स्टे हटाने के लिए एसएलपी दायर की है। परियोजना को वन्यजीव बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं, अब हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के बरेठा घाट फोरलेन निर्माण को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। एनएचएआई ने हाईकोर्ट के स्टे को हटाने के लिए विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है। फिलहाल 28 जुलाई को इस मामले में हाईकोर्ट में भी सुनवाई होनी है। प्राधिकरण का कहना है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप परियोजना के डिजाइन में बदलाव किए जा चुके हैं और वाइल्डलाइफ बोर्ड सहित केंद्र सरकार से सभी आवश्यक मंजूरियां भी मिल चुकी हैं। अब केवल हाईकोर्ट के स्टे हटने का इंतजार है।
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एनएचएआई के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग-46 (NH-46) के इटारसी-बैतूल मार्ग पर केसला रेंज, भौंरा रेंज और बरेठा घाट का करीब 20.91 किलोमीटर लंबा हिस्सा टाइगर कॉरिडोर क्षेत्र में आता है। इसी कारण अप्रैल 2022 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने परियोजना पर रोक लगाते हुए वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी वैधानिक अनुमोदन और संशोधित योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। प्राधिकरण का कहना है कि न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए परियोजना के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी जरूरी मंजूरियां प्राप्त कर ली गई हैं। अब जैसे ही हाईकोर्ट से स्टे हटाएगा, इस 20.91 किलोमीटर हिस्से में निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। 
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एनएचएआई के मुताबिक बरेठा घाट का मौजूदा दो लेन मार्ग सड़क सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। घुमावदार सड़क, कम चौड़ाई और भारी यातायात के कारण यहां अक्सर जाम और दुर्घटनाएं होती हैं। जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच इस मार्ग पर 51 सड़क हादसे दर्ज हुए, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और 62 लोग घायल हुए। नई योजना के तहत इस हिस्से को चार लेन में विकसित किया जाएगा। साथ ही तीन माइनर ब्रिज, 38 बॉक्स कलवर्ट, एक रेलवे अंडरब्रिज, दो रोड ओवरब्रिज और एक वाहन अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए 10 एनिमल अंडरपास और एक एनिमल ओवरपास भी बनाए जाएंगे। इसके अलावा क्रैश बैरियर, रंबल स्ट्रिप, नॉइज़ बैरियर और फेंसिंग जैसी सुरक्षा सुविधाएं भी परियोजना का हिस्सा होंगी।
 
 
 
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