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Ayodhya News: 3-डी से जीवंत होंगे रामायण के सातों कांड
Sun, 01 Nov 2026 11:23 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 01 Nov 2026 11:23 PM IST
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40- बालकांड की 3डी मॉडल पर आधारित झांकी- सूचना विभाग
अयोध्या। दीपोत्सव में रामनगरी की सड़कों पर भगवान श्रीराम की जीवन यात्रा और रामायण के प्रमुख प्रसंगों की भव्य झलक देखने को मिलेगी। संस्कृति विभाग की ओर से इस बार रामकथा के सातों कांडों पर आधारित 14 झांकियां तैयार की जा रही हैं। इनमें बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक की प्रमुख घटनाओं को 3-डी मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
इन झांकियों की खासियत यह होगी कि रामायण के प्रसंगों के साथ उत्तर प्रदेश के सात अलग-अलग सांस्कृतिक अंचलों के लोकनृत्यों को देश के अन्य राज्यों की लोककलाओं से जोड़ा जाएगा। इस तरह दीपोत्सव की झांकी यात्रा में रामकथा के साथ देश की सांस्कृतिक विविधता और लोकपरंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। यह यात्रा साकेत महाविद्यालय से शुरू होकर रामकथा पार्क तक पहुंचेगी।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव की इन झांकियों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग सांस्कृतिक अंचलों की पहचान को विशेष स्थान दिया गया है। अयोध्या का फरुवाही, अवध का ढेढिया, पूर्वांचल का धोबिया, सोनांचल का करमा, बुंदेलखंड का राई, ब्रज का मयूर और पश्चिमांचल का गूजरी लोकनृत्य रामकथा के अलग-अलग प्रसंगों के साथ प्रस्तुत किए जाएंगे। इनके साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गुजरात, असम और राजस्थान के लोकनृत्य भी शामिल किए गए हैं।
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उन्होंने बताया कि इस तरह दर्शकों को एक ही यात्रा में विभिन्न राज्यों की लोककलाओं, वेशभूषा, संगीत और नृत्य परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। झांकियों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता को भी रेखांकित किया जाएगा।
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इन झांकियों की खासियत यह होगी कि रामायण के प्रसंगों के साथ उत्तर प्रदेश के सात अलग-अलग सांस्कृतिक अंचलों के लोकनृत्यों को देश के अन्य राज्यों की लोककलाओं से जोड़ा जाएगा। इस तरह दीपोत्सव की झांकी यात्रा में रामकथा के साथ देश की सांस्कृतिक विविधता और लोकपरंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। यह यात्रा साकेत महाविद्यालय से शुरू होकर रामकथा पार्क तक पहुंचेगी।
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संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव की इन झांकियों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग सांस्कृतिक अंचलों की पहचान को विशेष स्थान दिया गया है। अयोध्या का फरुवाही, अवध का ढेढिया, पूर्वांचल का धोबिया, सोनांचल का करमा, बुंदेलखंड का राई, ब्रज का मयूर और पश्चिमांचल का गूजरी लोकनृत्य रामकथा के अलग-अलग प्रसंगों के साथ प्रस्तुत किए जाएंगे। इनके साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गुजरात, असम और राजस्थान के लोकनृत्य भी शामिल किए गए हैं।
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उन्होंने बताया कि इस तरह दर्शकों को एक ही यात्रा में विभिन्न राज्यों की लोककलाओं, वेशभूषा, संगीत और नृत्य परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। झांकियों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता को भी रेखांकित किया जाएगा।