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राजस्थान: आईएएस पति के बाद आईपीएस पत्नी भी एपीओ, 40 विला-कॉटेज की खरीद में एसीबी जांच, गंभीर आरोप

Sat, 31 Oct 2026 04:28 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Sat, 31 Oct 2026 04:28 PM IST
सार

राजस्थान सरकार ने एसीबी जांच के बीच आईएएस शिखर अग्रवाल की पत्नी और आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर को एपीओ कर दिया। अग्रवाल पर 40 विला-कॉटेज की खरीद में अनियमितता और निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप हैं।

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Rajasthan: Following her IAS husband IPS wife also placed Awaiting Posting Orders news in hindi
प्रशाखा माथुर और शिखर अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान सरकार ने शनिवार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर को एपीओ कर दिया। उनके पति आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को भी कुछ दिन पहले इसी तरह की कार्रवाई के तहत एपीओ किया गया था। अग्रवाल पर 40 विला और कॉटेज की खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) जांच कर रहा है। 1995 बैच की आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर जयपुर में पुलिस महानिदेशक (अतिरिक्त) योजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण के पद पर कार्यरत थीं। 40 विला और कॉटेज में से कुछ उनके नाम पर भी पंजीकृत हैं। राज्य के कार्मिक विभाग की ओर से शनिवार को जारी आदेश के अनुसार, माथुर को प्रशासनिक कारणों से अगले आदेश तक एपीओ किया गया है।

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उनके पति शिखर अग्रवाल 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे और कई अन्य महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। संपत्ति के लेनदेन में उनके और उनके परिवार के सदस्यों की कथित संलिप्तता के आरोपों के बाद 28 अक्टूबर को उन्हें एपीओ कर दिया गया था। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत अग्रवाल के खिलाफ विस्तृत एसीबी जांच को भी मंजूरी दे दी है।

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एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने शुक्रवार को बताया था कि प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि अग्रवाल ने कथित तौर पर अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। एसीबी के अनुसार, अग्रवाल, उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों ने उदयपुर और अलवर जिलों में होटल और रिसॉर्ट संचालित करने वाली एक कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदे। आरोप है कि इन संपत्तियों की कीमत बाजार मूल्य से काफी कम थी।

ब्यूरो का आरोप है कि अग्रवाल ने रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में छूट दिलाने, प्रमाणपत्रों का उचित सत्यापन किए बिना मंजूरी दिलाने और कंपनी को विशेष रियायती वित्तीय पैकेज दिलाने में मदद की। एसीबी उन आरोपों की भी जांच कर रही है, जिनके अनुसार 27 मार्च को अग्रवाल के नाम पर 20 विला का पंजीकरण कराया गया था। इसी दिन राज्य के वित्त विभाग ने कंपनी को विशेष वित्तीय पैकेज देने का आदेश जारी किया था।

जांच में संपत्ति के लेनदेन, कंपनी को कथित तौर पर दिए गए लाभ और राज्य के राजस्व को हुए संभावित नुकसान की पड़ताल की जाएगी। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संपत्ति के लेनदेन की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल अधिकारियों को एपीओ कर देना पर्याप्त नहीं है।

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