राजस्थान: लूनी-जोजारी-बांडी नदियों में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एसआईटी जांच के आदेश; नए उद्योगों पर रोक
राजस्थान की लूनी, जोजारी और बांडी नदियों में अवैध बजरी खनन और प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी गठित कर जांच कराने का आदेश दिया है। राजस्थान सरकार को तीन दिन में आईजीपी रैंक के अधिकारी की अगुवाई में एसआईटी बनाने को कहा गया है।
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राजस्थान की लूनी, जोजारी और बांडी नदियों में संगठित अवैध बजरी खनन और प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया है। साथ ही, नदी पारिस्थितिकी तंत्र के पास नए औद्योगिक प्रतिष्ठान स्थापित करने पर रोक लगा दी है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक नदियों की हाई फ्लड लाइन और बफर जोन का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण नहीं हो जाता। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को तीन दिन के भीतर एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया है। जांच दल का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) रैंक के अधिकारी करेंगे। इसमें जोधपुर, बालोतरा और पाली के पुलिस अधीक्षक भी शामिल होंगे। एसआईटी नदियों और उनकी सहायक नदियों को प्रभावित करने वाले अवैध खनन के पूरे नेटवर्क की जांच करेगी।
खनन से लेकर परिवहन और बिक्री तक की होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, एसआईटी अवैध बजरी खनन में शामिल लोगों और संस्थाओं की पहचान करेगी। इसके साथ ही खनन, परिवहन और बिक्री के नेटवर्क का पता लगाएगी। इस पूरे कारोबार से किसे आर्थिक लाभ मिला, इसकी भी जांच की जाएगी। जांच दल यह भी पता लगाएगा कि क्या सरकारी अधिकारियों ने अवैध खनन में मिलीभगत की या अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया। नियमों के उल्लंघन की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल होगी। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने एसआईटी को 27 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से पहले या उसी दिन तक अपनी स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
नदियों के दोनों ओर 100 मीटर का सुरक्षा क्षेत्र
नदी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नदियों की बाहरी सीमाओं के दोनों ओर 100 मीटर का अतिरिक्त सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखने का निर्देश दिया है। इसके अलावा नदी की सीमाओं से 500 मीटर के दायरे में रेड कैटेगरी के उद्योग स्थापित करने की अनुमति नहीं होगी। रेड कैटेगरी में अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग शामिल होते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि नए औद्योगिक प्रतिष्ठानों की स्थापना पर रोक हाई फ्लड लाइन और बफर जोन के वैज्ञानिक निर्धारण तक लागू रहेगी। इन निर्देशों का उद्देश्य नदियों के प्राकृतिक स्वरूप और पारिस्थितिकी तंत्र को बचाना तथा प्रदूषण पर अंकुश लगाना है।
सुप्रीम कोर्ट ने दो वरिष्ठ वकीलों को बनाया न्याय मित्र
मामले की गंभीरता और जटिलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट बलबीर सिंह और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड नमित सक्सेना को एमिक्स क्यूरी यानी न्याय मित्र नियुक्त किया है। वे मामले में अदालत को कानूनी पहलुओं पर सहायता देंगे और प्रभावी समाधान तलाशने में मदद करेंगे।
प्रदूषण से करीब 20 लाख लोगों का जीवन प्रभावित
यह मामला जोजारी-लूनी-बांडी नदी प्रणाली में प्रदूषण से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान कार्यवाही का हिस्सा है। अदालत के मुताबिक, नदी प्रदूषण से पर्यावरण के साथ-साथ करीब 20 लाख लोगों का जीवन भी प्रभावित हो रहा है। इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि अवैध खनन और खनन क्षेत्रों को नियमित करने के मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जा सकती है। अदालत ने इस पर भी सवाल उठाए थे कि जिन इलाकों में अवैध खनन पाया गया, वहां खनन पट्टे कैसे दिए गए और अवैध पट्टों को नियमित क्यों किया गया। बाद में पट्टे जारी कर अवैध खनन को वैध बनाने की कोशिश पर भी अदालत ने नाराजगी जताई थी।
खनन पट्टा मिलने के बाद भी पर्यावरणीय जांच जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खनन पट्टा देने की प्रक्रिया का पालन करना और वास्तविक खनन के दौरान पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का पालन करना दो अलग-अलग आवश्यकताएं हैं। जिन क्षेत्रों में बाद में खनन पट्टे दिए गए हैं, वहां पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का स्वतंत्र आकलन किया जाना चाहिए।
अदालत ने एकीकृत सार्वजनिक रिपोर्टिंग और पर्यावरणीय शिकायत निवारण तंत्र में गुमनाम शिकायत दर्ज कराने की सुविधा शामिल करने का भी निर्देश दिया है। इसके तहत अवैध बजरी खनन और नदी पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करने वाली अन्य गैरकानूनी गतिविधियों की शिकायत की जा सकेगी।