एमपी: उमरिया में आधी रात को सागौन तस्करी का भंडाफोड़, 12 सिल्ली से लदी पिकअप जब्त; एक गिरफ्तार, दो फरार
नौरोजाबाद वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने आधी रात घेराबंदी कर सागौन की 12 नग सिल्ली से लदी पिकअप जब्त की। कार्रवाई में एक आरोपी गिरफ्तार हुआ, जबकि दो फरार हो गए। वन विभाग अब लकड़ी के स्रोत और तस्करी नेटवर्क की जांच में जुटा है।
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उमरिया जिले के नौरोजाबाद वन परिक्षेत्र में सागौन की अवैध तस्करी का मामला सामने आया है। वन विभाग की टीम ने मुखबिर की सूचना पर आधी रात को घेराबंदी कर लकड़ियों से लदी एक पिकअप को जब्त कर लिया। कार्रवाई में सागौन की 12 सिल्ली बरामद हुई हैं। मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो अन्य अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
जानकारी के अनुसार, नौरोजाबाद वन परिक्षेत्र का वन अमला देर रात नियमित गश्त पर निकला हुआ था। इसी दौरान टीम को सूचना मिली कि रहठा क्षेत्र के ग्राम बांदर चुआ और खैरखा के बीच तालाब के पास एक पिकअप वाहन से अवैध रूप से सागौन की लकड़ियों का परिवहन किया जा रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हुई और तड़के करीब 2:30 बजे संदिग्ध स्थान पर पहुंचकर घेराबंदी कर दी।
कुछ ही देर बाद वहां संदिग्ध पिकअप वाहन क्रमांक MP 20 GA 5398 पहुंचा। वन अमले ने वाहन को रोककर तलाशी ली तो उसमें सागौन की 12 सिल्ली लदी मिलीं। लकड़ी के परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद वन विभाग ने लकड़ी सहित पिकअप वाहन को जब्त कर लिया।
कार्रवाई के दौरान जगतपाल बैगा को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए। जब्त वाहन के मालिक की पहचान ग्राम हड़हा निवासी रवि विश्वकर्मा के रूप में बताई गई है। हालांकि, वाहन मालिक की भूमिका और लकड़ी की तस्करी में उसकी संलिप्तता को लेकर जांच की जा रही है।
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वन विभाग ने वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। अब जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सागौन की इन सिल्ली को जंगल के किस हिस्से से काटा गया था और इन्हें कहां पहुंचाने की तैयारी थी। इसके साथ ही फरार आरोपियों की तलाश भी की जा रही है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी पीयूष त्रिपाठी के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में परिक्षेत्र सहायक नन्दलाल सिंह, अजय सिंह, बीट गार्ड सत्यदेव द्विवेदी, शिवप्रताप बैगा, विजय सिंह और मोहम्मद हनीफ सहित वन विभाग के अन्य कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस कार्रवाई के बाद वन विभाग की निगरानी और गश्ती व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जंगल से सागौन की कटाई कर उसे पिकअप तक पहुंचाने में तस्करों ने किन रास्तों का इस्तेमाल किया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है, इसकी जांच की जा रही है। अब देखना होगा कि वन विभाग फरार आरोपियों को कब तक गिरफ्तार कर पाता है और तस्करी के पूरे नेटवर्क का खुलासा कब होता है।
