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फतेहपुर पंचायत चुनाव : बन गई गांव की सरकार, सभी प्रधान घोषित, पढ़ें पूरी जानकारी
Tue, 04 May 2021 03:36 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 04 May 2021 03:36 PM IST
सार
जिला पंचायत के 46 वार्डों में सदस्यों की मतगणना देर रात तक पूरी नहीं हो पाई। देर रात 11 बजे तक असोथर, भिटौरा और ऐरायां ब्लॉक के जिला पंचायत वार्डो की मतगणना तो पूरी हो गई, लेकिन मतगणना की क्रास चेकिंग प्रकिया पूरी न हो पाने के कारण आधिकारिक रूप से परिणाम घोषित नहीं किए गए।
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फतेहपुर पंचायत चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फतेहपुर में तकरीबन 36 घंटे तक चली मतगणना के बाद देर रात जनपद की समस्त ग्राम पंचायतो को उनके मुखिया मिल गए। 834 ग्राम पंचायतों और 13 ब्लॉकों के 1135 वार्डो में क्षेत्र पंचायत सदस्य चुन लिए गए। सभी को उनके रिटर्निंग आफिसर ने जीत का प्रमाणपत्र दिया।
जिला पंचायत के 46 वार्डों में सदस्यों की मतगणना देर रात तक पूरी नहीं हो पाई। देर रात 11 बजे तक असोथर, भिटौरा और ऐरायां ब्लॉक के जिला पंचायत वार्डों की मतगणना तो पूरी हो गई, लेकिन मतगणना की क्रास चेकिंग प्रकिया पूरी न हो पाने के कारण आधिकारिक रूप से परिणाम घोषित नहीं किए गए। जिला निर्वाचन अधिकारी अपूर्वा दुबे ने बताया कि जिला पंचायत के सभी विजेताओं को आज प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
पंचायतों का समीकरण एक नजर में
- ब्लॉक - 13
- प्रधान पद - 834
- ग्राम पंचायत सदस्य - 10554
- क्षेत्र पंचायत सदस्य - 1135
- निर्विरोध प्रधान- 1
- निर्विरोध बीडीसी- 22
- निर्विरोध ग्राम पंचायत सदस्य- 5100
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जिला पंचायत के 46 वार्डों में सदस्यों की मतगणना देर रात तक पूरी नहीं हो पाई। देर रात 11 बजे तक असोथर, भिटौरा और ऐरायां ब्लॉक के जिला पंचायत वार्डों की मतगणना तो पूरी हो गई, लेकिन मतगणना की क्रास चेकिंग प्रकिया पूरी न हो पाने के कारण आधिकारिक रूप से परिणाम घोषित नहीं किए गए। जिला निर्वाचन अधिकारी अपूर्वा दुबे ने बताया कि जिला पंचायत के सभी विजेताओं को आज प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
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पंचायतों का समीकरण एक नजर में
- ब्लॉक - 13
- प्रधान पद - 834
- ग्राम पंचायत सदस्य - 10554
- क्षेत्र पंचायत सदस्य - 1135
- निर्विरोध प्रधान- 1
- निर्विरोध बीडीसी- 22
- निर्विरोध ग्राम पंचायत सदस्य- 5100
25 साल की सियासी विरासत बहू के हाथ सौंपी
फतहेपुर जिले में शिक्षा, कृषि और राजनीति में रुचि रखने वाले पूर्व प्रधान ने अपनी बागडोर बहू के हाथ सौंपी तो जनता ने भी उन्हें स्वीकार किया। अमौली विकास खंड के बिजौली ग्राम सभा से लौबीर सिंह सचान की बहू अमृता सिंह प्रधान पद के लिए निर्वाचित हुई हैं।
लौबीर सिंह बुढ़वा इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के पद से करीब पांच साल पहले रिटायर हुए हैं। वे 1995 में बीडीसी के चुने गए। साल 2000 में उनकी पत्नी ज्ञानशिला बीडीसी चुनीं गई। साल 2005 में उनकी पत्नी प्रधान बनीं। 2010 में लौबीर ने प्रधानी जीती। 2015 में लौबीर महज 13 वोट से चुनाव हार गए।
