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Hisar News: फसल सुरक्षा के लिए समेकित कीट प्रबंधन अपनाएं
Tue, 03 Nov 2026 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Tue, 03 Nov 2026 12:05 AM IST
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हिसार एचएयू में किसानों को किट प्रदान करते कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज।
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कीट विज्ञान विभाग की ओर से सोमवार को किसान जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बलदेव राज कांबोज ने किसानों को कीटनाशकों का इस्तेमाल वैज्ञानिकों की सलाह और निर्धारित मात्रा के अनुसार करने की सलाह दी।
कांबोज ने समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) को टिकाऊ खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि किसान केवल रासायनिक दवाओं पर निर्भर न रहें। खेतों की नियमित निगरानी, कीटों की सही पहचान, जैविक नियंत्रण, फेरोमोन ट्रैप और कीट प्रतिरोधी किस्मों को अपनाएं। इससे खेती की लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि बिना जरूरत और अधिक मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव करने से खेती की लागत बढ़ने के साथ फसल, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। कीटनाशक खरीदते और इस्तेमाल करते समय पैकेट या बोतल पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। छिड़काव के दौरान मास्क, दस्ताने और अन्य सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करना जरूरी है। कीटनाशकों का गलत इस्तेमाल मिट्टी, पानी, पशु-पक्षियों और लाभकारी कीटों के लिए भी हानिकारक है।
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अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने कहा कि कीटनाशकों के प्रयोग से पहले फसल और उसमें लगने वाले कीट की सही पहचान जरूरी है। विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता यादव ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विषय से संबंधित जानकारी दी। कोरटेवा एग्रीसाइंस के प्रतिनिधि डॉ. बसवेश्वर घोड़की ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। मंच संचालन डॉ. रीना चौहान ने किया। इस अवसर पर किसानों को किट भी वितरित की गई।
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कांबोज ने समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) को टिकाऊ खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि किसान केवल रासायनिक दवाओं पर निर्भर न रहें। खेतों की नियमित निगरानी, कीटों की सही पहचान, जैविक नियंत्रण, फेरोमोन ट्रैप और कीट प्रतिरोधी किस्मों को अपनाएं। इससे खेती की लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
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उन्होंने कहा कि बिना जरूरत और अधिक मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव करने से खेती की लागत बढ़ने के साथ फसल, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। कीटनाशक खरीदते और इस्तेमाल करते समय पैकेट या बोतल पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। छिड़काव के दौरान मास्क, दस्ताने और अन्य सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करना जरूरी है। कीटनाशकों का गलत इस्तेमाल मिट्टी, पानी, पशु-पक्षियों और लाभकारी कीटों के लिए भी हानिकारक है।
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अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने कहा कि कीटनाशकों के प्रयोग से पहले फसल और उसमें लगने वाले कीट की सही पहचान जरूरी है। विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता यादव ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विषय से संबंधित जानकारी दी। कोरटेवा एग्रीसाइंस के प्रतिनिधि डॉ. बसवेश्वर घोड़की ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। मंच संचालन डॉ. रीना चौहान ने किया। इस अवसर पर किसानों को किट भी वितरित की गई।
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