मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ।
चल रहा हूँ, क्योंकि चलने से थकावट दूर होती,
जल रहा हूँ क्योंकि जलने से तिमिस्रा चूर होती,
गल रहा हूँ क्योंकि हल्का बोझ हो जाता हृदय का,
ढल रहा हूँ क्योंकि ढलकर साथ...और पढ़ें
' दो शहरों के बीच धड़कता एक घर '
बीजापुर की धरती पर
तुम ज्ञान के दीप जलाते हो,
बालोद की कक्षाओं में
मैं भी भविष्य के स्वप्न सजाती हूँ।
तुम्हारे पास विद्यार्थियों का संसार,
मेरे पास बच्चों की क...और पढ़ें
आप को सुनाता हूँ एक सच्ची कहानी ,खुद की कहानी खुद मेरी जुबानी ....
छोटी सी उम्र में ,मैं आँखों का नूर हो गया ,पढ़ने के चक्कर में आपने परिवार से दूर हो गया.....
जिस दिन गया मै हॉस्टल ऐसा मानो कि मुझसे हो खुद मेरा भगवान रूठा,जब मुझसे मेरेऔर पढ़ें
कठिन तन्हाइयों से कौन खेला मैं अकेला
भरा अब भी मिरे गाँव का मेला मैं अकेला
बिछड़ कर तुझ से मैं शब भर न सोया कौन रोया
ब-जुज़ मेरे ये दुख भी किस ने झेला मैं अकेला
ये बे-आवाज़ बंजर बन के बासी ये उदासी...और पढ़ें
अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
आज समझे हैं पढ़कर किताब
छिपी है पन्नों में अक्सर किताब
हुनर था कोई या थी लाचारी
सुनाई उसने चुप रहकर किताब
ये उदासी, थकन ये खामोशी
लिख जाती हैं चहरे पर किताब
शायद हो जाते हम कामयाब
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शादी के बाद लफ्ज़ जुबान तक आकर लौट गए।
मगर आँखें तलाशती रही खोई मोहब्बत दिन गए।।
मन उदासी आठ पहर की बेचैनी छुपाने का खेल।
स्त्री में ही नही पुरुष में भी इसके आसार देखे गए।।
दो दिल और एक मुड़ती हुई सड़क शादी...और पढ़ें
वक्त कभी ठहरता नहीं पर वक्त बदलता जरूर है।
रोशनी कभी हमेशा नहीं रहती अंधेरे को भी आना पड़ता है।
रास्ते हमेशा सीधे नहीं रहते।
रास्तों को भी उलझन भरा होना पड़ता है
समुद्र हमेशा शांत नहीं होता।
तूफान आने पर उसे उठाना प...और पढ़ें
बहुत सारी जो बातें हैं वो भी खुद को स्वीकार करनी हैं,
बहुत सारे हृदय के दर्द हैं जो खुद को अभी समझाना है।
मेरे पास समय बहुत भी कम है और उम्मीदें बहुत है,
और इस जीवन के पड़ाव में रिश्तें भी छूट गए हैं
और अब बस एक छो...और पढ़ें
बीते पल को सब ने देखा
अगला पल अनजान रहा।
गुबार को उठते दूर से देखा
बड़े यत्न से मौज सॅंवारा, मस्ती वाले अनजान रहे।
मुस्कुराने की अदा बयां करते रहे
नयनों की उदासी से अनजान रहे।
दीवार की...और पढ़ें