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सुख-आश्रय योजना से संवर रहा 791 बच्चों का भविष्य, मंडी में अब तक 12.94 करोड़ रुपये खर्च
Ankesh Dogra
Updated Sun, 01 Nov 2026 11:26 AM IST
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माता-पिता का साया खो चुके बच्चों के भविष्य को संवारने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में इस योजना के तहत अब तक 791 अनाथ और अर्ध-अनाथ बच्चों को लाभान्वित किया जा चुका है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 से 30 सितंबर 2026 तक इन बच्चों के कल्याण पर 12 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है। योजना के माध्यम से बच्चों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल विकास, स्वरोजगार, मकान निर्माण और विवाह के लिए भी आर्थिक मदद उपलब्ध करवाई जा रही है।
योजना के तहत पूर्ण अनाथ बच्चों को प्रतिमाह 4,000 रुपये की सामाजिक सुरक्षा राशि प्रदान की जा रही है। मंडी जिले में इस मद पर अब तक 6.53 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
इसके अलावा उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले 72 बच्चों को करीब 36 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। वहीं, 50 बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए 26 लाख रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध करवाई गई है।
इस सहायता का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध करवाकर भविष्य में आत्मनिर्भर बनाना है।
सुख-आश्रय योजना के तहत बच्चों को आवास की सुविधा उपलब्ध करवाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंडी जिले में 108 लाभार्थियों को मकान निर्माण के लिए कुल 2.10 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।
इसके अलावा तीन भूमिहीन लाभार्थियों को दो-दो बिस्वा भूमि आवंटित की गई है। इससे जरूरतमंद लाभार्थियों को अपना आशियाना बनाने में मदद मिल रही है।
योजना के तहत लाभार्थियों को विवाह के लिए भी आर्थिक सहायता दी जा रही है। मंडी जिले में अब तक 65 लाभार्थियों को विवाह अनुदान के रूप में 1.29 करोड़ रुपये प्रदान किए जा चुके हैं।
इसके साथ ही 23 बच्चों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए 42.46 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई गई है। इससे लाभार्थियों को अपने पैरों पर खड़ा होने और आजीविका के साधन विकसित करने का अवसर मिल रहा है।
संस्थानों में रहने वाले बच्चों को त्योहारों की खुशियों से जोड़ने के लिए भी योजना में विशेष प्रावधान किया गया है। ऐसे बच्चों को प्रत्येक त्योहार मनाने के लिए 500 रुपये का उत्सव भत्ता दिया जाता है।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पात्र बच्चों की पहचान और नियमित निगरानी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध करवाना है।
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