जिनके गांधी पर व्याख्यान
उनके हाथों तीर-कमान। हे भगवान!!
बाप पूजता इनके पाँव
धन्य-धन्य ऐसी सन्तान। हे भगवान!!
हिटलर-नादिर जैसे लोग
बनते फिरते कृपानिधान। हे भगवान!!
मुख मुस्कान, पीठ पर...और पढ़ें
हमने हर शहर में उनकी तलाश की है,
कभी परिंदों से भी उनकी बात की है।
पहली मुलाकात में दिल लगाने की ये सजा है,
इस सज़ा की भी हमने वकालत की है।...और पढ़ें
सच का परचम
ये चंद लोग जो सच का परचम लिए फिरते हैं,
झूठ को सच बताने पे उतर आएँ तो क्या होगा?
जो लोग चराग़ से ख़ुद रोशनी लेकर,
उसी को बुझाने पे उतर आएँ तो क्या होगा?
जो हमें एक अल्फ़ाज़ भी सिखा...और पढ़ें
सीने से मेरे निकला भी क्या क्या दबा हुआ
जी खोल कर जीने का मन जब भी बना लिया
रोना न हो तो कैसे न हो बात कितनी साफ है
शीशे का हो कर भी आदमी है पत्थर बना हुआ
मुझको भी मिलें मंज़िल कुछ अलहदा,बुलंद
रखता है ख्वाहिश आदमी र...और पढ़ें
हम दीवाने हैं,दीवाने थे
कुछ दुनिया से अनजाने थे
क्या दाना देकर रोना था
ये पंछी तो उड़ जाने थे
वे सूरज,चांद का करते
दिन रात से जो बेगाने थे
थी एक शमां की चाह नहीं
वे मौत के जो परवाने थे
मस्ती कम...और पढ़ें
हम उसके न हुए, ये मुक़द्दर की बात थी,
शायद उसे चाहना भी हमारे इख़्तियार में न था।
ग़म तो उस शख़्स के किसी और का हो जाने का है,
जिसके सिवा सुकून के तसव्वुर में भी कोई और न था।
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हम उसके न हुए, ये मुक़द्दर की बात थी,
शायद उसे चाहना भी हमारे इख़्तियार में न था।
ग़म तो उस शख़्स का किसी और के हो जाने का है,
जिसके सिवा सुकून के तसव्वुर में भी कोई और न था।
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साथ हमारे खुशियाँ और ग़म चले जाएंगे
किस्से कहानी रह जाएंगे हम चले जाएंगे!
हमारी हर सोच से अलग है वज़ूद हमारा
हमारे साथ हमारे सारे भ्रम चले जाएअंगे!
-एन. आर. कस्वाँ
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जहाँ हजार कोशिश के बाद भी आपको समझा न जाए,
वहाँ अपनी खामोशी से, अपनी अनुपस्थिति दीजिए।
जहाँ आपकी बातों का कोई मोल ही न रहे,
वहाँ चुपचाप अपनी गैरमौजूदगी दर्ज कीजिए।
जहाँ गलती कोई और करे और इल्जाम आप पर मढ़ा जाए,
बिगड़त...और पढ़ें
तुम कहते थे कि, कुछ करो, कुछ नहीं मिला तोह शून्य सही, क्योंकि करने से शुरुवात ही सही।
तुम कहते थे कि, कुछ करो, कुछ नहीं मिला तोह शून्य सही, क्योंकि करने से शुरुवात ही सही,
अब तुम्हारे बिना, राह क्या देखे, क्या करे शुरुवात, क्या करे न कह...और पढ़ें