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श्रीनगर: '370 हटने के बाद बदली जम्मू-कश्मीर की तस्वीर, अब आतंक नहीं शांति से तय होगा भविष्य', एलजी सिन्हा

Sun, 01 Nov 2026 12:50 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर
अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Sun, 01 Nov 2026 12:50 PM IST
सार

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने यूटी स्थापना दिवस समारोह में कहा कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद को दोबारा पनपने नहीं दिया जाएगा और संघर्ष के नाम पर मुनाफा कमाने वाले तत्व बेनकाब हो चुके हैं।

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There is no longer any place for those who plunged Jammu and Kashmir into the fires of separatism and terroris
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा - फोटो : @OfficeOfLGJandK

विस्तार

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कुछ तत्व अब भी जम्मू-कश्मीर को दोबारा अलगाववाद और आतंकवाद की हिंसा में धकेलना चाहते हैं, लेकिन संघर्ष के नाम पर मुनाफा कमाने वालों (कॉनफ्लिक्ट एंटरप्रेन्योर्स) के लिए अब यहां कोई जगह नहीं है। ऐसे तत्व बेनकाब हो चुके हैं और आम जनता भी उनके इरादों को समझने लगी है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद बने शांत माहौल से जम्मू-कश्मीर का भविष्य भयमुक्त हुआ है।

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प्रदेश का भविष्य अब आतंकवाद और अलगाववाद नहीं, बल्कि शांति, विश्वास और समान अवसरों पर आधारित होगा।सिन्हा शनिवार को श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में यूटी स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। अतीत की हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, पुरानी पीढ़ी के कई लोगों ने हालात से समझौता कर बदलाव की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन उनके जीवनकाल में ही जम्मू-कश्मीर की तस्वीर बदल गई। हालांकि, कुछ लोग प्रदेश में आई शांति, स्थिरता और प्रगति को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

उन्होंने कहा, आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती ताकत और वैश्विक पहचान को स्वीकार किया जा रहा है। सिन्हा ने कहा, जम्मू-कश्मीर की धरती पर आतंकवाद को दोबारा पनपने नहीं दिया जाएगा। सुरक्षा बल और पुलिस आतंकवाद के बचे-खुचे अंशों को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आतंकियों, उनके मददगार तंत्र और नार्को-टेररिज्म के खिलाफ कार्रवाई तेज की जाएगी। नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित काली कमाई से बनाई गई संपत्तियों को भी ध्वस्त किया जा रहा है।

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आम कश्मीरी अब ऐसे तत्वों के चेहरे पहचान चुका है
एलजी ने कहा, घाटी के आम नागरिक अब अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के इरादे समझ चुके हैं। सोशल मीडिया पर युवाओं की प्रतिक्रियाएं भी बताती हैं कि वे इन तत्वों के कारण हुए नुकसान से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं, लंदन और स्विट्जरलैंड में इनके घर हैं और वे ऐशो-आराम की जिंदगी जीते हैं, जबकि नुकसान आम कश्मीरी को उठाना पड़ा।

1947 से 2019 तक प्रदेश ने झेली भारी मानवीय पीड़ा
घाटी के दर्दनाक इतिहास का जिक्र करते हुए एलजी ने शेर पढ़ा, ''जुबां तो खोलो, नजर तो मिलाओ, मैं टूटा हूं, मुझे जवाब दो।'' उन्होंने कहा, 1947 से 2019 तक जम्मू-कश्मीर ने अशांति और आतंकवाद का दौर देखा। अनगिनत परिवारों ने अपनों को खोया और कश्मीरी पंडितों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा। अगस्त 2019 के सांविधानिक बदलाव राष्ट्रीय एकीकरण, समानता और समावेशी विकास की दिशा में ऐतिहासिक मोड़ साबित हुए।

हड़ताल और पथराव अतीत की बात, विकास ने पकड़ी रफ्तार 
सिन्हा ने कहा कभी आम जनजीवन को प्रभावित करने वाली हड़तालें और पथराव अब जम्मू-कश्मीर की पहचान नहीं हैं। आज का शांत माहौल बच्चों को भयमुक्त भविष्य दे रहा है। उन्होंने सड़क और सुरंग परियोजनाओं, शिक्षा एवं स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार, प्रशासनिक सुधारों और महिलाओं को मिले समान संपत्ति अधिकारों का उल्लेख किया। उन्होंने 2024 के विधानसभा चुनाव में भारी मतदान को लोकतंत्र में जनता के मजबूत विश्वास का प्रमाण बताया। साथ ही कहा कि प्रशासन का ध्यान रोजगार सृजन, स्टार्टअप को बढ़ावा देने, कृषि विविधीकरण और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर है।


कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित वापसी सामूहिक जिम्मेदारी 
उपराज्यपाल ने लोगों से नफरत छोड़कर शांति और प्रगति का रास्ता चुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि विविधता का सम्मान जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी ताकत है। विस्थापित कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी सामूहिक विवेक और नैतिक जिम्मेदारी की परीक्षा है। उन्होंने केंद्र सरकार के सहयोग और जनता की भागीदारी से जम्मू-कश्मीर को शांति, समृद्धि और विकास का नया केंद्र बनाने का विश्वास जताया।

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