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सुप्रीम कोर्ट: जंतर-मंतर हिंसा मामले में अदालत सख्त, पूर्व जज की कमेटी करेगी जांच; वीडियो और शिकायतें सौंपीं
Thu, 05 Nov 2026 02:49 PM IST
शिवम गर्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 05 Nov 2026 02:49 PM IST
सार
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वीडियो, शिकायतें और याचिकाएं पूर्व जज आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी को सौंप दी हैं। कमेटी को नियमित अंतराल पर अंतरिम रिपोर्ट देनी होगी।
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जंतर-मंतर हिंसा की जांच
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस की कथित ज्यादती की जांच कर रही सुप्रीम कोर्ट की उच्चाधिकार प्राप्त समिति को अब तक पीड़ितों की बहुत कम शिकायतें मिली हैं। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी गई।
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सुनवाई के दौरान पीठ ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि शिकायतों और सबूतों की कमी के कारण समिति फिलहाल हिंसा को लेकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हिंसा से जुड़ी याचिकाएं, वीडियो और शिकायतें समिति को सौंपी जाएं। साथ ही समिति को समय-समय पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट पेश करने को कहा। समिति ने कोर्ट को बताया कि उसने 20 जुलाई को संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान हुई हिंसा के संबंध में शिकायतें मांगने के लिए 149 अखबारों में नोटिस प्रकाशित कराए थे। इसके बावजूद उसे ऑनलाइन और व्यक्तिगत रूप से बहुत कम शिकायतें मिलीं। इसके बाद 21 अक्तूबर को फिर से शिकायतें मांगी गईं। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल और कार्यालय का पता भी दोबारा जारी किया गया।
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जांच समिति में कौन-कौन?
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में इस मामले की जांच के लिए समिति गठित की थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी एलआर बिश्नोई शामिल हैं।
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क्या है पूरा मामला?
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन कई शहरों तक फैल गया था। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था और 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा सरकार की ओर से सीजेपी की अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद खत्म हुआ था।