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अयोध्या: चढ़ावा चोरी पर ट्रस्ट का एक्शन, SIT पर जताया भरोसा, कहा- कुछ लोग हिंदू आस्था को कमजोर कर रहे हैं

Mon, 06 Jul 2026 08:05 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

Ayodhya Ram Temple: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले सामने आने के बाद सोमवार को ट्रस्ट की लंबी बैठक हुई। इस बैठक के बाद ट्रस्ट ने बयान जारी किया है। 
 
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में चढ़ावा गणना में सामने आई अनियमितताओं पर गहन मंथन हुआ। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार कठोरतम कार्रवाई कराई जाएगी। बैठक में महामंत्री और एक न्यासी के त्यागपत्र, अंतरिम व्यवस्थाओं तथा हालिया घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई।

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बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में ट्रस्ट ने कहा कि दानपात्रों से प्राप्त राशि की गणना में अनियमितता सामने आने से सभी न्यासी आहत और चिंतित हैं। मामले की जानकारी मिलते ही ट्रस्ट ने प्रारंभिक तथ्य जुटाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया, जिसके बाद शासन ने तत्काल उच्चस्तरीय एसआईटी का गठन किया। ट्रस्ट ने कहा कि एसआईटी की प्रारंभिक जांच में आठ लोगों के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया और गिरफ्तारियां भी हुईं। अब पूरा मामला कानून के अनुसार आगे बढ़ रहा है। ट्रस्ट का स्पष्ट मत है कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

ट्रस्ट ने अपील की कि यदि किसी व्यक्ति, संस्था या पत्रकार के पास मंदिर से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक आरोप लगाने के बजाय सीधे एसआईटी या जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रमाणों के आधार पर कार्रवाई हो सके। बैठक में ट्रस्ट ने यह भी कहा कि कुछ लोग इस प्रकरण का उपयोग श्रीराम जन्मभूमि, रामलला मंदिर और हिंदू आस्था को कमजोर करने के लिए कर रहे हैं तथा बिना साक्ष्य के आरोप लगाकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और उनकी आस्था में कोई कमी नहीं आई है।
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ट्रस्ट ने अपने छह वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में भव्य राम मंदिर का निर्माण, मुख्य मंदिर और परकोटे के सभी मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण तथा श्रीराम यंत्र की स्थापना जैसे ऐतिहासिक कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए हैं।

31 मार्च तक रामलला को मिला 582 करोड़ का चढ़ावा

ट्रस्ट के अनुसार 31 मार्च 2026 तक रामलला को कुल 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ। इसमें से 391 करोड़ रुपये संचालन व्यय पर खर्च किए गए हैं। वहीं निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस दान से प्राप्त 3264 करोड़ रुपये में से 2370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण एवं पूंजीगत कार्यों पर व्यय किए जा चुके हैं। शेष राशि ट्रस्ट के बैंक खातों में सुरक्षित है। ट्रस्ट ने दावा किया कि वित्तीय विवरण समय-समय पर सार्वजनिक किए जाते रहे हैं।

कानून के अनुसार आगे बढ़ रहा पूरा मामला
ट्रस्ट ने कहा कि एसआईटी का कार्य केवल दोषियों की पहचान तक सीमित नहीं है। जांच दल यह भी सुझाव देगा कि ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में कौन-कौन से सुधार किए जाएं, जिससे चढ़ावा गणना और वित्तीय प्रबंधन की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी तथा जवाबदेह बन सके। ट्रस्ट ने दोहराया कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे। 
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चढ़ावा चोरी के तीन आरोपियों की मांगी गई पुलिस कस्टडी रिमांड

 राम मंदिर में चढ़ावा चोरी व गबन के मामले में विवेचक आशुतोष तिवारी ने तीन आरोपियों की सात दिन के लिए रिमांड की मांग की है। विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट में उन्होंने आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा व करुणेश पांडेय को पुलिस अभिरक्षा (कस्टडी) में देने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है।

विशेष अभियोजन अधिकारी ने रिमांड प्रार्थना पत्र के बिंदुओं पर अदालत को बताया कि जेल में निरुद्ध आरोपियों ने विवेचक को बयान दिए हैं, जिनमें नए तथ्य आए हैं। इनकी सत्यता की जांच के लिए आरोपियों को पुलिस कस्टडी में सात दिन का रिमांड दिया जाना आवश्यक है। वहीं, आरोपियों की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से नियुक्त लीगल एड डिफेंस काउंसिल डिप्टी चीफ ने कहा कि आज ही वह आरोपियों की ओर से पैरवी के लिए नियुक्त हुए हैं। इस पर अदालत ने रिमांड प्रार्थना पत्र सुनवाई के लिए मंगलवार की तारीख नियत की है।

शनिवार को मांगी थी बयान दर्ज करने की अनुमति
चढ़ावा चोरी मामले में विशेष अभियोजन अधिकारी के माध्यम से विवेचक ने जेल में निरुद्ध पांच आरोपियों से उनका बयान दर्ज करने के लिए शनिवार को अनुमति मांगी थी। इस पर कोर्ट ने जेल में जाकर बयान लेने के लिए अनुमति दी थी। दो जुलाई को विवेचक ने आरोपी अविनाश शुक्ला की 48 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी थी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अदालत के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा ने केवल 13 घंटे के लिए ही अनुमति दी थी। उस दौरान अविनाश के कब्जे से एक कार व कई आभूषण बरामद हुए थे। उसकी निशानदेही पर चढ़ावा चोरी की रकम के बंटवारे का स्थान भी चिह्नित किया गया था। सभी आरोपी 26 जून से जिला कारागार में निरुद्ध हैं।
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