Chhindwara: आखिर कहां गया 44 ट्रकों में भरकर निकला 16,500 क्विंटल चावल? एथेनॉल कंपनी के दो प्रतिनिधि गिरफ्तार
एफसीआई चावल हेराफेरी मामले में पुलिस ने सौसर स्थित एवीजे एग्रीको प्राइवेट लिमिटेड के दो प्रतिनिधियों को गिरफ्तार किया है। करीब 16,500 क्विंटल चावल और चार करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच में जीपीएस, ई-वे बिल और दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। मामले में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
एफसीआई चावल हेराफेरी मामले में पुलिस ने सौसर स्थित एवीजे एग्रीको प्राइवेट लिमिटेड के दो प्रतिनिधियों को गिरफ्तार किया है। करीब 16,500 क्विंटल चावल और चार करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच में जीपीएस, ई-वे बिल और दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। मामले में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
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मध्यप्रदेश में सरकारी अनाज से जुड़े सबसे बड़े घोटालों में शामिल हो चुके एफसीआई चावल हेराफेरी मामले की जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है। करीब 16 हजार 500 क्विंटल चावल के गायब होने और लगभग चार करोड़ रुपये के आर्थिक घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सौसर के बोरगांव औद्योगिक क्षेत्र स्थित एथेनॉल निर्माण कंपनी एवीजे एग्रीको प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े दो प्रतिनिधियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे महाकौशल क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
पुलिस ने कंपनी प्रतिनिधि राहुल प्रताप और राकेश श्रीवास को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को 28 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल चावल की हेराफेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित नेटवर्क और करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार की परतें छिपी हो सकती हैं।
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अप्रैल से जून के बीच 44 ट्रकों में भेजा गया था चावल
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की एथेनॉल नीति के तहत एथेनॉल निर्माण के लिए एफसीआई द्वारा बड़ी मात्रा में चावल विभिन्न इकाइयों को आवंटित किया जाता है। इसी क्रम में बालाघाट से एवीजे एग्रीको प्राइवेट लिमिटेड को हजारों क्विंटल चावल जारी किया गया था। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार अप्रैल से जून के बीच 44 ट्रकों में भरकर करीब 16,500 क्विंटल चावल सौसर स्थित प्लांट के लिए रवाना किया गया। परिवहन रिकॉर्ड में यह माल गंतव्य तक पहुंचा हुआ दर्शाया गया, लेकिन जांच के दौरान जब वास्तविक स्टॉक और दस्तावेजों का मिलान किया गया तो भारी अंतर सामने आया। यहीं से पूरे मामले का खुलासा हुआ और करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका ने जन्म लिया।
रिकॉर्ड में चावल मौजूद, जमीन पर गायब
जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कई दस्तावेजों में चावल का परिवहन और प्राप्ति दर्ज है, लेकिन वास्तविकता में इतनी मात्रा में चावल प्लांट तक पहुंचने के प्रमाण नहीं मिले। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर वह चावल रास्ते में कहां उतारा गया और किसे बेचा गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि हजारों क्विंटल चावल गंतव्य तक नहीं पहुंचा तो परिवहन से लेकर रिसीविंग तक की पूरी प्रक्रिया में किस-किस स्तर पर मिलीभगत हुई।
जीपीएस, वे-ब्रिज और दस्तावेज खंगाल रही पुलिस
पुलिस और जांच एजेंसियां अब मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं। ट्रकों की जीपीएस हिस्ट्री, वे-ब्रिज रिकॉर्ड, ई-वे बिल, परिवहन दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर और इलेक्ट्रॉनिक डेटा खंगाला जा रहा है। जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि दस्तावेजों में हेरफेर हुई है तो डिजिटल साक्ष्य कई महत्वपूर्ण राज खोल सकते हैं। वहीं ट्रकों की वास्तविक आवाजाही भी जांच का बड़ा आधार बन रही है।
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दो गिरफ्तारियां केवल शुरुआत
सूत्रों की मानें तो राहुल प्रताप और राकेश श्रीवास की गिरफ्तारी को जांच का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। पूछताछ में ऐसे कई नाम सामने आने की संभावना है जो अब तक पर्दे के पीछे थे। जांच एजेंसियों का संदेह है कि बिना संगठित नेटवर्क के इतने बड़े पैमाने पर सरकारी अनाज की हेराफेरी संभव नहीं है। इसलिए अब जांच का दायरा परिवहनकर्ताओं, गोदाम संचालकों, रिसीविंग अधिकारियों, कंपनी प्रबंधन और अन्य संबंधित व्यक्तियों तक बढ़ाया जा रहा है।
बोरगांव से भोपाल तक चर्चा
दो गिरफ्तारियों के बाद बोरगांव औद्योगिक क्षेत्र से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा सरकारी अनाज घोटाला बता रहे हैं। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पुलिस रिमांड के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आएंगी। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह मामला केवल सौसर या बालाघाट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश स्तर पर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन सकता है।
