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Hamirpur (Himachal) News: सरकारी नौकरी के नाम पर 13 लाख की ठगी करने के दोनों दोषियों की अपील खारिज
Mon, 02 Nov 2026 01:27 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 02 Nov 2026 01:27 AM IST
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हमीरपुर। खुद को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर पांच लोगों से 13 लाख रुपये ठगने के मामले में दो दोषियों को राहत नहीं मिली है।
हिमाचल प्रदेश स्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल ने राकेश राणा निवासी थुरल और अंजना देवी निवासी जवाली, जिला कांगड़ा की अपीलें खारिज कर दी हैं। अध्यक्ष राजेश तोमर ने 30 अक्तूबर, 2026 को सुनाए फैसले में निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के आदेश को बरकरार रखा है।
अब दोनों दोषियों को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर सजा भुगतनी होगी। मामले के अनुसार, राकेश राणा ने खुद को राज वर्मा बताते हुए भारतीय रिजर्व बैंक का वरिष्ठ मुख्य कार्यकारी अधिकारी होने का दावा किया था। उसने आशीष कुमार, नितिन वर्मा, पूजा देवी, सुरजीत कुमार और सुरेश कुमार को सरकारी बैंकों में नौकरी दिलाने का झांसा दिया और इसके एवज में उनसे कुल 13 लाख रुपये ऐंठ लिए।
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दोषियों ने पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए जाली पहचान पत्र और सरकारी प्रतीक चिह्न वाले वाहन का इस्तेमाल किया। इसके अलावा उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र भी जारी किए गए। ठगी की रकम के लेनदेन के लिए अंजना देवी के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था।
जांच में सामने आया कि भारतीय रिजर्व बैंक में वरिष्ठ मुख्य कार्यकारी अधिकारी नाम का कोई पद ही नहीं है। ट्रिब्यूनल ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों को पर्याप्त माना। मामले में 57 गवाहों की गवाही और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर धोखाधड़ी के आरोप साबित हुए।
ट्रिब्यूनल ने निचली अदालत के 25 फरवरी, 2023 के फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों आरोपियों की अपीलें खारिज कर दीं।
चार धाराओं में सुनाई गई सजा
दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दो साल का कठोर कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माना, धारा 467 के तहत एक साल छह महीने का कठोर कारावास और दो हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 468 के तहत दो साल का कठोर कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया है। धारा 170 के तहत छह महीने का कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर संबंधित धाराओं में अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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हिमाचल प्रदेश स्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल ने राकेश राणा निवासी थुरल और अंजना देवी निवासी जवाली, जिला कांगड़ा की अपीलें खारिज कर दी हैं। अध्यक्ष राजेश तोमर ने 30 अक्तूबर, 2026 को सुनाए फैसले में निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के आदेश को बरकरार रखा है।
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अब दोनों दोषियों को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर सजा भुगतनी होगी। मामले के अनुसार, राकेश राणा ने खुद को राज वर्मा बताते हुए भारतीय रिजर्व बैंक का वरिष्ठ मुख्य कार्यकारी अधिकारी होने का दावा किया था। उसने आशीष कुमार, नितिन वर्मा, पूजा देवी, सुरजीत कुमार और सुरेश कुमार को सरकारी बैंकों में नौकरी दिलाने का झांसा दिया और इसके एवज में उनसे कुल 13 लाख रुपये ऐंठ लिए।
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दोषियों ने पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए जाली पहचान पत्र और सरकारी प्रतीक चिह्न वाले वाहन का इस्तेमाल किया। इसके अलावा उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र भी जारी किए गए। ठगी की रकम के लेनदेन के लिए अंजना देवी के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था।
जांच में सामने आया कि भारतीय रिजर्व बैंक में वरिष्ठ मुख्य कार्यकारी अधिकारी नाम का कोई पद ही नहीं है। ट्रिब्यूनल ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों को पर्याप्त माना। मामले में 57 गवाहों की गवाही और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर धोखाधड़ी के आरोप साबित हुए।
ट्रिब्यूनल ने निचली अदालत के 25 फरवरी, 2023 के फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों आरोपियों की अपीलें खारिज कर दीं।
चार धाराओं में सुनाई गई सजा
दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दो साल का कठोर कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माना, धारा 467 के तहत एक साल छह महीने का कठोर कारावास और दो हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 468 के तहत दो साल का कठोर कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया है। धारा 170 के तहत छह महीने का कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर संबंधित धाराओं में अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।