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                                                                           कभी कहा गया था
"कलम तलवार से तेज़ होती है,"
पर अब
कलम ब्रांड बन चुकी है,
और कागज़
प्रायोजित मौन का विज्ञापन।

जब एक कवि
सत्य की जगह
सुविधा को चुनता है,
तो उसकी कविता
क्रांति...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           हाथ में तिरंगा, दिल में वतन,
कर देंगे गद्दारों को दफन!

तिरंगा हाथ में, आग दिल में है,
भारत का हर युवा अब महफिल में है।

गद्दारी का अब एक ही अंजाम होगा,
हर जवाब अब संविधान से होगा।

जाग ग...और पढ़ें
2 weeks ago
                                                                           बड़े-बड़े नेता देखे हैं
सुने बहुत उनके भी भाषण,
पर उनमें वह शक्ति नहीं है
जो कर ले पागल की होड़ ।

देशभक्ति का ढोल पीटते
और विकास की बीन बजाते,
पर विचलित होते हैं मग से
नहीं लग पाता है जब जोड़ ।...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           काश मैं भी सेलिब्रिटी हो जाऊँ

काश
मैं भी
सेलिब्रिटी हो जाऊँ।
फिर मुझे
किसी विषय का ज्ञान हो न हो—
हर विषय पर
मेरी राय पूछी जाएगी।

देश।
समाज।
शिक्षा।
अर्थव्यव...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           देशभक्ति-जनसेवा के,करते खूब दिखावे
झूठे हैं मेरे नेता,जूठे उनके वादे

वीरों की इस भूमि का,भरत से भारत नाम पड़ा
बुद्ध, महावीर और गाँधी से,दुनिया में सम्मान बढ़ा

प्रताप, शिवाजी, गुरु गोविंद ने,वीरता का परचम लहरा...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           मैं हिंदी भाषी हूँ

भाषा नहीं,
राष्ट्र की आत्मा,
हिंदी मेरी कहलाती है।
मेरी मातृभाषा, मेरे जीवन में,
मुख्य भूमिका निभाती है।

देश के जनमानस में
सेतु-सा मार्ग बनाती है,
भाईचारा खूब...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           सुबह की पहली किरण से…
शाम की अंतिम लाली तक…
मेहनत की हर धड़कन में…
धरती की हर हलचल तक…

जहाँ पसीना इतिहास लिखे,
जहाँ संघर्ष भी त्योहार लगे—
वो धरती हमारी है…!

हम बिहारी हैं!
हाँ…...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           खामोशी की खुशबू कांटों का मंजर खोल रहे हैं,
तरुणाई के ज्वार में, सागर के अंतस बोल रहें हैं।

मचा हुआ है हल्ला गुल्ला संसद के गलियारों में,
सड़कों पर आवाज वही, नया रास्ता खोल रहें हैं।

संविधान को धता बताकर कु...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           निकलते हैं जब घर से,
हमारे सैनिक जवान
गूंज रहा होता उनके मन में
बस एक ही सवाल
किस तरह करना है हमें
शत्रु के हर साजिश को नाकाम
मत समझो इन्हें कमजोर तुम
देश के लिए छोड़ जाते ये अपनी पहचान
आसान नही...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           बेईमानी की तलाश

हर आदमी बेईमानी की तलाश में है,
और हर आदमी चिल्लाता है,
“बहुत बेईमानी है!”
कमाल है साहब,
चोर भी चौकीदार ढूँढ़ रहा है,
और चौकीदार भी चोर की तलाश में है।

जेब में ईमानदारी...और पढ़ें
1 month ago
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