इसके बाद उन्होंने 2021 में उन्होंने सियासी विरासत अपनी बहू अमृता सिंह पत्नी अरुणेंद्र सिंह को सौंपी। पूर्व प्रधान लौबीर सिंह ने बताया कि उन्हें भरोसा है, जिस तरह से उन्होंने गांव के लोगों की सेवा की है, उनके बच्चे भी ऐसी ही मिसाल पेश करेंगे और जनता का दिल जीतेंगे।
फतहेपुर जिले में शिक्षा, कृषि और राजनीति में रुचि रखने वाले पूर्व प्रधान ने अपनी बागडोर बहू के हाथ सौंपी तो जनता ने भी उन्हें स्वीकार किया। अमौली विकास खंड के बिजौली ग्राम सभा से लौबीर सिंह सचान की बहू अमृता सिंह प्रधान पद के लिए निर्वाचित हुई हैं।
लौबीर सिंह बुढ़वा इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के पद से करीब पांच साल पहले रिटायर हुए हैं। वे 1995 में बीडीसी के चुने गए। साल 2000 में उनकी पत्नी ज्ञानशिला बीडीसी चुनीं गई। साल 2005 में उनकी पत्नी प्रधान बनीं। 2010 में लौबीर ने प्रधानी जीती। 2015 में लौबीर महज 13 वोट से चुनाव हार गए।
इसके बाद उन्होंने 2021 में उन्होंने सियासी विरासत अपनी बहू अमृता सिंह पत्नी अरुणेंद्र सिंह को सौंपी। पूर्व प्रधान लौबीर सिंह ने बताया कि उन्हें भरोसा है, जिस तरह से उन्होंने गांव के लोगों की सेवा की है, उनके बच्चे भी ऐसी ही मिसाल पेश करेंगे और जनता का दिल जीतेंगे।
पांचवी बार प्रधान बने सत्य नारायण
अमौली विकास खंड के धमना खुर्द गांव के सत्य नारायण पटेल पांचवीं बार प्रधान निर्वाचित हुए हैं। वह पहली बार वर्ष 1995 में प्रधान बने थे। इसके बाद 2000 में दोबारा प्रधान निर्वाचित हुए। 2005 में महिला सीट होने पर अपनी पत्नी शशिकला पटेल को प्रधान बनाया। वर्ष 2010 में सीट अनुसचित जाति के लिए आरक्षित हुई तो वह चुनाव से अलग हो गए। वर्ष 2015 में वह चौथी पर प्रधान बने। 2021 में पांचवीं बार प्रधान पद के लिए निर्वाचित हुए हैं।
खेत में मजदूरी करने वाली बहू के सिर पर प्रधानी का ताज
आठवीं पास गांव की एक बहू जो अब तक अपना परिवार पालने के लिए दूसरों के खेतों पर मजदूरी करती थी। उसे गांव के लोगों ने अपना प्रधान चुना है। लोगों ने चंदा जमा कर बेहद गरीब परिवार की इस बहू को चुनाव लड़वाया है। चुनाव का नतीजा आया तो समर्थकों की आंखें खुशी से नम हो गई।
बहुआ विकास खंड के बरौंहा ग्राम पंचायत से प्रधान पद पर सुबरातन पत्नी रफीक जीती हैं। गांव में करीब 50 फीसदी वोटर मुस्लिम समुदाय के हैं। चुनाव में सुबरातन को करीब 619 वोट प्राप्त हुए। सुबरातन ने गांव के अवधेश कुमार यादव को 140 वोटों से हराकर लोगों के विश्वास और मजबूती प्रदान की।
अवधेश कुमार को 479 वोट मिले। अवधेश के अलावा सुबरातन के सामने सात अन्य पुरुष प्रत्याशी थे। जिन्हें टक्कर देते हुए वह प्रधान निर्वाचित हुईं हैं। सुबरातन के परिवार में केवल उनके पति हैं। सुबरातन ने कहा कि गांव के लोगों ने उन्हें सेवा का अवसर दिया है, जिसे वह अपना सौभाग्य समझती है। लोगों के विश्वास को टूटने नहीं देंगी।
अमौली विकास खंड के धमना खुर्द गांव के सत्य नारायण पटेल पांचवीं बार प्रधान निर्वाचित हुए हैं। वह पहली बार वर्ष 1995 में प्रधान बने थे। इसके बाद 2000 में दोबारा प्रधान निर्वाचित हुए। 2005 में महिला सीट होने पर अपनी पत्नी शशिकला पटेल को प्रधान बनाया। वर्ष 2010 में सीट अनुसचित जाति के लिए आरक्षित हुई तो वह चुनाव से अलग हो गए। वर्ष 2015 में वह चौथी पर प्रधान बने। 2021 में पांचवीं बार प्रधान पद के लिए निर्वाचित हुए हैं।
खेत में मजदूरी करने वाली बहू के सिर पर प्रधानी का ताज
आठवीं पास गांव की एक बहू जो अब तक अपना परिवार पालने के लिए दूसरों के खेतों पर मजदूरी करती थी। उसे गांव के लोगों ने अपना प्रधान चुना है। लोगों ने चंदा जमा कर बेहद गरीब परिवार की इस बहू को चुनाव लड़वाया है। चुनाव का नतीजा आया तो समर्थकों की आंखें खुशी से नम हो गई।
बहुआ विकास खंड के बरौंहा ग्राम पंचायत से प्रधान पद पर सुबरातन पत्नी रफीक जीती हैं। गांव में करीब 50 फीसदी वोटर मुस्लिम समुदाय के हैं। चुनाव में सुबरातन को करीब 619 वोट प्राप्त हुए। सुबरातन ने गांव के अवधेश कुमार यादव को 140 वोटों से हराकर लोगों के विश्वास और मजबूती प्रदान की।
अवधेश कुमार को 479 वोट मिले। अवधेश के अलावा सुबरातन के सामने सात अन्य पुरुष प्रत्याशी थे। जिन्हें टक्कर देते हुए वह प्रधान निर्वाचित हुईं हैं। सुबरातन के परिवार में केवल उनके पति हैं। सुबरातन ने कहा कि गांव के लोगों ने उन्हें सेवा का अवसर दिया है, जिसे वह अपना सौभाग्य समझती है। लोगों के विश्वास को टूटने नहीं देंगी।
छिवलहा को पहली बार मिला मुस्लिम प्रधान
वैश्य समाज बाहुल्य रज्जीपुर छिवलहा से पहली बार मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति प्रधान चुना गया है। इस सीट से हमेशा वैश्य समाज का कोई न कोई व्यक्ति प्रधान बनता रहा है। लोगों ने अपने नए प्रधान का फूल-माला से लादकर स्वागत किया। रज्जीपुर छिवलहा के मोहम्मद हलीम ने नया इतिहास बनाते हुए प्रधान निर्वाचित हुए हैं। उन्हें 534 वोट मिले हैं। उन्होंने कमलेश गुप्ता को 76 वोट से हराया है। मोहम्मद हलीम का राजू, रुआब, सद्दाम, तनवीर, नईम, सुशील, शीबू, मेराजुल, खुर्शीद, सोनू, पप्पू आदि लोगों ने माला पहनाकर स्वागत किया।
दो वोटों से दर्ज की जीत, खुशी
हथगाम विकास खंड के रायपुर मुआरी ग्राम सभा में प्रधान पद के चुनाव में दो वोट से जीत-हार हो गई। गांव के डब्लू और अशफाक अहमद उर्फ गुड्डू के बीच कड़ी टक्कर हुई। अशफाक को 453 वोट मिले और डब्लू को 451 वोट। अशफाक ने महज दो वोट से जीत दर्ज की। अशफाक की जीत का सेहरा ग्रामीणों के साथ उनके दो भाईयों के सिर पर भी बंधा। इसका कारण यह रहा कि अशफाक के दो भाई सऊदी अरब में रहते हैं। अशफाक ने करीब पौने दो लाख रुपए खर्च करके दोनों को केवल मतदान के लिए गांव बुलाया था। लोगों ने कहा कि यही दो वोट उसकी जीत का कारण बने।
वैश्य समाज बाहुल्य रज्जीपुर छिवलहा से पहली बार मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति प्रधान चुना गया है। इस सीट से हमेशा वैश्य समाज का कोई न कोई व्यक्ति प्रधान बनता रहा है। लोगों ने अपने नए प्रधान का फूल-माला से लादकर स्वागत किया। रज्जीपुर छिवलहा के मोहम्मद हलीम ने नया इतिहास बनाते हुए प्रधान निर्वाचित हुए हैं। उन्हें 534 वोट मिले हैं। उन्होंने कमलेश गुप्ता को 76 वोट से हराया है। मोहम्मद हलीम का राजू, रुआब, सद्दाम, तनवीर, नईम, सुशील, शीबू, मेराजुल, खुर्शीद, सोनू, पप्पू आदि लोगों ने माला पहनाकर स्वागत किया।
दो वोटों से दर्ज की जीत, खुशी
हथगाम विकास खंड के रायपुर मुआरी ग्राम सभा में प्रधान पद के चुनाव में दो वोट से जीत-हार हो गई। गांव के डब्लू और अशफाक अहमद उर्फ गुड्डू के बीच कड़ी टक्कर हुई। अशफाक को 453 वोट मिले और डब्लू को 451 वोट। अशफाक ने महज दो वोट से जीत दर्ज की। अशफाक की जीत का सेहरा ग्रामीणों के साथ उनके दो भाईयों के सिर पर भी बंधा। इसका कारण यह रहा कि अशफाक के दो भाई सऊदी अरब में रहते हैं। अशफाक ने करीब पौने दो लाख रुपए खर्च करके दोनों को केवल मतदान के लिए गांव बुलाया था। लोगों ने कहा कि यही दो वोट उसकी जीत का कारण बने।